पत्र का पर्यायवाची शब्द | Patra Ka Paryayvachi Shabd Kya Hota Hai

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Patra ka paryayvachi Shabd kya hota hai
Patra ka paryayvachi Shabd kya hota hai

पर्यायवाची शब्द किसे कहते हैं?

पर्यायवाची शब्द की परिभाषा : वह शब्द जो एक समान अर्थ (एक दूसरे की तरह अर्थ) रखते हैं। वो शब्द पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं।

चुंकि इनके अर्थ में समानता अवश्य रहती है लेकिन इनका प्रयोग विभिन्न प्रकार से होता है पर्यायवाची शब्दों को उसके गुण व भाव के अनुसार प्रयोग किया जाता है क्योंकि एक ही शब्द या नाम हर स्थान पर उपयुक्त नहीं हो सकता है ‘इच्छा’ शब्द के स्थान पर ‘कामना’ शब्द प्रयोग करना कितना शर्मनाक होगा आपको ऐसे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए जो छोटे व प्रचलित हो।

पत्र का पर्यायवाची शब्द क्या होता है?

पत्र का पर्यायवाची शब्दPatra Ka Paryayvachi Shabd
पाती, खत, चिट्ठी, समाचार पत्र, पल्लव, अखबार, किसलयParti, khat, Chitti, samachar patra, pallav, Akbar kislay

 से शुरू होने वाले पर्यायवाची शब्द

  • पत्र – चिट्ठी, खत, पाती
  • पति – स्वामी, नाथ, प्राणप्रिय, बालम, भर्ता, वल्लभ, भतरि, आर्यपुत्र, ईश, जीवनधारा
  • पत्नी – औरत, घरवाली, बहू, जोरू, प्रिया, प्राणप्रिय, भार्या, दारा, सहगामिनी, गृहिणी, यधू, वल्लभा, वामा, घरनी, लिय, कान्ता, कलत्र, अर्द्धाङ्गिनी, बामाङ्गी, 
  • पण्डित – विद्वान, कोविद, बुध, धीर, मनीषी, सुधी, प्राज्ञ, विलक्षण, विज्ञ, सुविज्ञ 
  • पथ्य – भोजन, आहार, भोज्य पदार्थ
  • पथिक – राही, यात्री, मुसाफिर, पथी, बटोही 
  • पद – पैर, पाँव, चरण, कदम, पाद, पग, पगु
  • परशुराम – परशुधर, भार्गव, भृगुसुत, जामदग्न्य, रेणुकातनय, भृगुनन्दन
  • परन्तु – किन्तु, लेकिन, पर, मगर
  • परख – पहचान, जाँच-पड़ताल, जाँच, छानबीन, परीक्षण
  • परतन्त्र – गुलाम, अधीन, पराधीन, परवश, पराश्रित, 
  • परछाई – साया, प्रतिबिम्ब, छाया, प्रतिच्छाया, झाई
  • पर्दा – छिपाव, आड, ओट, यावनिका, आवरण, नेपथ्य
  • परमार्थ – भलाई, परोपकार, उपकार
  • पराक्रम – ताकत, शक्ति, बल, पौरुष, पुरुषार्थ, 
  • पराजित – हारा हुआ, परास्त, विजित, पराभूत
  • पराया – गैर, बेगाना, दूसरा, और
  • परिक्रमा – परिभ्रमण, चक्कर, फेरा, प्रदक्षिणा, 
  • परिचय – पहचान, जानकारी, मुलाकात, अभिज्ञान, वाकफियत
  • परिचर्या – देख-भाल, चाकरी, सेवा, टहल, शुश्रूषा, खिदमत, 
  • परिणय – शादी, ब्याह, विवाह, पाणिग्रहण
  • परिणाम – अंजाम, नतीजा, फल, निष्कर्ष, निष्पतित 
  • परिताप – दर्द, दुःख, पीडा, क्लेश, व्यथा
  • परिपाटी – रीति, रिवाज, प्रथा, परम्परा, चलन, प्रचलन, दस्तूर, तरीका, ढंग, प्रणाली, पद्धति, रूढि
  • परिभव – अपमान, अनादर, तिरस्कार, उपेक्षा, अवहेलना, अवमान
  • परिमण्डल – घेरा, चक्कर, वृत्त, परिधि
  • परिवाद – बुराई, बदनामी, निन्दा, अपयश, अपवाद, अपकीर्सि 
  • परिवार – खानदान, घराना, कुल, कुटुम्ब, कुनबा 
  • परिष्कार – संस्कार, शुद्धि, सफाई, संशोधन, परिमार्जन 
  • परिष्कृत – साफ, शुद्ध, स्वच्छ, प्राजल, परिमार्जित
  • परुष – कठोर, निर्दय, कड़ा, निष्ठुर, कर्कश
  • पशु – जन्तु, जानवर, मवेशी, चौपाया, चतुष्पाद
  • पश्चाताप – पछतावा, अफसोस, ग्लानि, अनुताप, संताप
  • पसीना – श्रमकण, प्रस्वेद, श्रमसीकर, 
  • पाण्डुलिपि – पाण्डुलेख, हस्तलिपि, मसौदा
  • पाखण्ड – ढोंग, ढकोसला, प्रपंच, आडम्बर स्वाग, 
  • पागल – बावला, दीवाना, उन्मत्त, विक्षिप्त
  • पाणि – हाथ, हस्त, कर
  • पाप – गुनाह, अध, पातक, अपकर्म, कलुष
  • पिता – जनक, दाप, तात, वालिद 
  • पुत्री – बेटी, लड़की, सुता, तनय, आत्मजा, दुहिता 
  • पिक – कलकण्ठ, कोयल, कोकिला, वसन्तदूती, श्यामा

पीछे – बाद में, पश्चात्, उपरान्त, अनन्तर, फिर, 

  • पीड़ा – दर्द, तकलीफ, वेदना, यातना, व्यथा, यंत्रणा, 
  • पुंज – समूह, अम्बार, ढेर, जमाव, राशि
  • पुरातन – पुराना, प्राचीन, भूतकालीन, पूर्वकालीन, प्राक्कालीन, प्राक्त
  • प्रगल्भ – घमण्डी, अहंकारी, अभिमानी, गर्वीला, दभी 
  • प्रचण्ड – भयंकर, खौफनाक, भीषण, भयानक, उर्म
  • प्रचुरता – इफरात, बहुलता, आधिक्य, बहुतायत, प्रभूतता
  • प्रजा – जनता, जन, लोक, रैयत, रिआया, 
  • प्रजातन्त्र – लोकतन्त्र, जनगण, जनतन्त्र, 
  • प्रज्ञा- बुद्धि, समझ, ज्ञान, प्रतिभा, मेघा
  • प्राणी – जीव, जीवधारी, सजीव, प्राणधारी, जानदार, 
  • प्रपात – झरना, स्रोत, निर्झर, उत्स 
  • प्रभा – प्रकाश, चमक, दीप्ति, विभा, धुति, 
  • प्रार्थना – विनती, निवेदन, आराधना, याचना, विनय, अर्ज 
  • प्रिय – दुलारा, प्यारा, प्रियतम, वत्सल, वल्लम, 
  • प्रिया – प्यारी, प्रेमिका, प्रियतमा, दिलरुबा, सजनी, प्रिये, प्रेयसी, वल्लभा, 
  • प्रेम – प्यार मोहब्बत, दुलार, प्रणय, स्नेह, लाङ-प्यार, अनुराग, ममता, रति, प्रीति, 
  • प्रोत्साहन – हौसला, बढ़ावा, उत्साहवर्धन, 
  • प्रौढ – बुजुर्ग, पक्की उम्र का, प्रबुद्ध, अधेड
  • पोत – जलयान, जहाज
  • पुश्कल – बहुत, अधिक, इफरात, ढेर-सा, प्रचुर, विपुल, अतिशय, अत्यन्त 
  • पुष्टि – समर्थन, हिमायत, अनुमोदन
  • पूजा – अर्चना, वन्दना, इबादत, आराधना, उपासना, पूज्य- पूजनीय, अर्चनीय, वंदनीय, आराध्य, उपास्य, वंद्य 
  • पूर्ण – पूरा, सारा, कुल, सम्पूर्ण, सकल, समूचा, समग्र
  • प्रख्यात – नामी, प्रसिद्ध, मशहूर, विख्यात, प्रतिष्ठित, यशस्वी, विश्रुत, नामवर, लब्ध-प्रतिष्ठ
  • पान – ताम्बुल, नागिनी पत्र, पर्णलता, नागरबेल, नागबल्ली, सप्तशिला, 
  • पाला – नीहार, तुषार, प्रालेय, हिम 
  • पार्वती – दुर्गा, भवानी, सती, गौरी, चण्डी, ईश्वरी, शिवा, गिरिजा, उमा, गिरिराज कुमारी, अम्बिका, शैलसुता, रुद्रानी, आर्या, अभया, सर्वमंगला, मैनसुता, हेमवती, मृडानी, अर्पणा
  • परेशान – आकुल, उद्विग्न, झुब्ध, बेजार
  • परोक्ष – ओझल, अगोचर, अप्रत्यक्ष, गुप्त, तिरोहित 
  • पल – लमहा, क्षण, सेकण्ड, अंश, दम, निमेष, 
  • पर्याप्त – काफी, बहुत, प्रचुर, यथेष्ट 
  • पल्लव – पत्ती, पर्ण, किसलय, पात, कॉपल
  • पल्ला – दामन, आँचल, छोर
  • पवित्र – शुद्ध, स्वच्छ, साफ, पावन, विशुद्ध, पुनीत, पाक, शुचि
  • पक्षी – चिडिया, परिन्दा, पछी, खग, द्विज, पखेरू, अंडज, विहग, विहंग, शकुन्त, शकुनि, पतग, 
  • पराग – पुष्पधूलि, रंज, पुष्परज, कुसुमरज
  • पुत्र – बेटा, लडका, पूत, सुत, तनया, आत्मज, औरस, 
  • परिर्वतन – बदलाव, हेर-फेर, अदल-बदल, फेर-बदल, तबदीली 
  • प्रणय – प्रेम, प्रीति, अनुराग, अनुरक्ति, स्नेह, 
  • प्रसन्नता – खुशी, आनन्द, प्रफुल्लता, हर्ष, आह्मद, 
  • प्रभात – सुबह, सवेरा, प्रातः, ऊषा, अरुणोदय
  • पृथ्वी – धरती, भू, भूमि, धरित्री, वसुन्धरा, अचला, जगती, धरा, धरणी, वसुधा, क्षिति, उर्वी, मेदिनी, मही, प्रहुभि, धाप्ती, क्षोणी, वसुमूति, बीजप्रसु, अवनि, ईला

पत्र से जुडे कुछ रोचक तथ्य

Patra Ka Paryayvachi Shabd

पत्र- पत्र का मतलब चिट्ठी होता है जिसके माध्यम से हम संदेश एक दूसरे को भेजते हैं वैसे पहले हम लोगों के पास हुआ नहीं हुआ करता था तब हम पत्र के सहारे लोगों के हाल-चाल पूछने के लिए पत्र लिखा पत्र जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है।

पत्र एक संदेश होता है जो हम एक दूसरे के प्रति अपनी भावनाएं तथा कार्यो के प्रति उपयोग करते हैं।जिसे हम पेन के मदद से कागज पर अपने हाथों से लिखते हैं और दूसरे व्यक्ति को भेजते हैं।

पत्र लेखन एक ऐसी कला है जिसके लिए बुद्धि और ज्ञान, परिपक्वता विचारों की विशालता, विषय का ज्ञान, अभिव्यक्ति की शक्ति और भाषा पर नियंत्रण की आवश्यकता होती है।

पत्र दो प्रकार के होते हैं-  

1.औपचारिक पत्र         2.अनौपचारिक पत्र

औपचारिक पत्र- जिनसे हमारा निजी या परिवारिक संबंध नहीं होता है अर्थात किसी अधिकारी, प्रधानाचार्य, संपादक आदि को लिखे गए पत्र औपचारिक पत्र कहते हैं।

अनौपचारिक पत्र- जिनसे हमारा निजी या पारिवारिक संबंध होता है अर्थात घरवालों, मित्रों और रिश्तेदारों को लिखे गए पत्र अनौपचारिक पत्र में रहते हैं।

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