संसार का पर्यायवाची शब्द | Sansar Ka Paryayvachi Shabd Kya Hota Hai

संसार का पर्यायवाची शब्द | Sansar Ka Paryayvachi Shabd : दुनिया, विश्व, जगत, इहलोक, जग, जगती, लोक, अंड, भुवन, भाव आदि, आज की नई पोस्ट संसार का पर्यायवाची शब्द हिंदी में आज इस पोस्ट के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे की संसार का पर्यायवाची शब्द तथा साथ ही स से पर्यायवाची शब्द हिंदी में | ( Sansar Ka Paryayvachi Shabd in Hindi) के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण के माध्यम से इस पोस्ट को पढ़ेंगे।

sansar ka paryayvachi Shabd kya hota hai
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पर्यायवाची शब्द किसे कहते हैं?

पर्यायवाची शब्द की परिभाषा : वह शब्द जो एक समान अर्थ (एक दूसरे की तरह अर्थ) रखते हैं। वो शब्द पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं।

चुंकि इनके अर्थ में समानता अवश्य रहती है लेकिन इनका प्रयोग विभिन्न प्रकार से होता है पर्यायवाची शब्दों को उसके गुण व भाव के अनुसार प्रयोग किया जाता है क्योंकि एक ही शब्द या नाम हर स्थान पर उपयुक्त नहीं हो सकता है ‘इच्छा’ शब्द के स्थान पर ‘कामना’ शब्द प्रयोग करना कितना शर्मनाक होगा आपको ऐसे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए जो छोटे व प्रचलित हो।

संसार का पर्यायवाची शब्द क्या होता है?

संसार का पर्यायवाची शब्दSansar Ka Paryayvachi Shabd
दुनिया, विश्व, जगत, इहलोक, जग, जगती, लोक, अंड, भुवन, भावDuniya, Vishv, Jagat, Eahlok, Jag, Jagati, Lok, Bhuvan, Bhav

स से शुरू होने वाले पर्यायवाची शब्द

  • स्वतन्त्र – आजाद, रिहा, मुक्त, स्वायत्त, स्वाधीन 
  • स्वभाव – मिजाज, आदत, प्रकृति, प्रवृत्ति, 
  • स्वागत – अगवानी, शुभागमन, आवभगत 
  • स्वादिष्ट – मजेदार, जायकेदार, रसदार, रुचिकर, 
  • स्वीकार – मंजूरी, कुबूल, स्वीकृति, अंगीकार
  • सम्पूर्ण – समस्त, पूर्ण, समग्र, समूचा, सर्व, सकल, अखिल
  • सुबोध – सरल, आसान, सुगम, सुस्पष्ट, बोधगम्य
  • सुविधा – आसानी, सुगमता, पहूलियत, सुभीता, 
  • सुस्ताना – दम लेना, विश्राम, रुकना, ठहरना, आराम
  • सौम्य – शिष्ट, नम्र, मिलनसार, विनीत, शांत, 
  • स्तन – छाती, उरस, कुच, उरोज
  • सिंहासन- राजासन, राजगद्दी, तख्त, 
  • सिफारिश – अनुशंसा, अभिस्ताव, सस्तुति
  • सीता – जानकी, रामप्रिया, जनकसुता, जनककिशोरी, जनकतनया, भूमिजा, वैदेही, जगजननि
  • सीमित – मर्यादित, निर्धारित, निश्चित, परिसीमित, परिमित
  • सुन्दर – खूबसूरत, मोहक, मनोहर, मनोरम, कलित, मन्जुल, रम्य, मनोज, रुचिर, रमणीक, मनभावन,  रमणीय, चारु, ललित, ललाम, कमनीय
  • सम्राट – महाराजा, शाहंशाह, राजाधिराज, नृपति, अधिपति, अधीश्वर, भूपति 
  • सरल – आसान, सहज, सुगम, सुबोध, बोधात्मक, बोधगम्य, 
  • सरस्वती – भारती, शारदा, हंसवाहिनी, वीणावादिनी, वागेश्वरी, वागीश, वीणापति, वीणा, महाश्वेता, भाषा, गिरा, इला, ब्राह्मी, निचात्री, वागिवघात्री, कर्णिका
  • समकालीन – समकालिक, समसामयिक, समवयस्क 
  • समता – बराबरी, समानता, साम्य, तुल्यता, समत्व, सादृश्य
  • समन्वय – मेल, मध्य-मार्ग, संसर्ग, सामंजस्य, 
  • समस्त – सारा, पूरा, कुल, समूचा, समर्ग
  • समर्थन – अनुमोदन, मंडन, पक्षपोषण, पिष्टपोषण, 
  • समान – बराबर, सम, तुल्य, अनुरूप, तत्सम, तद्रूप, सदृश, 
  • समाप्ति – अन्त, समापन, खात्मा, इतिश्री, इति
  • संध्या – सायंकाल, साँझ, दिनान्त, निशारम्भ, गोधूलि, दिनावसान, प्रदोषकाल, 
  • संन्यासी – त्यागी, बैरागी, विरत, दण्डी, परिबाजक
  • संलग्न – संयुक्त, नत्थी, अनुबद्ध, सम्बद्ध 
  • संवाद – बातचीत, वार्तालाप, सम्भाषण
  • संस्थापक – प्रवर्तक, संचालक, मूलकर्ता 
  • संहार – नाश, बरबादी, विध्वंस, अन्त, समाप्ति, ध्वस
  • समुद्र – सागर, नदीश, जलधाम, सिन्धु, जलधि, रत्नाकर, उदधि, नीरधि, पारावार, पयोनिधि, पयोधि, अर्णव, नीरनिधि, अब्धि, वारिधि, तोयनिधि, वारीश
  • सर्प – साप, नाग, सरीसृप, मणिधर, विषधर, फणी, अहि, भुजंग, फणिधर, व्याल, उरग, पन्नग, द्विजि
  • सुअर – सूकर, वराह, वाराह, शूकर 
  • सोना – स्वर्ण, कनक, सुवर्ण, कञ्चन, जातक, हेम, हाटक, हिरण्य, जातरूप, चामीकर, पुष्कल, रुक्म, तामरस 
  • सूर्य – रवि, भानु, आदित्य, पतंग, भास्कर, दिनकर, प्रभाकर, दिवाकर, सविता, अक्र, कमलबन्धु, दिनमणि, मारीचिमाली, चण्डाशु, हंस, तेजोराशि
  • स्थल – ठौर, जगह, स्थान, टॉव, भूमि, 
  • स्थायी – पक्का, मजबूत, दृढ, टिकाऊ, स्थिर, 
  • स्थावर – अटल, स्थिर, निश्चल, अचल, अचर 
  • स्थिर – अडिग, स्थायी, दृढ, निश्चल, स्थावर 
  • स्पष्ट – साफ, प्रकट, प्रत्यक्ष, व्यक्त, जाहिर 
  • स्वर्ग – देवलोक, परलोक, बैकुण्ठ, इन्द्रपुरी, सुरपुर, चौ, सुरलोक, दिव, नाक, परमधाम

गणेश से जुडे कुछ रोचक तथ्य

संसार – संसार का अर्थ दुनिया होता है जिस दुनिया में हम लोग रहते हैं।

हमारे चारों ओर इस संसार मैं लोग झूठ का सहारा लेते हैं। भ्रष्टाचार को तेजी से बढ़ावा देते हैं। जिसकी वजह से मनुष्य कई तरह की परेशानियों का सामना कर रहा है।

आजकल लोग गरीबों को भी लूटने में पीछे नहीं हटते है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं जैसे उन्होंने कोई अच्छा काम किया हो।

हमें संसार को आगे बढ़ाने के बारे में सोचना चाहिए और एक नए संसार बनाना चाहिए जिसमें हर वक्त ईमानदार हो अगर ऐसा देश बन जाए तो हर एक व्यक्ति अपने जीवन में खुशी रहेगा।

हमारे देश में व्यक्तियों को एकता बनाकर रहना चाहिए ना की लड़ाई झगड़ा करना चाहिए यदि ऐसा कुछ हो जाए तो हम सब को एक संसार देखने को मिल जाएगा।

हर व्यक्ति को मिलकर रहना चाहिए और एक दूसरे की सहायता के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।

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