समुद्र का पर्यायवाची शब्द | Samudra Ka Paryayvachi Shabd Kya Hota Hai

समुद्र का पर्यायवाची शब्द | Samudra Ka Paryayvachi Shabd : सागर, अब्धि, वारीस, अर्णव, सिंधु, रत्नाकर, नदीश, जलधि, पारावार, पयोधि, उदधि, पयोनिधि, नीरनिधि, वारिधि, तोयनिधि, नीरधि, जलधाम, अकूपाद आदि, आज की नई पोस्ट समुद्र का पर्यायवाची शब्द हिंदी में आज इस पोस्ट के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे की समुद्र का पर्यायवाची शब्द तथा साथ ही स से पर्यायवाची शब्द हिंदी में | (Samudra Ka Paryayvachi Shabd in Hindi) के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण के माध्यम से इस पोस्ट को पढ़ेंगे।

samudra ka paryayvachi Shabd kya hota hai.png
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पर्यायवाची शब्द किसे कहते हैं?

पर्यायवाची शब्द की परिभाषा : वह शब्द जो एक समान अर्थ (एक दूसरे की तरह अर्थ) रखते हैं। वो शब्द पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं।

चुंकि इनके अर्थ में समानता अवश्य रहती है लेकिन इनका प्रयोग विभिन्न प्रकार से होता है पर्यायवाची शब्दों को उसके गुण व भाव के अनुसार प्रयोग किया जाता है क्योंकि एक ही शब्द या नाम हर स्थान पर उपयुक्त नहीं हो सकता है ‘इच्छा’ शब्द के स्थान पर ‘कामना’ शब्द प्रयोग करना कितना शर्मनाक होगा आपको ऐसे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए जो छोटे व प्रचलित हो।

समुद्र का पर्यायवाची शब्द क्या होता है?

समुद्र का पर्यायवाची शब्दSamudra Ka Paryayvachi Shabd
सागर, अब्धि, वारीस, अर्णव, सिंधु, रत्नाकर, नदीश, जलधि, पारावार, पयोधि, उदधि, पयोनिधि, नीरनिधि, वारिधि, तोयनिधि, नीरधि, जलधाम, अकूपादSagar, Abdhi Varish, Arnav, Sindhu, Ratnakar, Nadeesh, Jaladhi, Parawar, Payuddhi, Udadhi, Prayonidhi, Neernidhi, Varidhi, Toynidhi, Niradhi, Jaldham, Akoopad

से शुरू होने वाले पर्यायवाची शब्द

  • संकेत – इशारा, इंगित, सैन
  • संक्रामक – छुतहा, संस्पर्शज, सांसर्गिक 
  • संगम – साथ, मेल, मिलन, मिलाप, संग, संयोग, समागम, सम्मिलित
  • संग्रह – एकत्र, जमाव, इकट्ठा, संचय, संकलन, 
  • संतप्त – दुःखी, पीड़ित, क्लेशित, व्यथित, वेदनाग्रस्त 
  • संतोष – संतुष्टि, सब्र, इत्मीनान, तृप्ति, तुष्टि, तोष, 
  • संदिग्ध – शंका, संदेहजनक, शंकास्पद, सशयान्वित
  • संतान – बाल-बच्चे, औलाद, संतति
  • संसार – दुनिया, जगत्, विश्व, इहलोक, जग, जगती
  • सच्चा – सत्यवादी, सत्यवान, सत्यभाषी, सत्यधर्मी, सत्यनिष्ठ, सत्यव्रत
  • सजग – चौकन्ना, सचेत, सतर्क, चौकस, सावधान, होशियार
  • सदा – सदैव, हरदम, हमेशा, निरंतर, नित्य, चिरन्तर 
  • सफल – कामयाब, कृतार्थ, फलवान, कृतकृत्य, फलीभूत 
  • सभ्यता – शिष्टाचार, भद्रता, सुशीलता, शिष्टता, शीलवत्ता 
  • समकालीन – समकालिक, समसामयिक, समवयस्क 
  • समता – बराबरी, समानता, साम्य, तुल्यता, समत्व, सादृश्य
  • समन्वय – मेल, मध्य-मार्ग, संसर्ग, सामंजस्य, 
  • समस्त – सारा, पूरा, कुल, समूचा, समर्ग
  • समर्थन – अनुमोदन, मंडन, पक्षपोषण, पिष्टपोषण, 
  • समान – बराबर, सम, तुल्य, अनुरूप, तत्सम, तद्रूप, सदृश, 
  • समाप्ति – अन्त, समापन, खात्मा, इतिश्री, इति
  • साफ – स्वच्छ, निर्मल, पवित्र, श्वेत, उजला, उज्ज्वल, शुक्ल, शुभ, शुचि, धवल, सिति, गौर
  • सही – सच, शुद्ध, ठीक, उचित, उपयुक्त, संगत, यथार्थ, सच, वास्तविक
  • सांत्वना – आश्वासन, दिलासा, ढाढ़स 
  • सांसारिक – सांसारी, दुनियाबी, लौकिक, लोकपरक, ऐहिक, 
  • सारांश – सार, निचोड़, संक्षेप
  • सिंहासन- राजासन, राजगद्दी, तख्त, 
  • सिफारिश – अनुशंसा, अभिस्ताव, सस्तुति
  • सीता – जानकी, रामप्रिया, जनकसुता, जनककिशोरी, जनकतनया, भूमिजा, वैदेही, जगजननि
  • सीमित – मर्यादित, निर्धारित, निश्चित, परिसीमित, परिमित
  • सुन्दर – खूबसूरत, मोहक, मनोहर, मनोरम, कलित, मन्जुल, रम्य, मनोज, रुचिर, रमणीक, मनभावन,  रमणीय, चारु, ललित, ललाम, कमनीय
  • स्थल – ठौर, जगह, स्थान, टॉव, भूमि, 
  • स्थायी – पक्का, मजबूत, दृढ, टिकाऊ, स्थिर, 
  • स्थावर – अटल, स्थिर, निश्चल, अचल, अचर 
  • स्थिर – अडिग, स्थायी, दृढ, निश्चल, स्थावर 
  • स्पष्ट – साफ, प्रकट, प्रत्यक्ष, व्यक्त, जाहिर 
  • स्वर्ग – देवलोक, परलोक, बैकुण्ठ, इन्द्रपुरी, सुरपुर, चौ, सुरलोक, दिव, नाक, परमधाम 
  • स्वतन्त्र – आजाद, रिहा, मुक्त, स्वायत्त, स्वाधीन 
  • स्वभाव – मिजाज, आदत, प्रकृति, प्रवृत्ति, 
  • स्वागत – अगवानी, शुभागमन, आवभगत 
  • स्वादिष्ट – मजेदार, जायकेदार, रसदार, रुचिकर, 
  • स्वीकार – मंजूरी, कुबूल, स्वीकृति, अंगीकार
  • सम्पूर्ण – समस्त, पूर्ण, समग्र, समूचा, सर्व, सकल, अखिल
  • सुन्दरी – हसीना, रूपसी, सुदर्शना, सुभगा, रूपराशि, छबीली 
  • सुख – मजा, आनन्द, चैन, परितोष 
  • सुगन्धि – खुशबू, महक, परिमल, सुवास, सुरभि, 
  • सुबोध – सरल, आसान, सुगम, सुस्पष्ट, बोधगम्य
  • सुविधा – आसानी, सुगमता, पहूलियत, सुभीता, 
  • सुस्ताना – दम लेना, विश्राम, रुकना, ठहरना, आराम
  • सौम्य – शिष्ट, नम्र, मिलनसार, विनीत, शांत, 
  • स्तन – छाती, उरस, कुच, उरोज
  • समिति – संघ, सभा, संस्था, गोष्ठी, संघटन, मण्डली, संस्थान 
  • समीक्षा – आलोचना, विवेचना, निरूपण, समालोचना, मीमांसा 
  • समीचीन – ठीक, उचित, उपयुक्त, मुनासिब, वाजिब, 
  • समूह – संघ, निकाय, संगठन, दल, समुदाय, टोली, समुच्चय, झुण्ड, मण्डली, गण, निकर, वृन्द, पुन्ज, कलाप, जत्था, राशि
  • सम्राट – महाराजा, शाहंशाह, राजाधिराज, नृपति, अधिपति, अधीश्वर, भूपति 
  • सरल – आसान, सहज, सुगम, सुबोध, बोधात्मक, बोधगम्य, 
  • सरस्वती – भारती, शारदा, हंसवाहिनी, वीणावादिनी, वागेश्वरी, वागीश, वीणापति, वीणा, महाश्वेता, भाषा, गिरा, इला, ब्राह्मी, निचात्री, वागिवघात्री, कर्णिका,
  • समुद्र – सागर, नदीश, जलधाम, सिन्धु, जलधि, रत्नाकर, उदधि, नीरधि, पारावार, पयोनिधि, पयोधि, अर्णव, नीरनिधि, अब्धि, वारिधि, तोयनिधि, वारीश
  • सर्प – साप, नाग, सरीसृप, मणिधर, विषधर, फणी, अहि, भुजंग, फणिधर, व्याल, उरग, पन्नग, द्विजि
  • सुअर – सूकर, वराह, वाराह, शूकर 
  • सोना – स्वर्ण, कनक, सुवर्ण, कञ्चन, जातक, हेम, हाटक, हिरण्य, जातरूप, चामीकर, पुष्कल, रुक्म, तामरस 
  • सूर्य – रवि, भानु, आदित्य, पतंग, भास्कर, दिनकर, प्रभाकर, दिवाकर, सविता, अक्र, कमलबन्धु, दिनमणि, मारीचिमाली, चण्डाशु, हंस, तेजोराशि 
  • सार- निचोड, रस, सत्त, सत्त्व 
  • सारंग – सिंह, मृगा, कामदेव, हाथी, कोयल, 
  • सिंह – शेर, वनराज, शार्दूल, केशरी, बाहुबल, नाहर, मृगराज, वनहरि, हरि, केहरि, मृगेन्द्र, व्याघ्र, केशी, पुण्डरीक, नखायुध, मृगारि, चित्रक 
  • स्त्री – महिला, नारी, सुन्दरी, प्रिया, आर्या, अबला, वनिता, अगना, भार्या, रमणी, कामिनी, भामिनी, ललना, वामा, • • कान्ता, कलत्र, प्रमदा
  • स्तुति – पूजा, अर्चना, प्रार्थना, आराधना, प्रशंसा

पर्वत से जुडे कुछ रोचक तथ्य

Samudra ka paryayvachi Shabd kya hai

समुंद्र– समुद्र के जल का ph मान 8 होता है। जिसकी वजह से समुद्र का जल खारा होता है। 

सागर– विश्व में कुल सात महासागर हैं जिनका नाम कुछ इस प्रकार से है- प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, अटलांटिका महासागर, भूमध्य सागर, आर्कटिक सागर, वेरिविपन सागर और मेक्सिको की खाड़ी।

रत्नाकर– समुद्र में विभिन्न प्रकार के रत्न पाए जाते हैं। जलधाम- समुद्र में इतना पानी है। कि इसे जलधाम कहो या फिर चाहे जो कहो।

वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्र की उत्पत्ति लगभग 50 से 100 करोड़ वर्ष पहले हुई थी।

यदि समुद्रों का सारा पानी सूख जाए तो इतना नमक निकले की पृथ्वी पर 500 फीट नमक की मोटी परत बनाई जा सकती है।

हिंद महासागर का तापमान कई बार 36.6°C तक पहुंच गया है इसी कारण से हिन्द महासागर को सबसे गर्म समुद्र कहा जाता है।

जब व्यक्तियों ने प्रशांत महासागर देखा तो इतना शांत देखकर उसका नाम प्रशांत महासागर पड़ा समुद्र में कुछ ऐसी जगह है जहां पर उनका गुरुत्वाकर्षण इतना अधिक है। जिसकी वजह से वहां से जलाथान को जाने से रोक लगी है। 

जीवन की उत्पत्ति महासागर में हुई थी।

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