विराम चिन्ह किसे कहते हैं परिभाषा, प्रकार व उदाहरण | Viram Chinh Kise Kahate Hain

नमस्ते दोस्तों मैं आप सभी लोगों का स्वागत करता हूं मैं Studyroot.in की तरफ से आज हम आपको विराम चिन्ह किसे कहते हैं (Viram Chinh Kise Kahate Hain) के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर आएंगे हम पहले देखेंगे कि Viram Chinh ke ke kitne bhed hote Hain और हम विराम चिन्ह के सभी भेदों को पढ़ने के साथ Viram Chinh kise kahate Hain in Hindi Grammar यह पोस्ट क्लास 10 व 12 के छात्रों के लिए यह कहें 1 से लेकर 12 के सभी छात्रों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। मैंने इस को इस प्रकार लिखा है कि आप विराम चिन्ह के बारे में अधिकतम जानकारी प्राप्त कर सकें जिससे आपको दूसरी कोई पोस्ट पढ़ने की कोई जरूरत ना पढ़े।

Viram Chinh
Viram Chinh
  • भाषा विज्ञान को सही अर्थों में सार्थकता प्रदान करने के उद्देश्य से विराम चिन्ह का अति महत्व है। इन चिन्हों की सहायता से किसी भी वाक्यांश का भाव स्पष्ट हो जाता है।
  • भाषा के आगे जो निश्चित चिन्ह लगाया जाता है उसे विराम चिन्ह कहते हैं। विराम चिन्ह का सही प्रयोग ना करने पर वाक्य के अर्थ का अनर्थ हो जाता है।

जैसे – रोको, मत जाने दो।
         रोको मत, जाने दो।

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 विराम चिन्ह की परिभाषा | Viram Chinh Ki Paribhasha

विराम चिन्ह की परिभाषा और आवश्यकता –

शब्दों और वाक्यों का परस्पर संबंध बताने तथा किसी विषय को भिन्न-भिन्न भागों में बांटने और पढ़ते समय उपर्युक्त विराम पाने के लिए रचनाओं में जिन चिन्हों का प्रयोग किया जाता है उन्हें विराम चिन्ह कहते हैं।
अर्थात किसी वाक्य अथवा वाक्यांश का उच्चारण करने में अर्थ और भावों की भिन्नता के अनुसार जहां कुछ ठहराव के साथ कहीं-कहीं विश्राम करना पड़ता है लेख इत्यादि में विश्राम को सूचित करने के लिए भांति-भांति के चिन्ह व्यवह्त किए जाते हैं, उन्हीं चिन्हों को व्याकरण में विराम चिन्ह कहते हैं।

विराम चिन्ह वाक्य में पद वाक्यांश और खंड वाक्य के पारस्परिक संबंध सूचित करने के अतिरिक्त उनके अर्थों को विधिवत स्पष्ट करते हैं। कभी-कभी विराम चिन्ह के अभाव में वाक्यार्थ ही समझ में नहीं आता, और कभी कभी अर्थ का अनर्थ हो जाता है इस कारण वाक्यों में विराम चिन्हों को उपयुक्त स्थानों पर प्रयुक्त किया जाता है।

 विराम चिन्ह का महत्व और अभिप्राय

वैसे तो हिंदी का निजी विराम चिन्ह केवल ‘पूर्ण विराम‘ है जो ( ) चिन्ह से सूचित किया जाता है।
प्राचीन काल में संस्कृत में इसी का प्रयोग होते रहने के कारण हिंदी में भी यही विराम चिन्ह बहुत समय तक बना रहा पर मुद्रण-यंत्रों के प्रचार मुद्रित पुस्तकों के व्यवहार और अंग्रेजी शैली से संबंध विकसित होने पर हिंदी में भी कई विराम चिन्हों का प्रयोग किया जाने लगा।

 विराम चिन्ह का शाब्दिक अर्थ

विराम चिन्ह का शाब्दिक अर्थ ‘विराम’ एवं ‘रुकना’ है।

विराम चिन्ह चार्ट लिस्ट | Viram Chinh List

विराम चिह्न का नामविराम चिन्ह
पूर्ण विराम (Full Stop) ।
अर्द्ध विराम (Semi colon) ;
अल्पविराम (comma),
योजक चिन्ह (Hyphen)
संबंध चिन्ह या निर्देशक चिन्ह
रेखांकित_
विवरण चिन्ह (colon Dash):-
प्रश्नवाचक चिन्ह (interrogation)?
विस्मयादिबोधक चिन्ह, संबंधबोधक!
उद्धरण चिन्ह (inverted commas)” “
कोष्टक चिन्ह (Brackets) ( )  {  }   [  ]
निर्देशक चिन्ह (Dash)
समानता सूचक चिन्ह (Equality)=
अपूर्णता सूचक (Error or indicator) ××××
हंस पद या त्रुटिपूरक^
संकेत सूचक/संक्षेप सूचक (लाघव)
पुनरुक्ति सूचक,,
समाप्ति सूचक चिन्ह -: 0 :-,  -x-,  -0-

पूर्ण विराम चिन्ह

नई कविता और उपन्यासों से लुप्तप्रायः होने के बाद भी पूर्ण विराम चिन्ह का हिंदी भाषा में महत्वपूर्ण स्थान है। यह किसी कथन की पूर्णता, अप्रत्यक्ष प्रश्नों के अंत में कविता में छंद के चरण के अंत में आता है।

पूर्ण विराम के उदाहरण

  • गांधी जी ने कहा था करो या मरो।
  • सिंधु-सा विस्तृत और अथाह
  • एक निर्वासित का उत्साह
  • दहेज प्रथा भारतीय जीवन पर लगा एक कलंक है

अर्द्धविराम चिन्ह ( ; )

एक शब्द समूह को दूसरे शब्द समूहों से या वाक्य या वाक्यांशों से प्रथक दिखलाने के लिए अर्द्धविराम (;) चिन्ह का प्रयोग होता है।जैसे – एम० ए०; डी० फिल या एम० सी० सी०; पी० एच०डी०; जो लोग उसकी प्रशंसा करते हैं वह उन्हीं को मूर्ख कहते हैं।

अर्द्धविराम के उदाहरण

सूर्यास्त हुआ; आकाश लाल हुआ; पंछी गाते गाते घोसले की ओर उड़े; और जंगल में धीरे-धीरे अंधेरा फैलने लगा।

अल्पविराम चिन्ह  ( , )

अल्पविराम का अर्थ है थोड़ी देर के लिए रुकना लेकिन पूर्व और पार से सघनता पूर्वक संबंध भी है, ऐसे स्थल पर अल्पविराम का प्रयोग होता है।

अल्पविराम के उदाहरण

  • गांधीजी, जवाहरलाल नेहरु, लाल बहादुर शास्त्री, नरेंद्र देव, अशोक मेहता और पटवर्द्धन में पधारे।
  • भगवान ने दुख और सुख, पाप और पुण्य, दिन और रात यह सब बनाए हैं।

योजक चिन्ह ( – )

  • दो या अधिक शब्दों को जोड़ने के लिए प्रायः समस्त पदों में इसका प्रयोग होता है।
  • दो शब्दों को एक साथ जोड़ने में यथा समान चिन्ह के रूप में ‘दिन – रात’ ‘माता – पिता’

निश्चित संख्यावाचक विशेषण, अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण, गुणवाचक विशेषण आदि का प्रयोग करते समय ‘सा’ या ‘सी’ आदि का प्रयोग करते हैं तब योजक चिन्ह लगाया जाता है।

योजक चिन्ह के उदाहरण

  • थोड़ा-सा    
  • बहुत-सा 
  • बहुत-सा धन लेकर राम श्याम अपने गांव लौटे।

संबद्धता चिन्ह या निर्देश चिन्ह ( – )

निर्देश चिन्ह-से योजक चिन्ह से बड़ा होता है इसका प्रयोग अधोलिखित अथवा आगे स्पष्टीकरण के भाव को प्रकट करता है। पूर्व वाक्य या वाक्यांश के बाद (  ) निर्देश चिन्ह लगाकर फिर आगे स्पष्टीकरण देते हैं।

संबद्धता चिन्ह या निर्देश चिन्ह के उदाहरण

  • दुनिया में नयापन – नूतनत्व – एसी चीज नहीं, जो गली – गीली मारी – मारी फिरती हो।
  • इसी सोच में सवेरा हो गया की हाय इसी विरान में अब कैसे प्राण बचे बचेंगे–न जाने कौन–से मौत मरूंगा।
  • महात्मा जी मैं केवल दो बातें बताईं – अहिंसा और त्याग इनका पालन करना प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है।
  • नाटकों के संवादों में मानसा – बेटी, यदि तू जानती मणिमाला – क्या?

 रेखांकित चिन्ह ( _ )

किसी अंश को विशेष महत्व देने के लिए लेखक उस वाक्यांश को रेखांकित कर देता है, इसका कोई आकार नहीं होता। जितना अंश आवश्यक होता है उतना रेखांकित किया जाता है कभी-कभी तो कई पंक्तियां एक साथ रेखांकित हो जाती हैं।

विवरण चिन्ह ( :- )

विवरण चिन्ह दो रूपों में आता है। पहले विसर्ग चिन्ह जैसा लिखकर और दूसरा विसर्ग  चिन्ह के आगे योजक चिन्ह लगाकर वास्तव में यह दो अलग-अलग चिन्ह होते हैं जिनके दो अलग-अलग भाव है

विवरण चिन्ह के उदाहरण

• निम्न शब्दों की व्याख्या कीजिए :- संज्ञा, क्रिया                                                                                                            

• पुरुषार्थ चार है :- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष।

प्रश्नवाचक चिन्ह (?)

किसी भी प्रश्न सूचक वाक्य के बाद में पूर्ण विराम की जगह प्रश्नवाचक चिन्ह का प्रयोग होना चाहिए।

प्रश्नवाचक चिन्ह के उदाहरण

  • तुम्हें नहीं मालूम कि मैं क्या चाहता हूं?
  • हमारे नेता सच्चे दिल से देश की सेवा कर रहे हैं?
  • धर्मेंद्र घर पर आया या नहीं?

निर्देशक चिन्ह (—)

जब परस्पर या समान कोटि की कई एक वस्तुओं का निर्देश किया जाये।

निर्देशक चिन्ह के उदाहरण

समास छः प्रकार के होते हैं

  • अव्ययीभाव समास
  • तत्पुरुष समास
  • द्विगु समास
  • कर्मधारय समास
  • द्वंद समास
  • बहुव्रीहि समास

विस्मयादि बोधक चिन्ह ( ! )

हर्ष, शोक, घृणा, भय, विस्मय आदि के भाव के सूचक शब्दों या वाक्यों के अंत में विस्मयादि बोधक चिन्ह का प्रयोग होता है।      जैसे –  छी: छी!, ऐसी जिंदगी!, वाह! मजा आ गया।

उद्धरण चिन्ह (” “)

उद्धरण चिन्ह को अवतरण ( ” ) चिन्ह भी कहते हैं। इनका प्रयोग दो प्रकार से किया जाता है।

१. इकहरा ( ‘ ‘ ) – जब किसी कवि का उपनाम, पुस्तक का नाम, पत्र-पत्रिका का नाम, लेख या कविता का शीर्षक आदि का उल्लेख करना होता है।

जैसे-कवियित्री

२. दोहरा ( ” ” ) – वाक्यांश को उद्धतृ करते समय। इस चिन्ह का प्रयोग करते हैं।

जैसे– कबीर कहते हैं – दुनिया ऐसे बाबरी पाथर पूजन जाये।

कोष्टक चिन्ह ( ), { }, [ ]

कोष्टक चिन्ह का प्रयोग किसी पद या पदांश के तुरंत स्पष्टीकरण में किया जाता है। कभी-कभी तो जो मूल तथ्य के साथ न कहकर भी साथ जोड़नी होती हैं। उसका कोष्टक चिन्ह में आगे लिख देते हैं।

कोष्टक चिन्ह के उदाहरण

  • प्रज्ञाचक्षु (नेत्रहीन) की अन्य इंद्रियां अत्यंत प्रबल हो जाती हैं।  [ { (6×3)÷3+4}6×-(5×5)]
  • अफ्रीका के नीग्रो लोग (हब्सी) अधिकतर उन्ही की संतान हैं।

समता सूचक चिन्ह ( = )

जब एक बात के समतुल्य, दूसरा भाव या शब्द होता हैं। तब वहां समता सूचक चिन्ह लगाया जाता है। यह शब्द का अर्थ बताने के लिए लगता है।

समता सूचक चिन्ह  के उदाहरण

  • दिन = दिवस 
  • रात्रि = निशा
  • अचला = पृथ्वी 
  • ₹1 = 100 पैसे

परिणति सूचक ( > )

जब संक्षेप में यह भाव प्रकट होता है कि इस संपूर्ण बात या भाव का विकसित रूप आगामी रूप यह बना तो “परिणति चिन्ह” का प्रयोग होता है। 

जब वर्तमान से पूर्व की ओर लौटना होता है तब इसका रुख बदल देते हैं ( < ) यथा यदि शब्दों का यह प्रदर्शित करना हो की वर्तमान रूप यह रहा है और पूर्व रूप क्या था तो उसे इस प्रकार चित्रित करेंगे।

जैसे  कपूर < कप्पूर < कर्पूर

अपूर्णता सूचक चिन्ह (×××××) , (…….)

किसी लेख अथवा अंश में से कुछ अंश छोड़ा जाता है। तब इस बात को प्रदर्शित करने के लिए कि कोई अंश छोड़ा गया है अपूर्णता सूचक चिन्ह लगा देते हैं।

जैसे – “तुम्हारा सब काम करूंगा।  ×××× बोलो बड़ी मां ×××× , तुम गांव छोड़कर चली तो नहीं जाओगी? बोलो……।।”

हंस पद या त्रुटि पूरक ( ^ )

लिखने में जब कोई शब्द छूट जाता है तब जिस स्थल पर वह शब्द या वाक्यांश होना चाहिए उस स्थल पर हंसपद लगाकर उसी पंक्ति के ऊपर उसी जगह या यदि जगह ना हो तो हाशिये पर भूले हुए अंश को लिख देते हैं।

जैसे – मुझे आज ^ जाना है। (मुझे आज गोवा जाना है)

संक्षेप संकेत सूचक या लाघव चिन्ह ( ० )

जब किसी शब्द को संक्षेप में लिखना होता है तब उसका प्रथम वर्ण लिखकर उसके आगे यह चिन्ह लगा दिया जाता है।

जैसे- 

  • डॉक्टर जगदीश।  – डॉ० जगदीश
  • बैचलर ऑफ आर्ट्स – बी० ए०

पुनरुक्ति सूचक चिन्ह ( ,, )

इस चिन्ह का प्रयोग तब होता है जब ऊपर लिखे अंश को नीचे की पंक्ति में यथावत दोहराना होता है। उस दशा में दोबारा लिखने का श्रम बचता है।

जैसे 

  • माननीय पंडित लाल बहादुर शास्त्री
  •           ,,       ,,    केदारनाथ सिंह
  •           ,,       ,,    जवाहरलाल नेहरू

समाप्ति सूचक चिन्ह ( _ , _ ० _ )

किसी रचना, प्रसंग संबंधी लेखन की समाप्त होने पर सबसे अंत में ‘समाप्ति सूचक चिन्ह‘ लगाया जाता है।

निष्कर्ष

दोस्तों आज की पोस्ट Viram Chinh kise kahate Hain मैं उम्मीद करता हूं कि यह पोस्ट आपको पसंद आई होगी मैंने Viram Chinh in Hindi को सरलता के साथ समझाने की पूर्ण कोशिश की है। अगर कोई जानकारी Viram Chinh kise kahate Hain और Viram Chinh ke kitne bhed hote Hain in Hindi या अन्य किसी प्रकार की पोस्ट में हमसे कुछ छूट गया। हो तो आप नीचे कमेंट कर हमें सूचित कर सकते हैं। और हम आपके लिए आगे किस विषय पर जानकारी दें यह भी सुझाव जरूर बताएं आप आपके कमेंट का इंतजार रहेगा।

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