Veer Ras : वीर रस किसे कहते हैं परिभाषा, उदाहरण सहित | Veer Ras Kise Kahate Hain

स्वागत है दोस्तों आज की नई पोस्ट वीर रस (Veer Ras) में आज इस पोस्ट के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे की वीर रस किसे कहते हैं (Veer Ras Kise Kahate Hain) तथा सा ही वीर रस के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण के माध्यम से इस पोस्ट को पढ़ेंगे। 

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Veer Ras Kise Kahate Hain Paribhasha Udaharan

रस की परिभाषा | Ras Ki Paribhasha

काव्य, कथा, नाटक, उपन्यास आदि के पढ़ने सुनने या उसका अभिनय देखने से जो आनंद की प्राप्त होती है उसे रस कहते हैं।

  • रस का अर्थ है – आनंद

वीर रस की परिभाषा | Veer Ras Ki Paribhasha

उत्साह नामक स्थाई भाव जब विभवादि के सहयोग से परिपक्व होकर रस रूप में परिणत होता है तब वह वीर रस कहलाता है।

युद्ध अथवा किसी कठिन काम को करने के लिए हृदय में निहित उत्साह स्थाई भाव के जाग्रत होने के प्रभाव स्वरूप जो भाव उत्पन्न होता है उसे वीर रस कहते हैं।

वीर रस का निर्माण तब होता है जब शत्रुओं के प्रति विद्रोह, अधर्म, अत्याचार का विनाश असहायो को कष्ट से मुक्ति दिलाने में व्यंजित होते हैं।

वीर रस के भाव | Veer Ras Ke Bhav

रसवीर रस
स्थायीभावउत्साह
संचारी भावउत्सुकता, गर्व, आवेग
अनुभवउत्सुकता, गर्व, आवेग

वीर रस के भेद | Veer Ras Ke Bhed

वीर रस के चार भेद होते हैं।

  1. युद्धवीर  
  2. दानवीर  
  3. धर्मवीर 
  4. दयावीर

वीर रस के उदाहरण | Veer Ras Ke Udaharan

“मैं सत्य कहता हूं सखे! सुकुमार मत जानो मुझे।
यमराज से भी युद्ध में प्रस्तुत सदा जानो मुझे।।
हे सारथे! हैं द्रोण क्या? आवें स्वयं देवेंद्र भी।
वे भी न जीतेंगे समर में आज क्या मुझसे कभी।।”
चमक उठी सन् सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी।
बुंदेलो हरबोलों के मुंह, हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी।
वीर तुम बढ़े चलो। धीर तुम बढ़े चलो।
सामने पहाड़ हो सिंह की दहाड़ हो।
तुम निडर डरो नहीं तुम निडर डटो वही।
तनकर भाला यूं बोल उठा राणा! मुझको विश्राम न दे।
मुझको बैरी से हृदय क्षोभ तू तनिक आराम न दे।।
चढ़ चेतक पर तलवार उठा करता था भूतल पानी को।
राणा प्रताप सिर काट-काट करता था सफल जवानी को।।
फहरी ध्वजा, फड़की भुजा, बलिदान की ज्वाला उठी।
निज जन्मभू के मान में, चढ़ मुंड की माला उठी।।

युद्धवीर का उदाहरण

मानव समाज में अरुण पड़ा, जल जंतु बीच हो वरुण पड़ा।
इस तरह भभकता राणा था, मनों सर्पों में गरुण पड़ा।।

दानवीर का उदाहरण

हाथ गह्यो प्रभु को कमला कहै नाथ कहां तुमने चित धारी।
तंदुल खाय मुट्ठी हुइ दीन कियो तुमने दुइ लोक बिहारी।
खाय मुट्ठी तिसरी अब नाथ कहा निज वास की आस  विसारी।
रंकहिं आप समान कियो तुम चाहत आपहिं होत भिखारी।

धर्मवीर का उदाहरण

तीप शिरोमणि सीप तजी, जेहि पावक की कलुषाई दही है।
धर्म धुरं-धर बन्धू तज्यों पुर लोगानि की बिधि बोल कहीं है।
कीस, निसाचर की करनी न सुनी न विलोकति चित रही है।
राम सदा ससागत की अनखोही कनैसी सुभय सही है।

दया वीर का उदाहरण

गीधराज सुनि आरतवासी, रघुकुल तिलक नारि पहिचानी।
अधम निसाचर लीन्हें जाई, जिमि मलेच्छ बस कपिला गाई।
सीते! पुत्रि करसि जनि नासा, करिहौं जातुधान कर नासा।
धावा क्रोधवन्त खग कैसे, छूटे पवि पर्वत मंह जैसे।

निष्कर्ष

छात्रों मैं उम्मीद करता हूं कि आपको आज की यह पोस्ट वीर रस किसे कहते हैं (Veer Ras Kise Kehte Hain) आपको पसंद आई होगी मैं इस पोस्ट को वीर रस को कुछ उदाहरण (Veer Ras Ke Udaharan) के माध्यम से समझने की संपूर्ण कोशिश की है जिससे आपको वीर रस आसानी से समझ में आ जाए।

यदि आपको वीर रस या इस पोस्ट से किसी प्रकार का कोई शिकायत है या आपको वीर रस (Veer Ras) से संबंधित कोई सुझाव देना है तो आप हमें कमेंट सेक्शन या फिर ईमेल के माध्यम से सूचित कर सकते हैं मैं आपके इस सवाल का जवाब जल्द से जल्द देने का प्रयास करूंगा आपके बहुमूल्य विचारों का इंतजार रहेगा।

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