पिता का पर्यायवाची शब्द | Pita Ka Paryayvachi Shabd Kya Hota Hai

पिता का पर्यायवाची शब्द | Pita Ka Paryayvachi Shabd : पापा, बाप, तात, जनक, वालिद, गुरु, फादर, पिताजी, परमपिता, डैड, डैडी आदि, आज की नई पोस्ट पिता का पर्यायवाची शब्द हिंदी में आज इस पोस्ट के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे की पिता का पर्यायवाची शब्द तथा साथ ही प से पर्यायवाची शब्द हिंदी में | ( Pita Ka Paryayvachi Shabd in Hindi) के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण के माध्यम से इस पोस्ट को पढ़ेंगे।

pita ka paryayvachi Shabd kya hota hai
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पर्यायवाची शब्द किसे कहते हैं?

पर्यायवाची शब्द की परिभाषा : वह शब्द जो एक समान अर्थ (एक दूसरे की तरह अर्थ) रखते हैं। वो शब्द पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं।

चुंकि इनके अर्थ में समानता अवश्य रहती है लेकिन इनका प्रयोग विभिन्न प्रकार से होता है पर्यायवाची शब्दों को उसके गुण व भाव के अनुसार प्रयोग किया जाता है क्योंकि एक ही शब्द या नाम हर स्थान पर उपयुक्त नहीं हो सकता है ‘इच्छा’ शब्द के स्थान पर ‘कामना’ शब्द प्रयोग करना कितना शर्मनाक होगा आपको ऐसे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए जो छोटे व प्रचलित हो।

पिता का पर्यायवाची शब्द क्या होता है?

पिता का पर्यायवाची शब्दPita Ka Paryayvachi Shabd
पापा, बाप, तात, जनक, वालिद, गुरु, फादर, पिताजी, परमपिता, डैड, डैडीPapa, Baap, Taat, Janak, Waleed, Guru, Father, Pitaji, Parampita, Dad, Daddy

प से शुरू होने वाले पर्यायवाची शब्द

  • पुश्कल – बहुत, अधिक, इफरात, ढेर-सा, प्रचुर, विपुल, अतिशय, अत्यन्त 
  • पुष्टि – समर्थन, हिमायत, अनुमोदन
  • पूजा – अर्चना, वन्दना, इबादत, आराधना, उपासना, पूज्य- पूजनीय, अर्चनीय, वंदनीय, आराध्य, उपास्य, वंद्य 
  • पूर्ण – पूरा, सारा, कुल, सम्पूर्ण, सकल, समूचा, समग्र
  • प्रख्यात – नामी, प्रसिद्ध, मशहूर, विख्यात, प्रतिष्ठित, यशस्वी, विश्रुत, नामवर, लब्ध-प्रतिष्ठ, 
  • प्रगति – तरक्की,उन्नति, विकास, बढ़ती, श्रीवृद्धि
  • प्रगल्भ – घमण्डी, अहंकारी, अभिमानी, गर्वीला, दभी 
  • प्रचण्ड – भयंकर, खौफनाक, भीषण, भयानक, उर्म
  • प्रचुरता – इफरात, बहुलता, आधिक्य, बहुतायत, प्रभूतता
  • प्रजा – जनता, जन, लोक, रैयत, रिआया, 
  • प्रजातन्त्र – लोकतन्त्र, जनगण, जनतन्त्र, 
  • प्रज्ञा- बुद्धि, समझ, ज्ञान, प्रतिभा, मेघा, 
  • प्राणी – जीव, जीवधारी, सजीव, प्राणधारी, जानदार, 
  • प्रपात – झरना, स्रोत, निर्झर, उत्स 
  • प्रभा – प्रकाश, चमक, दीप्ति, विभा, धुति, 
  • प्रार्थना – विनती, निवेदन, आराधना, याचना, विनय, अर्ज 
  • प्रिय – दुलारा, प्यारा, प्रियतम, वत्सल, वल्लम, 
  • प्रिया – प्यारी, प्रेमिका, प्रियतमा, दिलरुबा, सजनी, प्रिये, प्रेयसी, वल्लभा, 
  • प्रेम – प्यार मोहब्बत, दुलार, प्रणय, स्नेह, लाङ-प्यार, अनुराग, ममता, रति, प्रीति, 
  • प्रोत्साहन – हौसला, बढ़ावा, उत्साहवर्धन, 
  • प्रौढ – बुजुर्ग, पक्की उम्र का, प्रबुद्ध, अधेड
  • पोत – जलयान, जहाज
  • पंकिल – गन्दा, मैला, मलिन, गन्दला, मलीन
  • पंथ – रास्ता, मार्ग, राह, डगर, पथ, 
  • पंथ – सम्प्रदाय, धर्म, मत
  • पकड़ना – गिरफ्तार करना, कैद करना, बंदी बनाना
  • पछतावा – पश्चाताप, प्रायश्चित, अनुताप, ग्लानि, संताप 
  • पटरानी – महारानी, बडी रानी, प्रमुख रानी, राजमहिषी, 
  • पटु – होशियार, निपुण, कुशल, प्रवीण, पारंगत, निष्णात, दक्ष
  • पड़ोसी – हमसाया, प्रतिवेशी, प्रतिवासी
  • पढ़ाई – अध्ययन, पठन-पाठन, विद्याभ्यास
  • पताका – झण्डा, ध्वज, ध्वजा, निशान, फरहरा, केतु
  • पत्तन – शहर, नगर, नगरी, पुर, पुरी 
  • पत्ता – पत्र, पात, पर्ण,  दल, पल्लव, छदन
  • पत्थर – पाषाण, प्रस्तर, शिला, उत्पल, अश्म, संग, पाहन, उपल
  • पत्र – चिट्ठी, खत, पाती
  • पति – स्वामी, नाथ, प्राणप्रिय, बालम, भर्ता, वल्लभ, भतरि, आर्यपुत्र, ईश, जीवनधारा
  • पत्नी – औरत, घरवाली, बहू, जोरू, प्रिया, प्राणप्रिय, भार्या, दारा, सहगामिनी, गृहिणी, यधू, वल्लभा, वामा, घरनी, लिय, कान्ता, कलत्र, अर्द्धाङ्गिनी, बामाङ्गी
  • पर्वत – पहाड, मेरू, गिरि, अचल, भूधर, शैल, नग, भूमिधर, महीधर, तुग, घराघर
  • पवन – हवा, बयार, वायु, समीर, अनिल, वात, मारुत, प्रकम्पन, समीरण, प्रभजन, प्राण, पवमान नभप्राण, मृगवाहन 
  • पक्षी – चिडिया, परिन्दा, पछी, खग, द्विज, पखेरू, अंडज, विहग, विहंग, शकुन्त, शकुनि, पतग, 
  • पराग – पुष्पधूलि, रंज, पुष्परज, कुसुमरज
  • पुत्र – बेटा, लडका, पूत, सुत, तनया, आत्मज, औरस, 
  • परिर्वतन – बदलाव, हेर-फेर, अदल-बदल, फेर-बदल, तबदीली 
  • प्रणय – प्रेम, प्रीति, अनुराग, अनुरक्ति, स्नेह, 
  • प्रसन्नता – खुशी, आनन्द, प्रफुल्लता, हर्ष, आह्मद, 
  • प्रभात – सुबह, सवेरा, प्रातः, ऊषा, अरुणोदय
  • पृथ्वी – धरती, भू, भूमि, धरित्री, वसुन्धरा, अचला, जगती, धरा, धरणी, वसुधा, क्षिति, उर्वी, मेदिनी, मही, प्रहुभि, धाप्ती, क्षोणी, वसुमूति, बीजप्रसु, अवनि, ईला 
  • प्रकाश – रोशनी, उजाला, चमक, ज्योति, प्रभा, छवी, धुति, आलोक, दीप्ति, 
  • प्रेमी – आशिक, प्यारा, प्रियतम, स्नेही, अनुरागी,
  • परिक्रमा – परिभ्रमण, चक्कर, फेरा, प्रदक्षिणा, 
  • परिचय – पहचान, जानकारी, मुलाकात, अभिज्ञान, वाकफियत
  • परिचर्या – देख-भाल, चाकरी, सेवा, टहल, शुश्रूषा, खिदमत, 
  • परिणय – शादी, ब्याह, विवाह, पाणिग्रहण
  • परिणाम – अंजाम, नतीजा, फल, निष्कर्ष, निष्पतित 
  • परिताप – दर्द, दुःख, पीडा, क्लेश, व्यथा
  • परिपाटी – रीति, रिवाज, प्रथा, परम्परा, चलन, प्रचलन, दस्तूर, तरीका, ढंग, प्रणाली, पद्धति, रूढि

पिता से जुडे कुछ रोचक तथ्य

Pita Ka Paryayvachi Shabd

पिता- पिता का सबसे महत्वपूर्ण गुण है। कि वह हर समय धीरज से काम लेते हैं और कभी खुद पर से आपा नहीं खोते। पिता किसी भी परिस्थिति में हो पर शांति से सोच समझ कर आगे बढ़ते हैं और मुश्किल से मुश्किल मामलों में धैर्य रखते हैं।

पिता एक मात्र पिता ही नहीं होते बल्कि किसी की बेटे, पति, भाई भी होते हैं और उन पर हर किसी की जिम्मेदारी होती है। पूरे परिवार का ध्यान रखना होता है। और साथ ही हमें अच्छी और बुरी बातों का आभास कराते हैं। पिता हमें हार न मानने और आगे बढ़ने की सीख देते हैं और हमारा हौसला बढ़ाते हैं।

पिताजी मुझसे और परिवार के लोगों से बहुत प्रेम करते हैं। वह घर में किसी भी प्रकार की कमी नहीं होने देते हैं।

हम कोई भी गलती करें तो वह हमें डाटने के बजाय हमें प्यार से समझाते हैं और दोबारा गलती ना करने की सीख देते हैं।

पिता बच्चों के लिए धरती पर ईश्वर का रूप होता हैं। वो अपनी संतान को खुशी देने के लिए अपने सुखों का त्याग भी कर देते हैं।

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