Vatsalya Ras : वात्सल्य रस की परिभाषा, उदाहरण व स्थाई भाव सहित | Vatsalya Ras Kise Kahate Hain

स्वागत है दोस्तों आज की नई पोस्ट वात्सल्य रस (Vatsalya Ras) में आज इस पोस्ट के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे की वात्सल्य रस किसे कहते हैं (Vatsalya Ras Kise Kahate Hain) तथा सा ही वात्सल्य रस के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण के माध्यम से इस पोस्ट को पढ़ेंगे। 

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रस किसे कहते हैं | Ras Kise Kahate Hain

काव्यकथानाटकउपन्यास आदि के पढ़ने, सुनने या उसका अभिनय देखने से जो आनंद की प्राप्त होती है उसे रस कहते हैं।

 

वात्सल्य रस की परिभाषा | Vatsalya Ras Ki Paribhasha

वात्सल्य रस का संबंध छोटे बाल-बालिकाओं के प्रति माता-पिता एवं सगे, संबंधियों का प्रेम एवं ममता के भाव से है।

  • जब काव्य में अपने से छोटे के प्रति स्नेह या ममत्व भाव जागृत होता है, तो वहां पर वात्सल्य रस होता है।

• हिंदी कवियों में सूरदास ने वात्सल्य रस को पूर्ण प्रतिष्ठा दी है तुलसीदास की विभिन्न कृतियों के बालकांड में वात्सल्य रस की सुंदर व्यंजना दृष्टव्य है। वात्सल्य रस का स्थाई भाववात्सलता या स्नेह” है।

वात्सल्य रस के भेद | Vatsalya Ras Ke Bhed

वात्सल्य रस के नियम में लिखित दो भेद होते हैं।

  1. संयोग वात्सल्य रस
  2. वियोग वात्सल्य रस

संयोग वात्सल्य रस

जब बालक, बालिकाओं की ऐसी बातों का वर्णन होता है, जो उनके माता-पिता आदि के पास उपस्थित रहने के काल से संबंध रखती हैं तब संयोग वात्सल्य रस होता है।

संयोग वात्सल्य रस के उदाहरण

वरदन्त की पंगति कुन्दकली अधराधर पल्लव रगेलन की।

चपला चमके घन बीच जगै छवि मोतिन माला अमोलन की।

धुंधरारि लर्टें लटकैं मुख ऊपर कुण्डल लोल कपालन की।

निवछावर प्राण करें तुलसी बलि जाऊं लला इन बोलन की।

वियोग वात्सल्य रस

जब बालकों के माता-पिता आदि से अलग हो जाने पर उनको या उनके कारण मां-बाप की दशा का वर्णन होता है तब वियोग वात्सल्य रस होता है।

वियोग वात्सल्य रस के उदाहरण

संदेश देवकी सो कहिए।

हौं तो धाय तिहारे सुत की कृपा भरत ही रहियों।।

तुक तौ टेव जानितिहि है हो तऊ मोहि कहि आवैं।

प्रात उठत मेरे लाल लडैतहि माखन रोटी भावै।।

वात्सल्य रस के उदाहरण | Vatsalya Ras Ke Udaharan

जसोदा हरि पालनै झुलावै।
हलरावे दुलराई मल्हावै, जोइ,सोइ कुछ गावै।
बाल दशा सुख निरखि जसोदा पुनि-पुनि नंद बुलावति।
अंचरा तर लै ढांकि,सूर के प्रभू को दूध पियावति।।
“मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो”।
मैया मोरी दाऊ ने बहुत खिजायो।
मोसों कहत मोल की लीन्हो तू जसुमति कब जायो।
स्याम गौर सुंदर दोउ भाई।
सबरी परी चरण लपटाई।।
मां खादी की चादर दे दे
मैं गांधी बन जाऊंगा,
सब मित्रों के साथ बैठकर रघुपति राघव गाऊंगा।
आशीषों का आंचल भरकर, प्यारे बच्चों लाई हूं।
युग जननी मैं भारत माता, द्वार तुम्हारे आई हूं।।
आंगन में लिए चांद के टुकड़े को खड़ी,
हाथों में झुलाती है उसे गोद भरी।
रह-रह कर हवा में जो लोका देती है, 
गूंज उठती है खिलखिलाते बच्चे की हंसी।
वरदंत की पंगति कुंद कली, अधराधर पल्लव खोलनि की।
चपला चमकैं धन बीच जगै छवि मोतिन माला अमोलन की।
घुंघरारि लटैं लटकैं मुख ऊपर कुंडल लोल कपोलन की।
नेवछावारि प्रान करै तुलसी बलि जाऊं लला इन बोलन की।
ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियां किलकि किलकि
उष्ट धारा गिरत भूमि लटपटाय धारा मात गोद लेत दशरथ की रानियां।
मैया मैं तो चंद-खिलौना लैहों।
जैहों लोटि धरनि पर अबहीं, तेरी गोद न ऐहौं।।
किलकत कान्ह घुटुरुवनि आवत।
मनिमय कनक नंद कै आंगन, बिम्ब पकरिबै धावत।।

वात्सल्य रस का स्थाई भाव क्या होता है?

वात्सल्य रस का स्थाई भाव स्नेह / वत्सल्य होता है।

वात्सल्य रस का सम्राट किसे कहा जाता है?

वात्सल्य रस का सम्राट सूरदास को कहा जाता है।

 

निष्कर्ष

छात्रों मैं उम्मीद करता हूं कि आपको आज की यह पोस्ट वात्सल्य रस किसे कहते हैं (Vatsalya Ras Kise Kehte Hain) आपको पसंद आई होगी मैं इस पोस्ट को श्रृंगार रस को कुछ उदाहरण (Vatsalya Ras Ke Udaharan) के माध्यम से समझने की संपूर्ण कोशिश की है जिससे आपको वात्सल्य रस आसानी से समझ में आ जाए।

यदि आपको वात्सल्य रस या इस पोस्ट से किसी प्रकार का कोई शिकायत है या आपको वात्सल्य रस (Vatsalya Ras) से संबंधित कोई सुझाव देना है तो आप हमें कमेंट सेक्शन या फिर ईमेल के माध्यम से सूचित कर सकते हैं मैं आपके इस सवाल का जवाब जल्द से जल्द देने का प्रयास करूंगा आपके बहुमूल्य विचारों का इंतजार रहेगा।

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