वृक्ष का पर्यायवाची शब्द | Vriksh Ka Paryayvachi Shabd

वृक्ष का पर्यायवाची शब्द | Vriksh Ka Paryayvachi Shabd : शाखी, द्रुम, पेड़, गांव, पादप, विपट, रुख, तरू, अगम, बूटा, वनस्पति, रूक्ष आदि, आज की नई पोस्ट वृक्ष का पर्यायवाची शब्द हिंदी में आज इस पोस्ट के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे की वृक्ष का पर्यायवाची शब्द तथा साथ ही व से पर्यायवाची शब्द हिंदी में |  ( Vriksh Ka Paryayvachi Shabd in Hindi) के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण के माध्यम से इस पोस्ट को पढ़ेंगे।

vruksh ka paryayvachi Shabd kya hota hai
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पर्यायवाची शब्द किसे कहते हैं?

पर्यायवाची शब्द की परिभाषा : वह शब्द जो एक समान अर्थ (एक दूसरे की तरह अर्थ) रखते हैं। वो शब्द पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं।

चुंकि इनके अर्थ में समानता अवश्य रहती है लेकिन इनका प्रयोग विभिन्न प्रकार से होता है पर्यायवाची शब्दों को उसके गुण व भाव के अनुसार प्रयोग किया जाता है क्योंकि एक ही शब्द या नाम हर स्थान पर उपयुक्त नहीं हो सकता है ‘इच्छा’ शब्द के स्थान पर ‘कामना’ शब्द प्रयोग करना कितना शर्मनाक होगा आपको ऐसे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए जो छोटे व प्रचलित हो।

वृक्ष का पर्यायवाची शब्द क्या होता है?

वृक्ष का पर्यायवाची शब्दVriksh Ka Paryayvachi Shabd
शाखी, द्रुम, पेड़, गांव, पादप, विपट, रुख, तरू, अगम, बूटा, वनस्पति, रूक्षSaakhi, drum, ped, gaon, padap, vipat, rukh, tru, Agam, buta, vanspati, ruchh

 से शुरू होने वाले पर्यायवाची शब्द

  • वृक्ष – पेड, शाखी, विटप, पादप, दुम, रूख, गांछ 
  • विद्युत – बिजली, दामिनी, चपला, चञ्चला, तडित, कौंधा, अशिन, घनवल्ली, बीजुरी, क्षणप्रभा,काञ्चन, चम्पा, सौदामिनी, छटा 
  • वंश – खानदान, कुल, घराना, 
  • वक्ता – वाचक, प्रवक्ता, व्याख्याता, भाषणकर्ता, 
  • वक्र – तिरछा, कुटिल, टेढ़ा तिर्यक, 
  • वक्ष – सीना, छाती, उदरस्थल, उर, वक्षस्थल, 
  • वचन – वादा, प्रण, कथन, बात, उक्ति
  • वल्लभ – पति, नाथ, प्राणेश्वर, प्राणनाथ, प्रियतम, प्रिय
  • वस्तुतः – वास्तव में, सचमुच, दरअस्ल, यथार्थत:
  • वस्तु – चीज, पदार्थ, द्रव्य
  • वस्त्र – कपडा, वसन, चीर, अम्बर, पट, चैल, 
  • वांछित – चाहा हुआ, अपेक्षित, अभीष्ट, अभिलषित, अभिप्रेत, अभीप्सित, ईप्सित, 
  • वाणी – भाषा, बोली, बात, वचन
  • वातावरण – पर्यावरण, परिवेश, वायुमण्डल
  • विष्णु – चक्रधर, नारायण, केशव, माधव, शंखचर, मुरारी, लक्ष्मीपति, चतुर्भुज, गरुड़वज, चक्रपाणि, विश्वरूप, पीताम्बर, अच्युत, जनार्दन, विश्वम्भर, मुकुन्द, हृषिकेश, दामोदर, गोविन्द, विचु, जलाशायी, वनमाली, उपेन्द्र, मधुरिपु रमापति, रमेश, गदाधर, इन्दिरापति 
  • विधाता – ब्रह्मा, सष्टा, विरञ्चि, विधि, अब्जयोनि
  • विनाशी – विनाशशील, मरणशील, मरणधर्मी, अनित्य, नश्वर
  • विनिमय – आदान-प्रदान, लेन-देन, अदला-बदली, व्यतिहार
  • विपत्ति – आफत, मुसीबत, आपदा, संकट, विपदा
  • विपन्न – पीड़ित, दुःखी, व्यथित, विपत्तिग्रस्त, आर्त
  • विधि – चाल, तरीका, रीति, नियम, शैली, पद्धति, प्रणाली, 
  • विमल – पवित्र, निर्मल, स्वच्छ, पावन, विशुद्ध
  • विमान – वायुयान, हवाईजहाज, उड़नखटोला, खग, नमयान
  • विमुख – बेलाग, उदासीन, अनासक्त, तटस्थ, विरक्त
  • विरक्ति – विराग, उदासीनता, अनासक्ति, विमुखता, निर्लिप्तता, 
  • विराम – आराम, विश्राम, ठहराव, अटकाव, 
  • विरद – गुणगान, गुणवर्णन, यशोगान, प्रशस्ति, कीर्ति 
  • विलास – आनन्द, भोग, सुखभोग, वासना, सन्तुष्टि, 
  • विलासी – भोगी, विषयी, कामी, लम्पट, कामुक
  • विषम – भयंकर, खौफनाक, भीषण, उग्र, भयावह, 
  • विषम – असमान, असंगत, बेजोड़, अनमेल, बेमेल, 
  • विष्टा – गृह, मल, पुरीष
  • विस्तृत – विस्तीर्ण, लंबा-चौडा, विशाल, फैला हुआ, 
  • विह्वल – बेचैन, आकुल, व्यग्र, व्याकुल, विक्षुब्ध
  • वेशभूषा – पोशाक, पहनावा, लिबास, परिधान, 
  • वेश्या – तवायफ, रण्डी, पतुरिया, चञ्चला, सदासुहागिन, गणिका, वारागना, 
  • वैचित्र्य – निरालापन, अनूठापन, अजूबा, विलक्षणता, अनोखापन, 
  • वैभव – सम्पत्ति, धन-दौलत, समृद्धि, सम्पन्नता, सम्पदा, ऐश्वर्य
  • वैश्य – लाला, बनिया, सौदागर, व्यापारी, वणिक, आपणिक, वनिकया
  • वर्णन – बयान, निरूपण, विवेचन, वृत्तान्त, चित्रण, 
  • वर – मुख्य, श्रेष्ठ, प्रधान, उत्तम, सर्वोपरि, उत्कृष्ट
  • वरण – चुनाव, चयन, छँटाई
  • वर्ग – समूह, समुदाय, श्रेणी, कोटि, जमात, सम्प्रदाय
  • वर्ष – साल, बरस, वत्सर, अब्द
  • वर्षा – बरसात, बारिश, वर्षाऋतु, वर्षाकाल, बरखा, पावस, चौमासा, मेह, वृष्टि
  • वायु – हवा, समीर, अनिल, पवन, वात, मारुत 
  • वास – गृह, घर, मकान, भवन, आवास, निवास, सदन, निकेतन
  • वास्तविक – सचमुच, असलियत, सत्यता, यथार्थता
  • विकार – खराबी, दोष, बिगाड़ बुराई, विकृति
  • विज्ञ – बुद्धिमान, ज्ञानी, समझदार, जानकार, पण्डित, विज्ञान 
  • विद्या – सरस्वती, गुण, ज्ञान, शिक्षा, इल्म, कर्णिका
  • विद्यालय – स्कूल, पाठशाला, शिक्षालय, शिक्षणसंस्थान, मदरसा, विद्यामन्दिर,

वृक्ष से जुडे कुछ रोचक तथ्य

Vriksh Ka Paryayvachi Shabd

वृक्ष- भारत का राष्ट्रीय वृक्ष बरगद है। आज के युग में     वृक्षों का हमारे लिए बहुत महत्व है। वृक्षों से हमें आक्सीजन प्राप्त होती है। जो हमारे वातावरण को शुद्ध करती है। और शुद्ध वातावरण हमारे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होता है। वृक्ष हमें शुद्ध हवा प्रदान करते हैं। तथा हमारे फेफड़े सुदामा का संचार करते हैं। वृक्ष से हमें अनेक प्रकार की अशुद्धियां प्राप्त होती हैं। जिससे हमारे रोगों का नाश होता है। पेड़ पौधों से हमारा वातावरण हरा भरा रहता है पेड़ों से हमें फल, फूल, कागज, गोद आदि प्रकार की चीजें प्राप्त होती हैं। पेड़ों से हमें ईंधन की प्राप्ति होती है। यदि वातावरण में पेड़ पौधे नहीं होते तो पृथ्वी पर जीवन संभव ही नहीं होता। वृक्ष जीव जंतुओं तथा पक्षियों के लिए घर का रूप होते हैं। इसलिए हमें वृक्षों को काटना नहीं चाहिए। और लोगों को वृक्ष लगाने की सलाह देनी चाहिए। क्योंकि इससे कई प्रकार की चीजें प्राप्त होती हैं। वृक्षों से ही वर्षा होती है। हर व्यक्ति को वृक्षारोपण अवश्य करना चाहिए।

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