नर पर्यायवाची शब्द | Nar Ka Paryayvachi Shabd Kya Hota Hai

नर का पर्यायवाची शब्द | Nar Ka Paryayvachi Shabd : मनुष्य, जन, मत्य, मानव, पुरुष, मनुज, मर्द, व्यक्ति, शख्य, इंसान, आदमी आदि, आज की नई पोस्ट नर का पर्यायवाची शब्द हिंदी में आज इस पोस्ट के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे की नर का पर्यायवाची शब्द तथा साथ ही न से पर्यायवाची शब्द हिंदी में |  ( Nar Ka Paryayvachi Shabd in Hindi) के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण के माध्यम से इस पोस्ट को पढ़ेंगे।

nar ka paryayvachi Shabd kya hota hai
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पर्यायवाची शब्द किसे कहते हैं?

पर्यायवाची शब्द की परिभाषा : वह शब्द जो एक समान अर्थ (एक दूसरे की तरह अर्थ) रखते हैं। वो शब्द पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं।

चुंकि इनके अर्थ में समानता अवश्य रहती है लेकिन इनका प्रयोग विभिन्न प्रकार से होता है पर्यायवाची शब्दों को उसके गुण व भाव के अनुसार प्रयोग किया जाता है क्योंकि एक ही शब्द या नाम हर स्थान पर उपयुक्त नहीं हो सकता है ‘इच्छा’ शब्द के स्थान पर ‘कामना’ शब्द प्रयोग करना कितना शर्मनाक होगा आपको ऐसे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए जो छोटे व प्रचलित हो।

नर का पर्यायवाची शब्द क्या होता है?

नर का पर्यायवाची शब्दNar Ka Paryayvachi Shabd
मनुष्य, जन, मत्य, मानव, पुरुष, मनुज, मर्द, व्यक्ति, शख्य, इंसान, आदमीManushya, Jain, maty, Manav, purush, Manoj, mard, vyakti, Satya, Insan, aadami

से शुरू होने वाले पर्यायवाची शब्द

  • नर – पुरुष, मानव, मनुष्य, मनुज, जन, मत्य 
  • नष्ट – बर्बाद, ध्वस्त, बेकार, चौपट, टूटा-फूटा
  • नाजुक – कोमल, मृदुल, सुकुमार, मसूण, स्निग्ध
  • नियति – किस्मत, भाग्य, प्रारब्ध, होनी, विधि, भावी, दैव्य, किसमत,
  • निर्णय – फैसला, परिणाम, निष्कर्ष, निश्चय
  • निष्ठा – यकीन, विश्वास, श्रद्धा, आस्था
  • निष्पतित – समाप्ति, अन्त, इति
  • न्यून – थोड़ा, कम, अल्प, जरा, नाकाफी
  • निर्दय – बेरहम, बेदर्द, दयाहीन, क्रूर, निर्मम, निष्ठुर
  • निर्दोष – बेकसुर, बेगुनाह, दोषरहित, निरपराध, अदोष 
  • निर्धन – गरीब, कंगाल, दरिद्र, अकिंचन
  • निर्बल – कमजोर, दुर्बल, कृश, कृशकाय
  • निमंत्रण – न्योता, बुलावा आमंत्रण
  • निर्मल – स्वच्छ, साफ, शुद्ध
  • निर्वासन – निष्कासन, देश-निकाला, जलावतनी
  • निश्चित – पक्का, तय, दृढ, निर्धारित, निर्णीत 
  • निष्कलंक – बेदाग, साफ, स्वच्छ, निर्दोष, बे-ऐब, 
  • निस्तब्धता- सन्नाटा, चुप, खामोशी, शान्ति, नीरवता
  • निस्संदेह – बेशक, सचमुच, जरूर, वाकई, अवश्य, बिलाशक, वस्तुतः
  • नीचता – कमीनापना, तुच्छता, अधमता, ओछापन, क्षुद्रता 
  • नुकसान – घाटा, हानि, कमी, क्षति, घटती, हस
  • नुकीला – नोकदार, कटाग्र, पैना, सूच्यग्र, तीक्ष्णार्ग 
  • नेता – मुखिया, प्रधान, सरदार, अग्रणी, अगुआ
  • नौका – नाव, जलयान, तरणी, डोंगी, नैया, बेडा, पतग, तरी, वनवाहन, तरणि
  • नौबत – हालत, स्थिती, दशा, अवस्था, परिस्थिती, 
  • न्यायाधीश – जज, न्यायकर्त्ता, न्यायाध्यक्ष, निर्णायक, मुशिफ
  • न्यायालय- कोर्ट, कचहरी, अदालत, मुसिफी
  • न्यारा – अजीब, अनोखा,अदभुत, निराला, विलक्षण
  • नैसर्गिक – प्राकृतिक, वास्तविक, स्वाभाविक
  • निकेतन – घर, मकान, आवास, आलय, निलय
  • निगम – समिति, संगठन, संस्था, निकाय, प्रतिष्ठान
  • निजी – अपना, व्यक्तिगत, खुद का स्वकीय
  • निडर- बेधड़क, निधडक, निर्भय, दिलेर, निःशंक
  • नित्य – रोज, प्रतिदिन, सदैव, सदा, सर्वदा, शाश्वत, अमर, अविनाशी, अमर्त्य, अनश्वर, सनातन, सतत, अहर्निश, 
  • निरंतर – लगातार, हमेशा, बराबर, सदा
  • नियंत्रण – वश, काबू, अधिकार, अकुश
  • नियम – कायदा, उसूल, विधि, विधान, दस्तूर
  • निरपेक्ष – अलग, निष्पक्ष, उदासीन, बेलाग, तटस्थ 
  • निरर्थक – अर्थहीन, बेमतलब, बेकार, व्यर्थ, बेमानी
  • निराधार – बेबुनियाद, आधारहीन, जड़हीन, निर्मूल, आधाररहित
  • निराला – अनोखा, अदभुत, अनूठा, अद्वितीय, विलक्षण, बेजोड़, अप्रतिम
  • नरम – नाजुक, मुलायम, कोमल, मृदुल
  • नरेन्द्र – राजा, नरेश, नरपति, भूपति, भूपाल, भूप
  • नवल – अजब, विचित्र, अनोखा, अद्भुत, विलक्षण
  • नश्वर – विनाशी, मरणशील, नाशाधीन, नाशवान, अनित्य
  • नाज – अदा, हाव-भाव, नखरा, चौधला, बनाव-सिंगार
  • नाता – रिश्ता, लगाव, सम्बन्ध, रिश्तेदारी, नातेदारी, वास्ता
  • नाम – प्रसिद्धि, यश, बडाई, मशहूरी, कीर्ति, ख्याति, शेहरत
  • नारी – स्त्री, औरत, महिला, रमणी, वनिता, ललना, वामा
  • नाविक – नौचालक, मल्लाह, पोतचालक, पोतवाहक 
  • नाशवान – विनाशी अस्थिर, क्षणभंगुर, क्षणिक, नश्वर
  • निंदा – बुराई, बदनामी, अपयश, अपवाद, बदगोई
  • निकट – करीब, पास, समीप, आसन्न निकटस्थ

नर से जुडे कुछ रोचक तथ्य

Nar Ka Paryayvachi Shabd

नर- नर का अर्थ होता है मनुष्य, मानव, आदमी, पुरुष, इंसान आदि।

मनुष्य एक मननशील प्राणी है। जो अपने मस्तिष्क बल के आधार पर बहुत से असंभव कार्य को संभव कर सकता है।

आप पुरुषों की वीरता तुम्हारे पास ही है। हम मनुष्यों को एक बार की असफलता पर निराश नहीं होना चाहिए। क्योंकि हम पुरुषों की सफलता हमारे हाथों में होती है। हम मेहनत करके उसे सफल बन सकते हैं। क्योंकि मनुष्य को अपने मानसिक बल पर विश्वास होता है। उसे कोई भी हरा नहीं सकता है लेकिन जब मन करता है तो मनुष्य भी हार जाता है।

मनुष्य को अपने सामने आई कठिनाइयों से निराश हो कर बैठना नहीं चाहिए क्योंकि इससे हमारी सार्थकता सिद्ध नहीं होती है। वह नर तभी कहलाता है जब वह अपने जीवन में आयी कठिनाइयों से डटकर सामना करता है।

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