कण का पर्यायवाची शब्द | Kad Ka Paryayvachi Shabd Kya Hota Hai

कण का पर्यायवाची शब्द | Kad Ka Paryayvachi Shabd : बराव, बिंदु, अनु, कतरा, जर्रा, छोटा टुकड़ा, अत्यंत छोटा टुकड़ा, छोटा या महीन अंश, अंश या दाना, कणिका, आणु, किनका, परमाणु, कनी, दाना आदि, आज की नई पोस्ट कण का पर्यायवाची शब्द हिंदी में आज इस पोस्ट के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे की कण का पर्यायवाची शब्द तथा साथ ही क से पर्यायवाची शब्द हिंदी में | (Kad Ka Paryayvachi Shabd in Hindi) के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण के माध्यम से इस पोस्ट को पढ़ेंगे।

kad ka paryayvachi Shabd kya hota hai
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पर्यायवाची शब्द किसे कहते हैं?

पर्यायवाची शब्द की परिभाषा : वह शब्द जो एक समान अर्थ (एक दूसरे की तरह अर्थ) रखते हैं। वो शब्द पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं।

चुंकि इनके अर्थ में समानता अवश्य रहती है लेकिन इनका प्रयोग विभिन्न प्रकार से होता है पर्यायवाची शब्दों को उसके गुण व भाव के अनुसार प्रयोग किया जाता है क्योंकि एक ही शब्द या नाम हर स्थान पर उपयुक्त नहीं हो सकता है ‘इच्छा’ शब्द के स्थान पर ‘कामना’ शब्द प्रयोग करना कितना शर्मनाक होगा आपको ऐसे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए जो छोटे व प्रचलित हो।

कण का पर्यायवाची शब्द क्या होता है?

कण का पर्यायवाची शब्दKad Ka Paryayvachi Shabd
राव, बिंदु, अनु, कतरा, जर्रा, छोटा टुकड़ा, अत्यंत छोटा टुकड़ा, छोटा या महीन अंश, अंश या दाना, कणिका, आणु, किनका, परमाणु, कनी, दानाRav, Bindu, Anu, Katra, Jarra, Chhota tukra, atyant Chhota tukra, Chhota yah Mahina ans, ans ya daana, kadika, ado, kinka, premanu, kani, Dana

क से शुरू होने वाले पर्यायवाची शब्द

  • कमल – जलज, पंकज, सरोज, राजीव, अम्भोज, अरविन्द, शतदल, अबुज, नीरज, उत्पल, अब्ज, परिजात, कुबलय, इन्दीवर, पद्म, नलिन, शतपत्र, सरसिज, सरसीरुह, कज, पाथोज, पुण्डरीक, वारिज, सरीसह, कोकनद, तामरस, मकरन्द
  • कपड़ा – वस्त्र, चीर, वसन, अम्बर, पट, दुकूल, चैल, परिधर 
  • कामदेव – मनोभव, मकरध्वज, केतन, मयन, मनोज, मदन, मीन केतु, रतिपति, मनसिज, मन्मथ, पन्चशर, मार, स्मर, कन्दर्प, अनंग, कुसुमशर, पुष्पधन्वा
  • कारागार – जेल, कारावास, कैदखाना, बन्दीगृह
  • कर – शुल्क, महसूल, मालगुजारी 
  • किरण – कर, अशु, मरीचि, मयूख, रश्मि
  • कोयल – कोकिल, पिक, श्यामा, काकपाली,  मदनशलाका, कलघोष, वसन्तदूत
  • कंचन – सोना, स्वर्ण, कनक, सुवर्ण
  • कल्पवृक्ष – पारिजात, हरिचन्दन, कल्पशाल, देववृक्ष, सुरतरु, मन्दार, कल्पतरू, कल्पद्रुम
  • कई – अनेक, कई-एक एकाधिक, नाना, विविध
  • कली – कलिका, अँखुवा, कोपल, मुकुल, कल्पशाल, नवपल्लव, जालक, ताम्रपल्लव,  
  • कण्ठ – ग्रीवा, गला, शिरोधरा
  • कर – हाथ, बाँह, भुज, हस्त, पाणि
  • कल्याण – मंगल, भलाई, क्षेम, वचना 
  • कला – फन, हुनर, कौशल, विद्या
  • कन्या – बालिका, कुमारी, कुँआरि, किशोरी, अविवाहिता, अनूढा, बाला, 
  • कबूतर – परेवा, कपोत, रक्तलोचन, हारीत, पारावृत
  • कटाक्ष – आक्षेप, व्यग्य, छींटाकशी
  • कच्चा – अनपका, कालपूर्व, अपक्व, अपरिपुष्ट, अप्रौढ, 
  • कपड़ा – वस्त्र, चीर, अंबर, पट, परिधान, दसन
  • कथन – कथनी, बयान, मत, विचार, वक्तव्य, 
  • कटु – कडवा, तीखा, कठोर, कडा, तेज, रूखा, रुक्ष, तीक्ष्ण, चरपाए, कर्कश, पेरुष
  • कृष्ण – कन्हैया, श्याम, मोहन, वंशीधर, वासुदेव, मुरलीधर, गोविंन्द, गोपीनाथ, नंदलाल, बनवारी, नंदनदन, • बनमाली, गिरिंधर, हृषीकेश, मुरारी, मुकुन्द, दामोदर, ब्रज वल्लभ, क्षमाधव, क्षीरसायी
  • कृपा – दया, करुणा, अनुग्रह, अनुकम्पा 
  • कंदरा – गुफा, गहर, गुहा, खोह
  • कंगाल – गरीब, निर्धन, दरिद्र, अकिंचन, 
  • कपकपी – थरथराहट, थरथरी, प्रकपन 
  • केला – भानुफल, कदली, रम्भा, मोभा 
  • केश – बाल, लट, कच, अलक, कुन्तल
  • क्रोध – गुस्सा, आक्रोश, प्रकोप , कोप, अमर्ष, रोष, क्षोभ, तैश
  • कब्ज – मलावरोध, मलबद्धता, कोष्ठबद्धता, मलबध, बद्धकोष्ठ
  • कानाफूसी – फुसफुस, खुसर-फुसर, फिसफिस
  • काक – कौआ, काण, काग, करठ, वायस, पिशुन
  • कामुकता – व्यभिचारिता, विषयासक्ति, भोगासक्ति, इन्द्रियलोलुपता, लम्पटता
  • कार्तिकेय – कुमार, स्कंद, षडानन, शरभव, 
  • क्रूर – कठोर, दयाहीन, निर्दयी, निर्दय, 
  • कुबेर – धनेश्वर, धनपति, धनपाल, धनेश, धनद, यक्षराज, धनाधिप, राजराज, किन्नरेश, अलंकेश, नृपराज, अधिपति
  • कुत्सित – नीच, बुरा, खराब, अधम, निकृष्ट, घृणित, लम्पट, गर्हित, हेय
  • कूटनीति – छलबल, दाँव-पेंच, घात, कूटयुक्ति, चाल 
  • कुत्ता – कुक्कुर, श्वान, शुनक, सारमेय, श्वा
  • कृतज्ञ – एहसानमन्द, आभारी, ऋणी, उपकृत, अनुगृहीत, कृतार्थ

कण से जुडे कुछ रोचक तथ्य

Kad Ka Paryayvachi Shabd

कण – कान को श्रवणो संतुलन अंग भी कहते हैं। हमारे सिर के नेत्रों के पीछे दो कान होते हैं। कान के दो कार्य होते हैं। एक तो सुनना और दूसरा शरीर का संतुलन मतलब की ये सुनने के साथ-साथ शरीर का संतुलन भी बनाए रखते हैं। इसलिए इन्हें श्रवणो संतुलन इंद्रियां भी कहते हैं।

मनुष्य के कान के प्रमुख तीन भाग होते हैं- 

1.बाह्य कर्ण  2.मध्य कर्ण  3.अन्तः कर्ण

कर्ण मानव जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हमारे कर्ण संवेदनशील अंग होते हैं। कान हमें हर तरह की ध्वनि को पहचानने में मदद करते हैं। हमारे भीतर कान की संरचना गुफानुमा होती है। हमारे कान में एक चिकना पदार्थ स्रावित होता है। वह इकट्ठा होकर कान में मोम बनाता है। मोम कान में धूल व अन्य कणों को इकट्ठा करने में सहायता करता है। 

हमारे कान में हे सबसे छोटी हड्डी पाई जाती है जिसे स्टेपीज नाम से जाना जाता है।

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