Vibhats Ras : वीभत्स रस की परिभाषा, उदाहरण व स्थाई भाव सहित | Vibhats Ras Kise Kahate Hain

स्वागत है दोस्तों आज की नई पोस्ट वीभत्स रस (Vibhats Ras) में आज इस पोस्ट के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे की वीभत्स रस किसे कहते हैं (Vibhats Ras Kise Kahate Hain) तथा सा ही वीभत्स रस के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण के माध्यम से इस पोस्ट को पढ़ेंगे। 

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Vibhats Ras Paribhasha Udaharan Sthayi Bhav

रस किसे कहते हैं | Ras Kise Kahate Hain

काव्यकथानाटकउपन्यास आदि के पढ़ने, सुनने या उसका अभिनय देखने से जो आनंद की प्राप्त होती है उसे रस कहते हैं।

वीभत्स रस की परिभाषा | Vibhats Ras Ki Paribhasha

इसका स्थायी भाव घृणा निंदा या जुगुप्सा है।

जुगुप्सा नामा का स्थायी भाव विभावरी भावों के द्वारा जब परिपक्व अवस्था होता है तब वह विभक्त रस कहां जाता है।

अन्य शब्दों में : किसी व्यक्ति या वस्तु को देखकर या सुनकर जब उसके प्रति घृणा का भाव उत्पन्न होता है तो वहां पर भी वीभत्स रस होता है।

वीभत्स रस के भाव स्पष्टीकरण | Vibhats Ras Ke Bhav

रसवीभत्स रस
स्थायी भावजुगुप्सा
आलंबनदुर्गंध, रक्त, खून, अस्थि
उद्दीपनकीड़े पड़ना, सड़ना
अनुभवथूकना, मुंह बनाना, नाक भौं सिकोड़ना
संचारी भावचिंता, शंका, आवेग, ग्लानि

वीभत्स रस के उदाहरण | Vibhats Ras Ke Udaharan

सुकूड सुकूड घाव से पिल्लू निकल रहा है।
नासिक से श्वेत पदार्थ निकल रहा है।
आंखें निकाल उड़ जाते, क्षणभर उड़ कर आ जाते हैं
शव जीभ खींचकर कौवे चुभला चुभला कर खाते
भोजन में स्वान लगे मुरदें थे भू पर लेटे
खा मांस चाट लेते थे चटनी सैम बहते बहते बेटे
स्वान अंगूर इन काटि काटि के खात विदारत।
निकल गली से तब हत्यारा आया उसने नाम पुकारा।
हाथ तौलकर चाकू मारा, छूटा लोहू का फव्वारा।।
छटि देत कुबर कै उगंट देत डाट काहू
कोउ अंतदिनि की पहिरि माला इतरात दिखावत।
कोउ चरबी लै लोप सहित निज अंगनि लावत।।
कोउ मुंडनि लै मानि मोद कंदुल लौ डारत।
कोउ रुण्डनि पे बैठि करेजौ फारि निकारत।।
मारहिं काटहिं धराहिं पछारहिं।
सीस तोरि सीसन्हसन मारहिं।।
सुभट सरीर नीर चारी भारी-भारी तहां,
सूरनि उछाहु कूर कादर डरत हैं।
फेकरि फेकरि फेरु फारि-फारि पेट खात,
काक कंक बालक कोलाहलु करत हैं
औझरी की झोरी कांधे, आंतनि की सेल्ही बांधे,
मूंड के कमण्डल खपर किये कोरिकै।
जोगिनी झुटुण्ड झुण्ड-झुण्ड बनी तापस-सी
तीर-तीर बैठी सो समरसरि खोरि कै।
आधलिखी कली मिली नाले में, कीड़े तन पर बिजबिजाते।
घृणित मानसिकता दर्शाती क्यों बेटी को यूं ठुकरावे।।
जहं तहं मज्जा मांस रुधिर लखि परत अंगारे।
जित तित छिटके हाड़ सेत कहुं कहुं रत नारे।।
रक्त मांस के सड़े पंक से उमड़ रही है,
महाधारे दुर्गन्ध रुद्र हो उठती ज्वाला।।

 

निष्कर्ष

छात्रों मैं उम्मीद करता हूं कि आपको आज की यह पोस्ट वीभत्स रस किसे कहते हैं (Vibhats Ras Kise Kehte Hain) आपको पसंद आई होगी मैं इस पोस्ट को वीभत्स रस को कुछ उदाहरण (Vibhats Ras Ke Udaharan) के माध्यम से समझने की संपूर्ण कोशिश की है जिससे आपको वीभत्स रस आसानी से समझ में आ जाए।

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