इंद्र पर्यायवाची शब्द | Indra ka aryayvachi Shabd Kya Hota Hai

इंद्र का पर्यायवाची शब्द | Indra Ka Paryayvachi Shabd : सुरपति, मधवा, पुरंदर, देवराज, सुरेंद्र, शचीपति, शक, कौशिक, मेघपति, सुरेश, महेंद्र, पाकरिपु, पूरहुत, पाकशासन आदि, आज की नई पोस्ट इंद्र का पर्यायवाची शब्द हिंदी में आज इस पोस्ट के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे की इंद्र का पर्यायवाची शब्द तथा साथ ही इ से पर्यायवाची शब्द हिंदी में | ( Indra Ka Paryayvachi Shabd in Hindi) के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण के माध्यम से इस पोस्ट को पढ़ेंगे।

Indra ka paryayvachi Shabd kya hota hai
Indra ka paryayvachi Shabd kya hota hai

पर्यायवाची शब्द किसे कहते हैं?

पर्यायवाची शब्द की परिभाषा : वह शब्द जो एक समान अर्थ (एक दूसरे की तरह अर्थ) रखते हैं। वो शब्द पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं।

चुंकि इनके अर्थ में समानता अवश्य रहती है लेकिन इनका प्रयोग विभिन्न प्रकार से होता है पर्यायवाची शब्दों को उसके गुण व भाव के अनुसार प्रयोग किया जाता है क्योंकि एक ही शब्द या नाम हर स्थान पर उपयुक्त नहीं हो सकता है ‘इच्छा’ शब्द के स्थान पर ‘कामना’ शब्द प्रयोग करना कितना शर्मनाक होगा आपको ऐसे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए जो छोटे व प्रचलित हो।

इंद्र का पर्यायवाची शब्द क्या होता है?

इंद्र का पर्यायवाची शब्दIndra Ka Paryayvachi Shabd
सुरपति, मधवा, पुरंदर, देवराज, सुरेंद्र, शचीपति, शक, कौशिक, मेघपति, सुरेश, महेंद्र, पाकरिपु, पूरहुत, पाकशासनSurpati, Madhav, purandar, Devraj, Surendra, sachipati, Kaushik, Meghapati, Suresh, Mahendra, pakripu, purhut, pakshasan

 से शुरू होने वाले पर्यायवाची शब्द

  • इन्द्र – देवराज, मेघपति, सुरपति, अमरपति, सुरेन्द्र, सुरेश, शचीपति, मधवा, शक, पुरन्दर, कौशिक,मर्जी, स्पृहा, लिप्सा, सहस्राक्ष, जिष्णु, पुरहुत, बिबुधेश, वजधर
  • इन्द्राणी – इन्द्रवधू, इन्द्रा, मद्यावानी, शतावरी, शची, पुलोमजा, पोलोमी 
  • इन्द्रधनुष – इन्द्रधनु, धनुक, सप्तकर्ण धनु, सुरचाप, शक्रचाप
  • इठलाना – इतराना, शेखी मारना, ऐंठना, शान दिखाना
  • इशारा – इंगित,संकेत, निर्देश, सैन
  • इच्छुक – उत्सुक, लालायित,अभिलाषी, आतुर, उत्कंठित
  • इन्कार – अस्वीकृति, निषेध, प्रत्याख्यान, अवंगीकार, अवगीकरण
  • इन्द्रपुरी- इन्द्रलोक, देवलोक, देवेन्द्रपुरी, सुरपुर, अमरावती, 
  • इनाम- पुरस्कार, उपहार, पारितोषिक

• इच्छा – चाह, लालसा, कामना, आकांक्षा, रुचि, अभिलाषा, उत्कंठा, वाञ्छा, तृष्णा, मनोरथ

इंद्र से जुडे कुछ रोचक तथ्य

Indra Ka Paryayvachi Shabd

इंद्र – इंद्र को देवताओं का राजा माना जाता है। इंद्र धरती पर वर्षा करते हैं और स्वर्ग पर शासन करते हैं।

इंद्र के पिता ऋषि कश्यप हैं तथा इनकी माता आदिति हैं तथा इनकी पत्नी शची हैं और अग्नि पोष्ण इंद्र भगवान के भाई हैं।

इंद्रदेव सर्वाधिक शक्तिमान है। इसलिए उन्हें संपूर्ण जगत का एकमात्र शासक और नियंता मानते हैं। इंद्र को उग्र स्वभाव का माना जाता है इसलिए उन्होंने अनेक देवताओं से युद्ध किया था।

ऐसा माना जाता था कि इंद्र पद पर जो भी बैठता था। उसे अपना सिंहासन छिन जाने का डर बना रहता था। इसलिए वह किसी भी राजा और साधु को अपने से ज्यादा शक्तिशाली नहीं बनने देता था। इसलिए वह कई तपस्वियों को अप्सराओं से मोहित कर पद भ्रष्ट कर देता और राजाओं के यज्ञ के घोड़े चुरा लेता था।

पौराणिक समय में धरती लोक पर एक ऋषि गौतम हुआ करते थे। वह बहुत ही ज्ञानी थे। वह अपनी पत्नी के साथ कुटिया में रहा करते थे। उनकी पत्नी का नाम अहिल्या था। वह बहुत ही सुंदर थी। एक दिन ऋषि गौतम सुबह स्नान करने जाते हैं। और इन्द्र गौतम ऋषि का वेश धारण कर अहिल्या के पास आते हैं। अहिल्या मन ही मन सोचती है कि मेरे स्वामी इतनी जल्दी स्नान करके कैसे आ गए पर वह उनसे कोई सवाल नहीं करती है। कुछ देर बाद जब ऋषि गौतम कुटिया में आए तो उन्होंने अहिल्या को बहरूपिया के साथ देखा। वह इंद्र को देखकर तुरंत पहचान गए। इंद्र को श्राप दे दिया देवी अहिल्या के बार-बार कहने से कि मेरा इसमें कोई कसूर नहीं है लेकिन ऋषि ने उनको भी श्राप दे दिया कि तुम सिला बनकर यहां निवास निवास करोगी। त्रेता युग में जब भगवान विष्णु राम का अवतार लेंगे तब उनके चरण स्पर्श से तुम्हारा उद्धार होगा।

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