रात का पर्यायवाची शब्द | Raat Ka Paryayvachi Shabd Kya Hai

रात का पर्यायवाची शब्द | Raat Ka Paryayvachi Shabd : रैन, रात्रि, विभा, शर्वरी, रजनी, तमी, छपा, यामिनी, विभावरी, निशा, तमस्विनी,  दोषा, निशीथ, त्रियामा, तमिश्रा, क्षणदा आदि, आज की नई पोस्ट रात का पर्यायवाची शब्द हिंदी में आज इस पोस्ट के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे की रात का पर्यायवाची शब्द तथा साथ ही र से पर्यायवाची शब्द हिंदी में | (Raat Ka Paryayvachi Shabd in Hindi) के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण के माध्यम से इस पोस्ट को पढ़ेंगे।

Raat ka paryayvachi Shabd kya hota hai.png
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पर्यायवाची शब्द किसे कहते हैं?

पर्यायवाची शब्द की परिभाषा : वह शब्द जो एक समान अर्थ (एक दूसरे की तरह अर्थ) रखते हैं। वो शब्द पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं।

चुंकि इनके अर्थ में समानता अवश्य रहती है लेकिन इनका प्रयोग विभिन्न प्रकार से होता है पर्यायवाची शब्दों को उसके गुण व भाव के अनुसार प्रयोग किया जाता है क्योंकि एक ही शब्द या नाम हर स्थान पर उपयुक्त नहीं हो सकता है ‘इच्छा’ शब्द के स्थान पर ‘कामना’ शब्द प्रयोग करना कितना शर्मनाक होगा आपको ऐसे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए जो छोटे व प्रचलित हो।

रात का पर्यायवाची शब्द क्या होता है?

रात का पर्यायवाची शब्दRaat Ka Paryayvachi Shabd
रैन, रात्रि, विभा, शर्वरी, रजनी, तमी, छपा, यामिनी, विभावरी, निशा, तमस्विनी,  दोषा, निशीथ, त्रियामा, तमिश्रा, क्षणदाRenu, Ratri, Vivah, Sharvari, Rajini, Tami, Chhapa, Yamini, Vibhavari, Nisha, Tamashwini, Dosa, Nishith, Triyama, Tamishra, Chadda

से शुरू होने वाले पर्यायवाची शब्द

  • रश्मि – मयूख, किरण, कर, अंशु, मरीच
  • राजा – सम्राट, नरेश, नृपति, नरपति, भूपति, भूस्वामी, महिपति, पृथ्वीपाल, पृथ्वीपति, नृप, भूप, महीप, राव, नरेन्द्र, पृथ्वीनाथ, भूपाल
  • रात – रैन, रात्रि, निशा, रजनी, त्रियामा, विमा, यामिनी, विभावरी, निशीथ, क्षपा, शर्वरी, तमी, तमिस्रा, क्षगदा, दोषा 
  • रस – सार, सत्त, तत्त्व
  • रसना – जबान, जीभ, रसीका, रसेन्द्रिय, जिह्वा
  • रमा – लक्ष्मी, विष्णुप्रिया, कमलासना, श्री, कमला, इन्दिरा, पद्मा, 
  • रावण – दशानन, लंकाधिपति, दशशीश, दशवदन, दशकन्धर, दशकण्ठ, लकेश, दैत्येन्द्र, राक्षसराज
  • राज्यपाल – प्रान्तपति, गवर्नर, सूबेदार, राज्यपति
  • राधा – राधिका, हरिप्रिया, ब्रजरानी, वृषभानुजा, वृषभानदुलारी, सर्वेश्वरी
  • रामचन्द्र – सीतापति, पुरुषोत्तम, रघुनन्दन, रघुवीर, रघुपति, राघव, अवधेश, अवधनरेश, कमलनयन
  • राय – सलाह, परामर्श, सम्मति, समूह, मन्त्रणा, मल राशि- पुज, देर
  • राहगीर – राही, मुसाफिर, पथिक, बटोही, यात्री
  • रिक्त – खाली, खोखला, छूछा, शून्य, रीता
  • रुग्ण – रोगी, रोगग्रस्त, बीमार, व्याधिग्रस्त, अस्वस्थ
  • रिहाई – छुटकारा, छुट्टी, मोक्ष, मुक्ति, उन्मोचन
  • रीति – नियम, कानून, विधि, कायदा, तरीका, विधान
  • रुची – पसन्द, दिलचस्पी, चाह, अभिरुचि 
  • रूप – सूरत, बनावट, आकार, शक्ल, आकृति 
  • रोजगार – कारोबार, धंधा, व्यवसाय, 
  • रोष- गुस्सा, क्रोध, अमर्ष, कोप, रिष
  • रंक – कंगाल, धनहीन, निर्धन, दरिद्र, अकिचन
  • रक्त – खून, लहू, रुधिर, लौहित, लोहू, शोणित
  • रक्तपात – खून-खराबा, मार-काट, लडाई-झगड़ा 
  • रक्षा – रखवाली, हिफाजत, बचाव, सुरक्षा, त्राण 
  • रत – मग्न, अनुरक्त, लिप्त, तल्लीन, लीन 
  • रविवार – इतवार, सूर्यवार, रविवासर, आदित्यवार
  • रमणी – औरत, स्त्री, नारी, वनिता, भामा, वामा

आग से जुडे कुछ रोचक तथ्य

रात्रि – आंख का संस्कृत पर्यायवाची शब्द रात्रि है।

निशा – किसी महिला (लड़की) का नाम हो सकता है। परंतु इस स्थान पर इस को रात्रि के पर्यायवाची शब्द के रूप में माना गया है।

रात को सोने से पहले हम कुछ Inspirational या motivanal चीजों को देखना चाहिए जिनकी वजह से हम लक्ष्य के लिए प्रेरित रहे।

रात को सोने से पहले मनुष्य क्या सोचता है वह उसके दुख या सुख का कारण होता है। मनुष्य लगभग एक तिहाई अपना जीवन सोने में गुजार देता है।

जो छात्र देर रात तक पढ़ते या अपना कार्य करते हैं वह हम लोगों से अधिक टैलेंटेड होते हैं।

रात में हमें इसलिए नहीं दिखाई देता है क्योंकि आंख का खुद का कोई प्रकाश नहीं होता है।

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