Raudra Ras : रौद्र रस की परिभाषा, उदाहरण व स्थाई भाव सहित | Raudra Ras Kise Kahate Hain

स्वागत है दोस्तों आज की नई पोस्ट रौद्र रस (Raudra Ras) में आज इस पोस्ट के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे की रौद्र रस किसे कहते हैं (Raudra Ras Kise Kahate Hain) तथा सा ही रौद्र रस के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण के माध्यम से इस पोस्ट को पढ़ेंगे। 

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Raudra Ras Paribhasha Udaharan Sthayi Bhav

रस किसे कहते हैं | Ras Kise Kahate Hain

काव्यकथानाटकउपन्यास आदि के पढ़ने, सुनने या उसका अभिनय देखने से जो आनंद की प्राप्त होती है उसे रस कहते हैं।

रौद्र रस की परिभाषा | Raudra Ras Ki Paribhasha

रौद्र रस का स्थायी भावक्रोध” होता है। किसी व्यक्ति के द्वारा क्रोध में किए अपमान आदि के कारण उत्पन्न भाव की परिपक्वावस्था को रौद्र रस कहते हैं।

अन्य शब्दों में : जब किसी अपने प्रिय व्यक्ति माता-पिता गुरुजन या स्वयं के अपमान से किसी अप्रिय वचन या वाणी के कारण हृदय में क्रोध का भाव उत्पन्न हो जाए तो वहां रौद्र रस होता है।

रौद्र रस के भाव स्पष्टीकरण | Raudra Ras Ke Bhav

रसरौद्र रस
स्थायीभावक्रोध
आलंबनविपक्षी, अशुद्ध वाणी
उद्दीपनविपक्षियों का कार्य एवं कथन
अनुभाव मुंह लाल होना, गर्जन, दांत पीसना, आत्म प्रशंसा
संचारी भावउग्रता, आवेग, स्मृति, मद, मोह, घमंड, अहंकार

रौद्र रस के उदाहरण | Raudra Ras Ke Udaharan

खून उसका उबल रहा था। 
मनुष्य से दैत्य में बदल रहा था।।
श्री कृष्ण के वचन सुन अर्जुन क्रोध से जलने लगे।
सब शोक अपना भूलकर करतल युगल मरने लगे।।
कहा कैकई ने सक्रोध
दूर हट! दूर हट! निर्बोध।
द्विजिंव्हे रस में विष मत घोल।
उस काल मारे क्रोध के, तन कांपने उसका लगा।
मानो हवा के जोर से, सोता हुआ सागर जगा‌।।
अति रिसि बोले वचन कठोरा।
कहु जड़ जनक धनुष के तोरा।।
बेगि दिखाउ मूढ नत आजू।
उलटउं महि जहं लगि तव राजू।।
वे सुनहू राम जेहि शिव धनु तोरा,
सहस बाहु सम सो रिपु मोरा।
सो बिलगाउ बिहाइ समाजा।
न त मारे जैहहिं सब राजा।।
दुर्योधन! रण ऐसा होगा। फिर कभी नहीं जैसा होगा।
भाई पर भाई टूटेंगे, विष बाण बूंद से छूटेंगे,
आखिर तू भूशायी होगा, हिंसा का पर, दायी होगा।
सुनत लखन के वचन कठोरा।
परसु सुधरी धरेउ कर घोरा।।
अब जनि देउ दोष मोहि लोगू।
कटुवादी बालक वध जोगू।।
रे नृप बालक काल बस, बोलत तोहिं न संभार।
धनुहीं सम त्रिपुरारिधनु विदित सकल संसार।।
भाखे लखनु कुटिल भई भौंहें।
रदपट फरकट नयन रिसौंहे।।
संसार देख अब हमारे शत्रु रण में मृत पड़े।
करते हुए यह घोषणा वे हो गए उठकर खड़े।।
विनय न मानत जलधि जड़ गए तीन दिन बीत
बोले राम सकोप तब, भय बिनु होय न प्रीत।

 

निष्कर्ष

छात्रों मैं उम्मीद करता हूं कि आपको आज की यह पोस्ट रौद्र रस किसे कहते हैं (Raudra Ras Kise Kehte Hain) आपको पसंद आई होगी मैं इस पोस्ट को रौद्र रस को कुछ उदाहरण (Raudra Ras Ke Udaharan) के माध्यम से समझने की संपूर्ण कोशिश की है जिससे आपको रौद्र रस आसानी से समझ में आ जाए।

यदि आपको रौद्र रस या इस पोस्ट से किसी प्रकार का कोई शिकायत है या आपको रौद्र रस (Raudra Ras) से संबंधित कोई सुझाव देना है तो आप हमें कमेंट सेक्शन या फिर ईमेल के माध्यम से सूचित कर सकते हैं मैं आपके इस सवाल का जवाब जल्द से जल्द देने का प्रयास करूंगा आपके बहुमूल्य विचारों का इंतजार रहेगा।

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