कारक किसे कहते हैं कारक की परिभाषा, भेद उदाहरण सहित | Karak Kise Kahate Hain

नमस्ते दोस्तों मैं आप सभी लोगों का स्वागत करता हूं मैं Studyroot.in की तरफ से आज हम आपको कारक किसे कहते हैं (Karak Kise Kahate Hain) के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर आएंगे हम पहले देखेंगे कि Karak ke ke kitne bhed hote Hain और हम कारक के सभी भेदों को पढ़ने के साथ Karak kise kahate Hain in Hindi Grammar यह पोस्ट क्लास 10 व 12 के छात्रों के लिए यह कहें 1 से लेकर 12 के सभी छात्रों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। मैंने इस को इस प्रकार लिखा है कि आप कारक के बारे में अधिकतम जानकारी प्राप्त कर सकें जिससे आपको दूसरी कोई पोस्ट पढ़ने की कोई जरूरत ना पढ़े।

karak kise kahate hain
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कारक की परिभाषा | Karak Ki Paribhasha

संज्ञा या सर्वनाम का संबंध विशेष क्रिया के साथ बताया जाए तो उसे कारक कहते हैं।

जैसे – कवि गाना गाता है।

कारक क्या होता है की वाक्य में प्रयुक्त शब्द आपस में संबद्ध होते हैं असंबद्ध होने पर इनका अर्थ ही उलझकर रह जाएगा। 

अथवा वे निरर्थक हो जाएंगे इसी सार्थकता को लाने के लिए संबंध को बतलाने का काम कारक करते हैं।

कारक शब्द का अर्थ

कारक का अर्थ होता है क्रिया को करने वाला।

विभक्ति – कारक को प्रकट करने के लिए संज्ञा या सर्वनाम के साथ जो चिन्ह लगाया जाता है। उसे  विभक्ति कहते हैं।

जैसे – राम ‘ने’ पुस्तक पढ़ी।

इस वाक्य में ने कारक है जोकि ने कर्ता कारक है।

कारक के प्रकार | Karak Ke Prakar

हिंदी में कारक के 8 प्रकार होते हैं संस्कृत में कारक के छह प्रकार होते हैं 

संबंध कारक और संबोधन कारक मूल रूप में नहीं थे लेकिन अब इनको हिंदी में कारक कहते हैं।

कारकविभक्तियां
कर्ताने
कर्मको (माध्यम/ के द्वारा)
करणसे
संप्रदान के लिए, निर्मित, वास्ते, हेतु, को
अपादान से (अलग या 2 में तुलना)
संबंधका, की, के, रा, री, रे, ना, नी, ने
संबोधनहे!, अरे!, रे!, अजी!, ए!, ऐ!

 

विभक्ति या परसर्ग किसे कहते हैं

कारक सूचित करने के लिए संज्ञा अथवा सर्वनाम के साथ जो प्रत्यय लगाया जाता है उसे विभक्ति कहते हैं।

सर्त – प्रत्येक कार्य की अपनी निश्चित विभक्ति होती है। और यदि दो कारकों की विभक्ति समान हो तो वाक्य में उनका व्यवहार अलग अलग होगा।

एक वाक्य में एक से अधिक कारक प्रयुक्त किए जा सकते हैं। लेकिन एक स्थान पर कभी दो कारक नहीं होंगे।

मेन पॉइंट – 

  • सभी कारक या तो संज्ञा या फिर सर्वनाम पद होते हैं।
  • सर्वनाम के साथ विभक्त संयुक्त रूप से जोड़ते संज्ञा के साथ स्वतंत्र लिखी जाती है।
  • संज्ञा शब्दों के साथ संबंध कारक को सिर्फ तीन विभक्तियों का प्रयोग होता है – का, की, के
  • संज्ञा शब्दों के साथ ‘ने’ विभक्ति जोड़ने से वह कर्ता कारक बन जाएगी।
  • निजवाचक सर्वनाम में ने विभक्ति को जोड़ने से वह कर्ता कारक होगी।

कारक की पहचान कैसे करें

  1. महत्वपूर्ण भूमिका विभक्ति
  2. कर्ता से लेकर अधिकरण कारक यानी (1से7) तक कारकों में वाक्य में जहां इनकी विभक्ति लिखी होती है उससे ठीक पहले संबंधित विभक्त का कारक होगा।
  3. संबोधन कारक में विभक्ति पहलेकारक शब्द बाद में लिखा जाता है।

1. कर्ता कारक | Karta Karak

क्रिया को करने वाले को कर्ता कारक कहते हैं। इसकी विभक्ति ‘ने’ है ने विभक्ति का प्रयोग केवल भूतकालीन क्रियाओं के साथ ही होता है। लेकिन वाक्य वर्तमान काल, भविष्य काल तथा आक्रमक हो वहां ने विभक्ति का प्रयोग नहीं होता है।

कर्ता कारक के उदाहरण

  • राम ने पत्र लिखा           
  • कृष्णा नाचता है
  • पंछी आसमान में उड़ता है। 
  • सरिता गाना गाती है        
  • अंशु ने भोजन किया।
  • कमरुन्निसा खेल रही है।

2. कर्म कारक | Karm Karak

जब क्रिया का फल कर्म पर पड़ता है, उसे कर्म कारक कहते हैं। इसकी विभक्ति ‘को’ है को विभक्ति का प्रयोग केवल सजीव कर्म के साथ किया जाता है। निर्जीव कर्म के साथ को विभक्ति का प्रयोग नहीं करते हैं।

कर्म कारक के उदाहरण

  • राम ने रावण को मारा। (सजीव)
  • अशोक दूध पीता है। (निर्जीव)
  • बालक ने कुत्ते को मारा।
  • सीता फल खाती है। कवि कविता लिखता है।
  • सीमा ने मनीष को पीटा। 
  • विनय पुस्तक पढ़ रहा है।

3. करण कारक | Karan Karak

जब कर्ता कार्य करते समय जिन साधनों का प्रयोग करता है, उसे कारक कहते हैं। इसकी विभक्ति ‘से’ है।

करण कारक के उदाहरण

  • मनोज पेन से पत्र लिखता है।
  • उसे लाठी से मारा।
  • सीमा चाकू से सब्जी कटती है। 
  • राम ने रावण को बाण से मारा। 
  • अर्पणा ने सीमा को डंडे से मारा। 
  • स्नेहा लेखनी से लिखती है।

4. संप्रदान कारक | Sambandh Karak

संप्रदान शब्द का अर्थ है ‘देना’ 

जब कर्ता दूसरे के लिए क्रिया करता है उसे संप्रदान कारक कहते हैं। इसकी विभक्ति ‘के लिए’ है।

‘को’ विभक्ति का प्रयोग तब किया जाता है जब वाक्य में दो कर्म होते हैं। वहां किया जाता है अर्थात देने के अर्थ में ‘को’ विभक्ति का प्रयोग किया जाता है।

संप्रदान कारक के उदाहरण

  • आलोक मां के लिए दवा लाया।
  • भिखारी को भिक्षा दी।
  • कविता ने सुमन को पुस्तक दी। 
  • घर के लिए समान मांगा मंगाओं।

5. अपादान कारक | Apadan Karak

जब एक वस्तु या व्यक्ति दूसरे वस्तु या व्यक्ति से अलग होने का भाव प्रकट करें तो उसे अपादान कारक कहते हैं। इसकी विभक्ति ‘से’ (अलग होना) है।

अपादान कारक के उदाहरण

  • गंगा हिमालय से निकलती है।
  • पेड़ से पत्ता गिरता है।
  • बालक घर से स्कूल जाते हैं। 
  • लोग गांव से शहर जाते हैं। 
  • वृक्ष से पत्ता गिरा। 
  • सवार घोड़े से गिरा। 
  • रेलगाड़ी प्लेटफार्म से जा चुकी।

अपादान कारक के निम्न कारण और भी हैं

जहां तुलना का भाव होता है उसमें अपादान कारक होता है।
जैसे – अशोक अजय से अच्छा है।
जहां डर या भय का भाव हो उसमें भी अपादान कारक होता है।
जैसे – बालक शेर से डरता है।
जहां लज्जा का भाव होता है, उसमें अपादान कारक होता है। 
जैसे – बालक महेमानों से शर्माते हैं।
जिससे ज्ञान प्राप्त किया जाता है उसमें आप भी अपादान कारक होता है।
जैसे – छात्र गुरु से पढ़ते हैं।
जहां कार्य प्रारंभ किया जाता है वहां भी अपादान कारक होता है
जैसे- कल से तुम्हारी परीक्षा है।

5. संबंध कारक | Sambandh Karak

जब संज्ञा व सर्वनाम का संबंध है दूसरी संज्ञा व सर्वनाम के साथ बताया जाए उसे संबंध कारक कहते हैं।

संबंध कारक के उदाहरण

  • मोहन सोहन का भाई है।
  • मेरी कॉपी कहां है।
  • मेरी घड़ी खो गई।
  • मैंने अपनी पुस्तक लिखी।

 

  • एक संख्या सर्वनाम का दूसरी संज्ञा या सर्वनाम से संबंध प्रदर्शित करने के लिए संबंध कारक का प्रयोग होता है।

जैसे 

  • अनीता सुरेश की बहन है। 
  • अमित सुमित का भाई है। 
  • सुरेश महेश का मित्र है। 
  • समीर शालू का मामा है।

 

  • स्वामित्व या अधिकार प्रकट करने के लिए

जैसे

  • आप किस की आज्ञा से आए हैं।
  • नेताजी का लड़का बदमाश है।
  • यह सुमित की कलम है।

 

  • कर्तव्य प्रकट परिणाम प्रकट मोर भाव प्रकट करने में

जैसे

  • प्रेमचंद के उपन्यास। 
  • कबीर दास के दोहे। 
  • पांच मीटर की साड़ी।
  • चार पदों की कविता।
  • ₹10 की ब्याज।
  • ₹20 के आलू।
  • 50000 की मोटरसाइकिल।

 

  • निर्माण का साधन प्रदर्शित करने के लिए

जैसे

  • ईटों का मकान। 
  • चमड़े का जूता। 
  • सोने की अंगूठी।

 

  • सर्वनाम की स्थिति में संबंध कारक का रूप रा, री, रे हो जाता है।

जैसे

  • मेरी पुस्तक। 
  • तुम्हारा पत्र। 
  • मेरे दोस्त।

7. अधिकरण कारक | Adhikaran Karak

जहां क्रिया अपना आधार प्रकट करती है अर्थात स्थान बताती है उसे अधिकरण कारक कहते हैं।

जैसे

  • पेड़ पर पक्षी बैठे हैं। 
  • मेज पर पुस्तक रखी है। 
  • मैं 3 मिनट में आ रहा हूं। 
  • सरिता गाड़ी में बैठी है।

 

स्थान समय भीतर या सीमा का बोध कराने के लिए अधिकरण कारक का प्रयोग होता है।

जैसे

  • उमेश लखनऊ में पड़ता है।
  • पुस्तक मेज पर है। 
  • उसके हाथ में कलम है। 
  • ठीक समय पर आ जाना। 
  • वह तीन दिन में आएगा।

 

तुलना मूल्य और अंतर का बोध कराने के लिए अधिकरण कारक का प्रयोग होता है।

जैसे 

  • कमल सभी फूलों से सुंदरतम है।
  • यह कलम ₹5 में मिलती है।
  • कुछ विधायक एक करोड़ में बिक गए। 
  • गरीब और अमीर में बहुत अंतर है।

 

निर्धारण और निमित्त पढ़कर करने के लिए अधिकरण कारक का प्रयोग होता है।

जैसे

  • छोटी सी बात पर मत लड़ो।
  • सारा दिन मैच खेलने में बीत गया।

8. संबोधन कारक | Sambandh Karak

संज्ञा के जिस रूप से किसी को पुकारने, चेतावनी देने या संबोधित करने का बोध होता है उसे संबोधन कारक कहते हैं।

(जब किसी को बुलाया या पुकारा जाता है)

जैसे

  • हे राम! रक्षा करो। 
  • अरे मूर्ख! संभल जा।
  • ओ लड़कों! खेलना बंद करो।
  • अजी! सुनते हो।
  • अरे मोहन! इधर आओ।
  • हे भगवान! हमारी रक्षा करो।

निष्कर्ष

दोस्तों आज की पोस्ट Karak kise kahate Hain मैं उम्मीद करता हूं कि यह पोस्ट आपको पसंद आई होगी मैंने Karak in Hindi को सरलता के साथ समझाने की पूर्ण कोशिश की है। अगर कोई जानकारी Karak kise kahate Hain और Karak ke kitne bhed hote Hain in Hindi या अन्य किसी प्रकार की पोस्ट में हमसे कुछ छूट गया। हो तो आप नीचे कमेंट कर हमें सूचित कर सकते हैं। और हम आपके लिए आगे किस विषय पर जानकारी दें यह भी सुझाव जरूर बताएं आप आपके कमेंट का इंतजार रहेगा।

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