कमल का पर्यायवाची शब्द | Kamal Ka Paryayvachi Shabd Kya Hain

कमल का पर्यायवाची शब्द | Kamal Ka Paryayvachi Shabd : उत्पल, कुलवय, मकरंद, सरोरुह, वारिज, शतदल, जलज, सरजित, इंदीवर, सरसीरूह,पुंडरीक, नीरज, परिजात, कंज, पदम, सतपत्र, पंकज, पाथोज, अंबुज आदि, आज की नई पोस्ट कमल का पर्यायवाची शब्द हिंदी में आज इस पोस्ट के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे की कमल का पर्यायवाची शब्द तथा साथ ही क से पर्यायवाची शब्द हिंदी में | (Kamal Ka Paryayvachi Shabd in Hindi) के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण के माध्यम से इस पोस्ट को पढ़ेंगे।

kamal ka paryayvachi Shabd kya hota hai.png
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पर्यायवाची शब्द किसे कहते हैं?

पर्यायवाची शब्द की परिभाषा : वह शब्द जो एक समान अर्थ (एक दूसरे की तरह अर्थ) रखते हैं। वो शब्द पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं।

चुंकि इनके अर्थ में समानता अवश्य रहती है लेकिन इनका प्रयोग विभिन्न प्रकार से होता है पर्यायवाची शब्दों को उसके गुण व भाव के अनुसार प्रयोग किया जाता है क्योंकि एक ही शब्द या नाम हर स्थान पर उपयुक्त नहीं हो सकता है ‘इच्छा’ शब्द के स्थान पर ‘कामना’ शब्द प्रयोग करना कितना शर्मनाक होगा आपको ऐसे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए जो छोटे व प्रचलित हो।

कमल का पर्यायवाची शब्द क्या होता है?

कमल का पर्यायवाची शब्दKamal Ka Paryayvachi Shabd
उत्पल, कुलवय, मकरंद, सरोरुह, वारिज, शतदल, जलज, सरजित, इंदीवर, सरसीरूह,पुंडरीक, नीरज, परिजात, कंज, पदम, सतपत्र, पंकज, पाथोज, अंबुज, अब्ज, तामरस, नलिन,सरोज, अरविंद, कोकनद, अम्भोज, सतदल, अम्भोरूह, राजीवUtpal, Kulway, Makrand, Saroruh, Varij, Shatdal, Jalaj, Surjit, Endeavour, Sarsairuh, Pundarik, Neeraj, Parijat, Kanj, Padam, Satpatra, Pankaj, Pathoj, Ambuj, Abj, Tamaras, Nalin, Saroj, Arvind, Kokand, Ambhoj, Shatdal, Ambaruh, Rajiv

से शुरू होने वाले पर्यायवाची शब्द

  • कमल – जलज, पंकज, सरोज, राजीव, अम्भोज, अरविन्द, शतदल, अबुज, नीरज, उत्पल, अब्ज, परिजात, कुबलय, इन्दीवर, पद्म, नलिन, शतपत्र, सरसिज, सरसीरुह, कज, पाथोज, पुण्डरीक, वारिज, सरीसह, कोकनद, तामरस, मकरन्द
  • कपड़ा – वस्त्र, चीर, वसन, अम्बर, पट, दुकूल, चैल, परिधर 
  • कामदेव – मनोभव, मकरध्वज, केतन, मयन, मनोज, मदन, मीन केतु, रतिपति, मनसिज, मन्मथ, पन्चशर, मार, स्मर, कन्दर्प, अनंग, कुसुमशर, पुष्पधन्वा
  • कल्पवृक्ष – पारिजात, हरिचन्दन, कल्पशाल, देववृक्ष, सुरतरु, मन्दार, कल्पतरू, कल्पद्रुम
  • कई – अनेक, कई-एक एकाधिक, नाना, विविध
  • कली – कलिका, अँखुवा, कोपल, मुकुल, कल्पशाल, नवपल्लव, जालक, ताम्रपल्लव,  
  • कण्ठ – ग्रीवा, गला, शिरोधरा
  • कर – हाथ, बाँह, भुज, हस्त, पाणि
  • कल्याण – मंगल, भलाई, क्षेम, वचना
  • कारागार – जेल, कारावास, कैदखाना, बन्दीगृह
  • कर – शुल्क, महसूल, मालगुजारी 
  • किरण – कर, अशु, मरीचि, मयूख, रश्मि
  • कोयल – कोकिल, पिक, श्यामा, काकपाली,  मदनशलाका, कलघोष, वसन्तदूत
  • कंचन – सोना, स्वर्ण, कनक, सुवर्ण
  • कब्ज – मलावरोध, मलबद्धता, कोष्ठबद्धता, मलबध, बद्धकोष्ठ
  • कानाफूसी – फुसफुस, खुसर-फुसर, फिसफिस
  • काक – कौआ, काण, काग, करठ, वायस, पिशुन
  • कामुकता – व्यभिचारिता, विषयासक्ति, भोगासक्ति, इन्द्रियलोलुपता, लम्पटता
  • कार्तिकेय – कुमार, स्कंद, षडानन, शरभव, 
  • क्रूर – कठोर, दयाहीन, निर्दयी, निर्दय, 
  • कुबेर – धनेश्वर, धनपति, धनपाल, धनेश, धनद, यक्षराज, धनाधिप, राजराज, किन्नरेश, अलंकेश, नृपराज, अधिपति
  • कुत्सित – नीच, बुरा, खराब, अधम, निकृष्ट, घृणित, लम्पट, गर्हित, हेय
  • कूटनीति – छलबल, दाँव-पेंच, घात, कूटयुक्ति, चाल 
  • कुत्ता – कुक्कुर, श्वान, शुनक, सारमेय, श्वा
  • कृतज्ञ – एहसानमन्द, आभारी, ऋणी, उपकृत, अनुगृहीत, कृतार्थ
  • कन्या – बालिका, कुमारी, कुँआरि, किशोरी, अविवाहिता, अनूढा, बाला, 
  • कबूतर – परेवा, कपोत, रक्तलोचन, हारीत, पारावृत
  • कटाक्ष – आक्षेप, व्यग्य, छींटाकशी
  • कच्चा – अनपका, कालपूर्व, अपक्व, अपरिपुष्ट, अप्रौढ, 
  • कपड़ा – वस्त्र, चीर, अंबर, पट, परिधान, दसन
  • कथन – कथनी, बयान, मत, विचार, वक्तव्य, 
  • कटु – कडवा, तीखा, कठोर, कडा, तेज, रूखा, रुक्ष, तीक्ष्ण, चरपाए, कर्कश, पेरुष
  • कृष्ण – कन्हैया, श्याम, मोहन, वंशीधर, वासुदेव, मुरलीधर, गोविंन्द, गोपीनाथ, नंदलाल, बनवारी, नंदनदन, • बनमाली, गिरिंधर, हृषीकेश, मुरारी, मुकुन्द, दामोदर, ब्रज वल्लभ, क्षमाधव, क्षीरसायी
  • कृपा – दया, करुणा, अनुग्रह, अनुकम्पा 
  • कंदरा – गुफा, गहर, गुहा, खोह
  • कंगाल – गरीब, निर्धन, दरिद्र, अकिंचन, 
  • कपकपी – थरथराहट, थरथरी, प्रकपन

कमल से जुडे कुछ रोचक तथ्य

कमल – कमल हमारा राष्ट्रीय पुष्प है।

कमल – कमल कीचड़ में खिलता है।

पंकज – कमल को पंकज कहते हैं।

नीरज – नीरज एक नाम भी हो सकता है परंतु यहां पर इसका अर्थ कमल पुष्प के ‘संबंध’ से बताया गया है।

कमल के पुष्प को पुष्पों का राजा कहा जाता है। मान्यता यह है कि भगवान विष्णु की नाभि से कमल के फूल का जन्म हुआ था। इस कमल के फूल पर भगवान ब्रह्मा जी विराजमान है।

कमल के पुष्प को ब्रह्मा, लक्ष्मी तथा सरस्वती ने इसे अपना आसन बनाया है।

कमल का फूल इस बात का उदाहरण है कि मनुष्य बुराइयों में रहकर व्यक्ति अपनी मौलिकता तथा श्रेष्ठता बचाय रख सकता है।

बौद्ध धर्म में ललित विस्तार ग्रंथ में कमल को अष्टमंगल माना गया है। इसी के कारण से पूजन आदि जगहों पर कमल के पुष्प की मान्यता है।

पुराणों में माता लक्ष्मी का एक नाम है कमलासना यानी कमल पर विराज करने वाला।

कमल का फूल नकारात्मक शक्तियों को दूर रखता है।

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