जीवन का पर्यायवाची शब्द | Jivan Ka Paryayvachi Shabd Kya Hota Hai

जीवन का पर्यायवाची शब्द | Jivan Ka Paryayvachi Shabd : जीवनकाल, उम्र, वायु, हयात, जिंदगी, पुत्र, जिंदगानी, अमृत, जान, जीविका, जल आदि, आज की नई पोस्ट जीवन का पर्यायवाची शब्द हिंदी में आज इस पोस्ट के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे की जीवन का पर्यायवाची शब्द तथा साथ ही ज से पर्यायवाची शब्द हिंदी में | ( Jivan Ka Paryayvachi Shabd in Hindi) के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण के माध्यम से इस पोस्ट को पढ़ेंगे।

पर्यायवाची शब्द किसे कहते हैं?

पर्यायवाची शब्द की परिभाषा : वह शब्द जो एक समान अर्थ (एक दूसरे की तरह अर्थ) रखते हैं। वो शब्द पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं।

चुंकि इनके अर्थ में समानता अवश्य रहती है लेकिन इनका प्रयोग विभिन्न प्रकार से होता है पर्यायवाची शब्दों को उसके गुण व भाव के अनुसार प्रयोग किया जाता है क्योंकि एक ही शब्द या नाम हर स्थान पर उपयुक्त नहीं हो सकता है ‘इच्छा’ शब्द के स्थान पर ‘कामना’ शब्द प्रयोग करना कितना शर्मनाक होगा आपको ऐसे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए जो छोटे व प्रचलित हो।

Jivan ka paryayvachi Shabd kya hota hai
Jivan ka paryayvachi Shabd kya hota hai

जीवन का पर्यायवाची शब्द क्या होता है?

जीवन का पर्यायवाची शब्दJivan Ka Paryayvachi Shabd
जीवनकाल, उम्र, वायु, हयात, जिंदगी, पुत्र, जिंदगानी, अमृत, जान, जीविका, जलJivankal, umra, wayu, Hayat, jindagi, Putra, jindgani, Amrit, Jaan, jivika, jal

 से शुरू होने वाले पर्यायवाची शब्द

  • जल – पानी, नीर, जीवन, पय, तोय, अमृत, वारि, सलिल, अम्बु, आब, उदक, धनरस, सारंग, वन, विष, शम्बर, सर्वमुख 
  • जीभ – जिह्वा, चञ्चला, रसज्ञा, रसना, 
  • जगत् – दुनिया, विश्व, संसार, जग, लोक, मृत्युलोक, भव, भुवन, 
  • जमुना – यमुना, तरणिजा, सूर्यसुता, सूर्यतनया, रवितनया, रविनन्दनी, कालिन्दी, अक्रजा, कृष्णा
  • जंग – लड़ाई, युद्ध, संग्राम, रण, समर, 
  • जंगल – वन, विपिन, कानन, अरण्य, कान्तार, अटवी
  • जानकी – सीता, जनकसुता, जनकतनया, वैदेही, जनकात्मजा
  • झरना – जलप्रपात, स्रोत, प्रपात, निर्झर, उत्स, प्रस्रवण, 
  • झण्डा – ध्वजा, निशान, पताका, केतु

जीवन से जुडे कुछ रोचक तथ्य

Jivan Ka Paryayvachi Shabd

जीवन – हमारे जन्म से मृत्यु के बीच की अवधि जीवन कहलाती है हमारा जीवन ईश्वर की देन है। हर स्थिति और परिस्थिति में आगे बढ़ते रहना जीवन है। आप कभी जीतते हो आप कभी हारते हो यही जीवन है।

मनुष्य का जीवन एक प्रकार का खेल है। मनुष्य उस खेल का मुख्य खिलाड़ी होता है। मनुष्य को यह खेल हर हालत में खेलना ही पड़ता है और मनुष्य सबसे बड़ा मित्र या दुश्मन विचार ही होता है।

जीवन एक दर्पण की तरह होता है हमें अच्छे तब दिखती हैं। जब हम इसे मुस्कुराते हुए देखते हैं। यह एक नदी की तरह होता है। जिसमें हम मनुष्यों में बैठे रहते हैं।

अपने जीवन को एक प्रश्न बनाइए कठिनाइयां होंगे परेशानी होंगी लेकिन इस प्रश्न की बेचैनी बड़ी सार्थक है अगर यह प्रश्न कर दें तो हम बहुत शीघ्र जीवन के द्वार पर पहुंच जाते हैं।

जीवन एक संग्राम है जिससे हमें लडना भी पड़ता है और जीवन एक तालाब है जिससे कलाकार थोड़ी ही सामग्री में वस्तु को सुंदर और स्वादिष्ट बना देता है। वैसे ही जीवन को थोड़ी सी ही सामग्री से जीवन सुंदर सफल बना देता है।

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