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Karun Ras : करुण रस किसे कहते हैं परिभाषा, उदाहरण व स्थाई भाव सहित | Karun Ras Kise Kahate Hain

स्वागत है दोस्तों आज की नई पोस्ट करुण रस (Karun Ras) में आज इस पोस्ट के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे की करुण रस किसे कहते हैं (Karun Ras Kise Kahate Hain) तथा सा ही करुण रस के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण के माध्यम से इस पोस्ट को पढ़ेंगे। 

यदि आप संपूर्ण रस का अध्ययन करना चाहते हैं तो आप यहां पर क्लिक करके संपूर्ण विशेषण के अध्ययन कर सकते हैं।

Karun Ras Ki Paribhasha Udaharan Sthayi Bhav

रस की परिभाषा | Ras Ki Paribhasha

काव्य, कथा, नाटक, उपन्यास आदि के पढ़ने सुनने या उसका अभिनय देखने से जो आनंद की प्राप्त होती है उसे रस कहते हैं।

 

करुण रस की परिभाषा | Karun Ras Ki Paribhasha

दुख या शोक की संवेदना बड़ी गहरी और तीव्र होती है।

यह जीवन में सहानुभूति का भाव विस्तृत कर मनुष्य को भोग भाव से धनाभाव की ओर प्रेरित करता है। करुणा से हमदर्दी आत्मपिता और प्रेम उत्पन्न होता है।जिससे व्यक्ति को परोपकार की ओर उन्मुख होता है।

जहां इष्ट वस्त्र की हानि, अनिष्ट वस्तु का लाभ, प्रिय का चिर वियोग अर्थ हानि आदि से जहां शोक भाव की उत्पत्ति होती है वहां करुण रस होता है। इसका स्थाई भावशोक” होता है।

किसी व्यक्ति की उसकी मनचाही वस्तु ना मिलना या नष्ट हो जाती है, तब उससे उत्पन्न होने वाले भाव दुःख या शोक को करुण रस कहते हैं।

 

करुण रस के भाव | Karun Ras Ke Bhav

रसकरुण रस
स्थायी भावशोक
संचारी भावचिंता, निषाद, स्मृति

 

करुण रस के उदाहरण | Karun Ras Ke Udaharan

हे खग मृग हे मधुकर श्रेनी।
तुम देखी सीता मृग नैनी।।
मणि खोये भुजंग-सी जननी, फन-सा पटक रही थी सींस।
अन्धी आज बनाकर मुझको किया न्याय तुमने जगदीश।।
अबला जीवन हाय! तुम्हारी यही कहानी
आंचल में है दूध और आंखों में पानी।
दुख ही जीवन की कथा रही
क्या कहूं, जो नहीं कहीं।
ब्रज के बिहारी लोग दुखारे।
देखि सुदामा की दीन दशा, करुणा करिके करुणा निधि रोये।
पानि परात को हाथ छुयों नंहि, नैनर के जल सो पग धोये।।
प्रिय पति वह मेरा प्राण प्यारा कहां है।
दुख जलनिधि में डूबी का सहारा कहां है।
बुझी पड़ी थी चिता वहां पर छाती धधक उठी मेरी
हाय फूल सी कोमल बच्ची हुई राख की ढेरी।
धोखा न दो भैया मुझे, इस भांति आकर के यहां,
मझधार में मुझको बहाकर तात जाते हो कहां?
सीता गई तुम भी चले मैं भी न जिऊंगा यहां।
सुग्रीव बोले साथ में सब जाएंगे वानर वहां?

करुण रस का स्थाई भाव क्या है?

करुण रस का स्थाई भाव “शोक” होता है।

करुण रस में देवता कौन है ?

करुण रस के देवता “यम” हैं।

करुण रस के कवि कौन हैं ?

करुण रस के कवि “मुकुटधर पांडेय” हैं।

 

निष्कर्ष

छात्रों मैं उम्मीद करता हूं कि आपको आज की यह पोस्ट करुण रस किसे कहते हैं (Karun Ras Kise Kehte Hain) आपको पसंद आई होगी मैं इस पोस्ट को करुण रस को कुछ उदाहरण (Karun Ras Ke Udaharan) के माध्यम से समझने की संपूर्ण कोशिश की है जिससे आपको करुण रस आसानी से समझ में आ जाए।

यदि आपको करुण रस या इस पोस्ट से किसी प्रकार का कोई शिकायत है या आपको करुण रस (Karun Ras) से संबंधित कोई सुझाव देना है तो आप हमें कमेंट सेक्शन या फिर ईमेल के माध्यम से सूचित कर सकते हैं मैं आपके इस सवाल का जवाब जल्द से जल्द देने का प्रयास करूंगा आपके बहुमूल्य विचारों का इंतजार रहेगा।

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