किताब का पर्यायवाची शब्द | Kitab Ka Paryayvachi Shabd Kya Hota Hai

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Kitab ka paryayvachi Shabd kya hota hai
Kitab ka paryayvachi Shabd kya hota hai

पर्यायवाची शब्द किसे कहते हैं?

पर्यायवाची शब्द की परिभाषा : वह शब्द जो एक समान अर्थ (एक दूसरे की तरह अर्थ) रखते हैं। वो शब्द पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं।

चुंकि इनके अर्थ में समानता अवश्य रहती है लेकिन इनका प्रयोग विभिन्न प्रकार से होता है पर्यायवाची शब्दों को उसके गुण व भाव के अनुसार प्रयोग किया जाता है क्योंकि एक ही शब्द या नाम हर स्थान पर उपयुक्त नहीं हो सकता है ‘इच्छा’ शब्द के स्थान पर ‘कामना’ शब्द प्रयोग करना कितना शर्मनाक होगा आपको ऐसे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए जो छोटे व प्रचलित हो।

किताब का पर्यायवाची शब्द क्या होता है?

किताब का पर्यायवाची शब्दKitab Ka Paryayvachi Shabd
बही, जिल्द, पुस्तक, पोथी, ग्रंथBahi, jaldi, pustak, pothi, Granth

क से शुरू होने वाले पर्यायवाची शब्द

  • कृष्ण – कन्हैया, श्याम, मोहन, वंशीधर, वासुदेव, मुरलीधर, गोविंन्द, गोपीनाथ, नंदलाल, बनवारी, नंदनदन, • बनमाली, गिरिंधर, हृषीकेश, मुरारी, मुकुन्द, दामोदर, ब्रज वल्लभ, क्षमाधव, क्षीरसायी
  • कृपा – दया, करुणा, अनुग्रह, अनुकम्पा 
  • कंदरा – गुफा, गहर, गुहा, खोह
  • कंगाल – गरीब, निर्धन, दरिद्र, अकिंचन, 
  • कपकपी – थरथराहट, थरथरी, प्रकपन 
  • केला – भानुफल, कदली, रम्भा, मोभा 
  • केश – बाल, लट, कच, अलक, कुन्तल
  • क्रोध – गुस्सा, आक्रोश, प्रकोप , कोप, अमर्ष, रोष, क्षोभ, तैश
  • कमल – जलज, पंकज, सरोज, राजीव, अम्भोज, अरविन्द, शतदल, अबुज, नीरज, उत्पल, अब्ज, परिजात, कुबलय, इन्दीवर, पद्म, नलिन, शतपत्र, सरसिज, सरसीरुह, कज, पाथोज, पुण्डरीक, वारिज, सरीसह, कोकनद, तामरस, मकरन्द
  • कपड़ा – वस्त्र, चीर, वसन, अम्बर, पट, दुकूल, चैल, परिधर 
  • कामदेव – मनोभव, मकरध्वज, केतन, मयन, मनोज, मदन, मीन केतु, रतिपति, मनसिज, मन्मथ, पन्चशर, मार, स्मर, कन्दर्प, अनंग, कुसुमशर, पुष्पधन्वा
  • कारागार – जेल, कारावास, कैदखाना, बन्दीगृह
  • कर – शुल्क, महसूल, मालगुजारी 
  • किरण – कर, अशु, मरीचि, मयूख, रश्मि
  • कोयल – कोकिल, पिक, श्यामा, काकपाली,  मदनशलाका, कलघोष, वसन्तदूत
  • कंचन – सोना, स्वर्ण, कनक, सुवर्ण
  • कल्पवृक्ष – पारिजात, हरिचन्दन, कल्पशाल, देववृक्ष, सुरतरु, मन्दार, कल्पतरू, कल्पद्रुम
  • कई – अनेक, कई-एक एकाधिक, नाना, विविध
  • कली – कलिका, अँखुवा, कोपल, मुकुल, कल्पशाल, नवपल्लव, जालक, ताम्रपल्लव,  
  • कण्ठ – ग्रीवा, गला, शिरोधरा
  • कर – हाथ, बाँह, भुज, हस्त, पाणि
  • कल्याण – मंगल, भलाई, क्षेम, वचना 
  • कला – फन, हुनर, कौशल, विद्या
  • कन्या – बालिका, कुमारी, कुँआरि, किशोरी, अविवाहिता, अनूढा, बाला, 
  • कबूतर – परेवा, कपोत, रक्तलोचन, हारीत, पारावृत
  • कटाक्ष – आक्षेप, व्यग्य, छींटाकशी
  • कच्चा – अनपका, कालपूर्व, अपक्व, अपरिपुष्ट, अप्रौढ, 
  • कपड़ा – वस्त्र, चीर, अंबर, पट, परिधान, दसन
  • कथन – कथनी, बयान, मत, विचार, वक्तव्य, 
  • कटु – कडवा, तीखा, कठोर, कडा, तेज, रूखा, रुक्ष, तीक्ष्ण, चरपाए, कर्कश, पेरुष
  • कब्ज – मलावरोध, मलबद्धता, कोष्ठबद्धता, मलबध, बद्धकोष्ठ
  • कानाफूसी – फुसफुस, खुसर-फुसर, फिसफिस
  • काक – कौआ, काण, काग, करठ, वायस, पिशुन
  • कामुकता – व्यभिचारिता, विषयासक्ति, भोगासक्ति, इन्द्रियलोलुपता, लम्पटता
  • कार्तिकेय – कुमार, स्कंद, षडानन, शरभव, 
  • क्रूर – कठोर, दयाहीन, निर्दयी, निर्दय

किताब से जुडे कुछ रोचक तथ्य

Kitab Ka Paryayvachi Shabd

किताब- पुस्तके हमारे सबसे अच्छे दोस्त होते हैं। जो हमारे ज्ञान की दिशा को बढ़ाती हैं। पुस्तके ज्ञान का भंडार होती हैं। इनसे हमें अच्छे बुरे की सीख मिलती है। इसलिए हमें बचपन से ही पुस्तकें दी जाती हैं। जिससे हम पढ़ और लिख कर आगे बढ़े। पुस्तके हमारे ज्ञान को जागृत करते हैं। पुस्तके हमें वर्णमाला से लेकर जिंदगी के कठिन से कठिन सवालों का जवाब देती हैं। पुस्तके आपको कभी भी धोखा नहीं देते हैं वे सदैव ही आपके जान को बढ़ाती हैं।

पुस्तके सबके लिए महत्वपूर्ण होती हैं। बच्चों से लेकर बड़ों तक को पुस्तकें पढ़नी चाहिए। इससे हमें धार्मिक सामाजिक हर प्रकार के ज्ञान प्राप्त होता है। अर्थात पुस्तके हर क्षेत्र में हर उम्र में जरूरी हैं।

  • पुस्तके आपको हंसा सकती हैं तो वह रोचक कहानियों के साथ रुला भी सकती हैं।
  • पुस्तके हमारे सच्चे दोस्त और मार्गदर्शक होते हैं।
  • पुस्तके ज्ञान का भंडार होती है।
  • पुस्तकों का साथ जीवन में कई परिवर्तन लाता है।
  • पुस्तके हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • पुस्तकों से हमें विभिन्न प्रकार की जानकारियां प्राप्त होती हैं।

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