विद्या का पर्यायवाची शब्द | Vidya Ka Paryayvachi Shabd Kya Hota Hai

विद्या का पर्यायवाची शब्द | Vidya Ka Paryayvachi Shabd : शिक्षा, इम्ल, कर्णिका, ज्ञान, गुण, सरस्वती, भारती, शारदा, वीणावादिनी, वागेश्वरी, वाग्देवी आदि, आज की नई पोस्ट विद्या का पर्यायवाची शब्द हिंदी में आज इस पोस्ट के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे की वस्त्र का पर्यायवाची विद्या तथा साथ ही व से पर्यायवाची शब्द हिंदी में |  ( Vidya Ka Paryayvachi Shabd in Hindi) के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण के माध्यम से इस पोस्ट को पढ़ेंगे।

Vidya ka paryayvachi Shabd kya hota hai
Vidya ka paryayvachi Shabd kya hota hai

पर्यायवाची शब्द किसे कहते हैं?

पर्यायवाची शब्द की परिभाषा : वह शब्द जो एक समान अर्थ (एक दूसरे की तरह अर्थ) रखते हैं। वो शब्द पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं।

चुंकि इनके अर्थ में समानता अवश्य रहती है लेकिन इनका प्रयोग विभिन्न प्रकार से होता है पर्यायवाची शब्दों को उसके गुण व भाव के अनुसार प्रयोग किया जाता है क्योंकि एक ही शब्द या नाम हर स्थान पर उपयुक्त नहीं हो सकता है ‘इच्छा’ शब्द के स्थान पर ‘कामना’ शब्द प्रयोग करना कितना शर्मनाक होगा आपको ऐसे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए जो छोटे व प्रचलित हो।

विद्या का पर्यायवाची शब्द क्या होता है?

विद्या का पर्यायवाची शब्दVidya Ka Paryayvachi Shabd
शिक्षा, इम्ल, कर्णिका, ज्ञान, गुण, सरस्वती, भारती, शारदा, वीणावादिनी, वागेश्वरी, वाग्देवीShiksha, emal, karnika, Gyan, gud, Saraswati, Bharti, Sharda, vidyavardhini, vagheshwari, bhagdevi

 से शुरू होने वाले पर्यायवाची शब्द

  • विद्या – सरस्वती, गुण, ज्ञान, शिक्षा, इल्म, कर्णिका
  • विद्यालय – स्कूल, पाठशाला, शिक्षालय, शिक्षणसंस्थान, मदरसा, विद्यामन्दिर, 
  • विष्णु – चक्रधर, नारायण, केशव, माधव, शंखचर, मुरारी, लक्ष्मीपति, चतुर्भुज, गरुड़वज, चक्रपाणि, विश्वरूप, पीताम्बर, अच्युत, जनार्दन, विश्वम्भर, मुकुन्द, हृषिकेश, दामोदर, गोविन्द, विचु, जलाशायी, वनमाली, उपेन्द्र, मधुरिपु रमापति, रमेश, गदाधर, इन्दिरापति 
  • विधाता – ब्रह्मा, सष्टा, विरञ्चि, विधि, अब्जयोनि
  • विनाशी – विनाशशील, मरणशील, मरणधर्मी, अनित्य, नश्वर
  • विनिमय – आदान-प्रदान, लेन-देन, अदला-बदली, व्यतिहार
  • विपत्ति – आफत, मुसीबत, आपदा, संकट, विपदा
  • विपन्न – पीड़ित, दुःखी, व्यथित, विपत्तिग्रस्त, आर्त
  • विधि – चाल, तरीका, रीति, नियम, शैली, पद्धति, प्रणाली, 
  • विमल – पवित्र, निर्मल, स्वच्छ, पावन, विशुद्ध
  • विमान – वायुयान, हवाईजहाज, उड़नखटोला, खग, नमयान
  • विवाह – शादी, ब्याह, निकाह, परिणय, गठबन्धन, पाणिग्रहण, गठजोड़
  • विधवा – रॉड, पतिहीना, पतिविहीना, अनाथा, पतिरहिता 
  • विफल – बेकार, व्यर्थ, निष्फल, फलरहित, निरर्थक
  • विभा – प्रभा, आभा, चमक, कान्ति, शोभा
  • विभिन्न – तरह-तरह का, भिन्न-भिन्न, नाना प्रकार, विविध, भाँति-भाँति का 
  • विभोर – मस्त, लीन, मग्न, मुग्ध, तल्लीन
  • वर्णन – बयान, निरूपण, विवेचन, वृत्तान्त, चित्रण, 
  • वर – मुख्य, श्रेष्ठ, प्रधान, उत्तम, सर्वोपरि, उत्कृष्ट
  • वरण – चुनाव, चयन, छँटाई
  • वर्ग – समूह, समुदाय, श्रेणी, कोटि, जमात, सम्प्रदाय
  • वर्ष – साल, बरस, वत्सर, अब्द
  • वर्षा – बरसात, बारिश, वर्षाऋतु, वर्षाकाल, बरखा, पावस, चौमासा, मेह, वृष्टि, 
  • वल्लभ – पति, नाथ, प्राणेश्वर, प्राणनाथ, प्रियतम, प्रिय
  • वस्तुतः – वास्तव में, सचमुच, दरअस्ल, यथार्थत:
  • वस्तु – चीज, पदार्थ, द्रव्य
  • वस्त्र – कपडा, वसन, चीर, अम्बर, पट, चैल, 
  • वांछित – चाहा हुआ, अपेक्षित, अभीष्ट, अभिलषित, अभिप्रेत, अभीप्सित, ईप्सित, 
  • वाणी – भाषा, बोली, बात, वचन
  • वातावरण – पर्यावरण, परिवेश, वायुमण्डल
  • वायु – हवा, समीर, अनिल, पवन, वात, मारुत 
  • वास – गृह, घर, मकान, भवन, आवास, निवास, सदन, निकेतन
  • वास्तविक – सचमुच, असलियत, सत्यता, यथार्थता
  • विकार – खराबी, दोष, बिगाड़ बुराई, विकृति
  • विज्ञ – बुद्धिमान, ज्ञानी, समझदार, जानकार, पण्डित, विज्ञान
  • वन – जंगल, विपिन, अरण्य, कानन, अटवी, कान्तार 
  • वादविवाद – बहस, तर्क-वितर्क, मुबाहिसा, विमर्श, वादानुवाद, शास्त्रार्थ
  • विगत – अतीत, बीता, गया हुआ, व्यतीत, 
  • विपरीत – खिलाफ, उलटा, विरुद्ध, प्रतिकूल
  • वृक्ष – पेड, शाखी, विटप, पादप, दुम, रूख, गांछ 
  • विद्युत – बिजली, दामिनी, चपला, चञ्चला, तडित, कौंधा, अशिन, घनवल्ली, बीजुरी, क्षणप्रभा,काञ्चन, चम्पा, सौदामिनी, छटा 
  • वंश – खानदान, कुल, घराना, 
  • वक्ता – वाचक, प्रवक्ता, व्याख्याता, भाषणकर्ता, 
  • वक्र – तिरछा, कुटिल, टेढ़ा तिर्यक, 
  • वक्ष – सीना, छाती, उदरस्थल, उर, वक्षस्थल, 
  • वचन – वादा, प्रण, कथन, बात, उक्ति
  • विलोम – प्रतिलोम, उलटा, विरुद्ध, विपरीत, खिलाफ, प्रतिकूल 
  • विवश – लाचार, बेबस, मजबूर, असहाय, बाध्य 
  • विवरण – खुलासा, ब्यौरा, वर्णन, तफसील
  • विवेचन – जाँच, निरूपण, समीक्षण, मीमासा, 
  • विशद – स्पष्ट, साफ, प्रकट, व्यक्त, 
  • विशिष्ट – प्रधान, श्रेष्ठ, मुख्य, गणमान्य 
  • विष – जहर, माहुर, कालकूट, गरल, हलाहल 
  • विषम – भयंकर, खौफनाक, भीषण, उग्र, भयावह, 
  • विषम – असमान, असंगत, बेजोड़, अनमेल, बेमेल, 
  • विष्टा – गृह, मल, पुरीष
  • विस्तृत – विस्तीर्ण, लंबा-चौडा, विशाल, फैला हुआ, 
  • विह्वल – बेचैन, आकुल, व्यग्र, व्याकुल, विक्षुब्ध, 
  • वीर्य – बीज, धातु, जीवन, शुक्र, सार, तेज, 
  • वृत्त – घेरा, गोला, मण्डल
  • वृत्तान्त – खबर, समाचार, हाल
  • वृत्ति – पेशा, रोजी, रोजगार, जीविका, धन्धा, 
  • वृथा – बेकार, व्यर्थ, बेफायदा, निरर्थक, निष्प्रयोजन, निष्प्रयोज्य
  • वृद्धि – विकास, उन्नति, बढोत्तरी, वर्द्धन, बढती, प्रसार
  • वेतन – तनख्वाह, पगार, तलब 
  • वेशभूषा – पोशाक, पहनावा, लिबास, परिधान, 
  • वेश्या – तवायफ, रण्डी, पतुरिया, चञ्चला, सदासुहागिन, गणिका, वारागना, 
  • वैचित्र्य – निरालापन, अनूठापन, अजूबा, विलक्षणता, अनोखापन, 
  • वैभव – सम्पत्ति, धन-दौलत, समृद्धि, सम्पन्नता, सम्पदा, ऐश्वर्य
  • वैश्य – लाला, बनिया, सौदागर, व्यापारी, वणिक, आपणिक, वनिकया 
  • व्यथित – दुःखी, पीडित, कष्टापन्न, क्लेशित, वेदनाग्रस्त
  • व्यभिचारिणी – छिनार, पुश्चली, कुलटा, स्वैरिणी, 
  • व्यवस्था – इन्तजाम, बन्दोबस्त, आयोजन, प्रबन्ध
  • व्याख्या – विवेचन, वर्णन, टीका

विद्या से जुडे कुछ रोचक तथ्य

Vidya Ka Paryayvachi Shabd

विद्या- विद्या संस्कृत भाषा का शब्द है। विद्या शब्द संस्कृत भाषा के विद् धातु से उत्पन्न हुआ है। जिसका अर्थ जानना या ज्ञान की प्राप्ति होता है।

विद्या दो प्रकार की होती है- 

1.परा विद्या   2.अपरा विद्या

परा विद्या- 

  • परा विद्या को वैदिक ज्ञान का केंद्र बिंदु माना जाता है।
  • मण्डकोपनिषद में इस विद्या की विस्तार से चर्चा की गई है।
  • इसके अनुसार विद्या वह है जो मानव चरण सत्य से साक्षात्कार करती है।

अपरा विद्या-

  • परा विद्या के अंतर्गत वेद तथा वेदांगो के ज्ञान की गणना की जाती है।
  • इसके द्वारा भौतिक वाद का पूरा ज्ञान होता है।
  • इसमें समस्त वेदों का अध्ययन निहित है।
  • इस विद्या में छात्रों को बहुत सत्य जैसे- व्याकरण, अर्थ, चिकित्सा, विज्ञान आदि का ज्ञान प्रदान किया जाता है।
  • विद्या हमें सांसारिक कुशलता में परिपूर्ण करके जीवनयापन में सहायता प्रदान करती है।

बिना विद्या के मनुष्य अंधे के समान होता है। विद्या ऐसा धन है। जिसे ना कोई चुरा सकता है और ना बांट सकता है। और ना ही यह कभी भूल हो सकता है। मनुष्य को अधिक से अधिक विद्या प्राप्त करनी चाहिए।

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