हिंदी वर्णमाला (स्वर और व्यंजन) Hindi Varnamala

नमस्ते दोस्तों मैं आप सभी लोगों का स्वागत करता हूं मैं Studyroot.in की तरफ से आज हम आपको हिंदी वर्णमाला किसे कहते हैं (Hindi Varnamala Kise Kahate Hain) के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर आएंगे हम पहले देखेंगे कि Hindi Varnamala ke ke kitne bhed hote Hain और हम हिंदी वर्णमाला के सभी भेदों को पढ़ने के साथ Hindi Varnamala kise kahate Hain in Hindi Grammar यह पोस्ट क्लास 10 व 12 के छात्रों के लिए यह कहें 1 से लेकर 12 के सभी छात्रों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। मैंने इस को इस प्रकार लिखा है कि आप हिंदी वर्णमाला के बारे में अधिकतम जानकारी प्राप्त कर सकें जिससे आपको दूसरी कोई पोस्ट पढ़ने की कोई जरूरत ना पढ़े।

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Table of Contents

हिंदी वर्णमाला की परिभाषा | Hindi Varnamala Ki Paribhasha

वर्णों के समूह या समुदाय को वर्णमाला कहते हैं। 

हिंदी में वर्णों की संख्या 45 है।

अक्षर किसे कहते हैं | Akshar Kise Kahate Hain

  • वर्ण का दूसरा नाम अक्षर है। 

• अक्षर शब्द का अर्थ होता है। : अनाशवान

अतः वर्ण अखंड मूल ध्वनि का नाम है वह किसी शब्द का वह खंड है जिसे खंड-खंड नहीं किया जा सकता है।

जिसका विभाजन नहीं किया जा सकता है प्रत्येक वर्ण की ध्वनि अपना एक विशेष आकार रखती है जिसे वर्ण कहते हैं प्रत्येक भाषा में कई वर्ण होते हैं हिंदी भाषा की वर्णमाला में 52 शब्द है।

वर्ण के दो अंग हैं 1. स्वर, 2. व्यंजन

हिंदी वर्णमाला चार्ट | Hindi Varnamala Chart

स्वर : अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ
व्यंजन : क, ख, ग, घ, ङ (क़, ख़, ग़)
च, छ, ज, झ, ञ
ट, ठ, ड, ढ, ण (ड़, ढ़)
त, थ, द, ध, न
प, फ, ब, भ, म, (फ़)
य, र, ल, व
श, ष, स, ह
संयुक्त व्यंजन : क्ष, त्र, ज्ञ, श्र
अनुस्वार या चंद्रबिंदु : अं (ं) या अँ (ँ)
विसर्ग : अः या (:)
द्विगुण व्यंजन व्यंजन : ड़ ढ़
  1. भाषा की सबसे छोटी इकाई : वर्ण
  2. अर्थ के आधार पर सबसे छोटी इकाई : शब्द
  3. अर्थ के आधार पर भाषा की इकाई : शब्द, वाक्य
  4. भव्य या भावार्थ के आधार पर इकाई : वाक्य
  5. भाषा का सबसे बड़ा अंग: वाक्य

हिंदी वर्णमाला स्वर किसे कहते हैं?

वे वर्ण जिनके उच्चारण के लिए किसी दूसरे वर्ण की सहायता की आवश्यकता नहीं होती, स्वर कहलाते हैं। हिंदी वर्णमाला में स्वरों की संख्या 11 है।

स्वर : अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ

  • अयोगवाह ध्वनियां (स्वर) : अं, अ:
  • विसर्ग : अः
  • अनुस्वार : अं

हिंदी वर्णमाला में स्वर के कितने भेद होते हैं?

स्वरों के प्रकार : हिंदी वर्णमाला में स्वरूप को तीन प्रकार से विभाजित किया गया है जो इस प्रकार है।

  1. हास्य स्वर
  2. दीर्घ स्वर
  3. प्लुत स्वर

1. हास्य स्वर, लघु स्वर, छोटा एकमात्रिक या मूल स्वर

उपर्युक्त लिखित स्वर एक ही हैं, परंतु नाम इनका भिन्न-भिन्न है।

निम्नलिखित यह चार प्रकार के होते हैं।

अ, इ, उ, ऋ

2. दीर्घ स्वर, गुरु स्वर, बड़ा स्वर, संधि स्वर

उपर्युक्त लिखित शब्द एक ही है परंतु उनका नाम भिन्न-भिन्न है।

मुख्यतः यह सात प्रकार के होते हैं।

आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ

संयुक्त स्वर : ए, ऐ, ओ, औ 

वे स्वर जो विजातीय होते हैं। मुंह के अलग-अलग स्थानो से उच्चारित होते हैं क्योंकि ये स्वर विभाजित स्वरों से मिलकर बने होते हैं।

प्लुत स्वर

प्लुत स्वर : वे स्वर जिनके उच्चारण में हास्य स्वर या दीर्घ स्वर्ग से भी अधिक समय लगता है तभी इनको प्लुत स्वर कहते हैं।

किसी व्यक्ति को पुकारने, जो दूर खड़ा हो और नाटक के संवाद में इसका प्रयोग अधिक होता है।

जैसे : राऽऽऽम, ओऽऽऽम, पटाखे की आवाज भी

  • प्लुत स्वरों की संख्या 8 होती है : अ + 7 (दीर्घ स्वर)
  • मूल भाषा में प्लुत स्वरों की संख्या 9 होती है + (ऋ)

ओष्ठ आकृति के आधार पर स्वरों की संख्या

  1. वृत्ताकार 
  2. अवृत्ताकार या आवृत्तमुखी

वृत्ताकार : वे स्वर जिनके उच्चारण या बोलने में ओष्ठ की आकृति गोल या वृत्ताकार हो जाती है। उन्हें वृत्ताकार स्वर कहते हैं। वृत्ताकार स्वरों की संख्या चार होती है।  उ, ऊ, ओ, औ

अवृत्ताकार : वे हिंदी वर्ण जिनको बोलने में ओष्ठ आकृति वृत्ताकार न बने उसे अवृत्ताकार स्वर कहते हैं। इनकी संख्या सात होती है। अ, आ, इ, ई, ए, ऐ, ऋ

: इसे विदेशी स्वर, आगत स्वर, मेहमान स्वर, गृहीत स्वर या अर्धचंद्र बिंदु भी कहते हैं।

इसे बनने वाले शब्द विदेशी होते हैं आगत स्वर (ऑ) वृत्ताकार होता है।

जीभ की क्रियाशीलता के आधार पर स्वर

जीव की क्रियाशीलता के आधार पर निम्नलिखित तीन प्रकार के स्वर होते हैं।

  1. अग्र स्वर 
  2. मध्य स्वर 
  3. पश्च स्वर

अग्र स्वर

वे वर्ण जिनके बोलते समय मुंह का अग्र भाग क्रियाशील होता है उसे अग्र स्वर कहते हैं ये निम्नलिखित पांच होते हैं।

अग्र स्वर : इ, ई, ए, ऐ, ऋ

मध्य स्वर

वे वर्ण जिनके बोलते समय मुंह का मध्य भाग क्रियाशील होता है उसे मध्य स्वर कहते हैं। यह निम्नलिखित एक ही होता है।

मध्य स्वर : अ 

पश्च स्वर

वे वर्ण जिनके उच्चारण के समय मुंह का पश्च भाग क्रियाशील होता है उसे पश्च स्वर कहते हैं। यह निम्नलिखित पांच होते हैं।

पश्च स्वर : आ, उ, ऊ, ओ, औ

Trick : 

जिसे लिखते समय हमें (3) तीन की आकृति से शुरुआत करनी पड़े वे सब पश्च स्वर होते हैं। अर्थात उसे तीसरे नंबर पर लिखते हैं।

तालु की स्थिति के आधार पर स्वरों के प्रकार

तालु की स्थिति के आधार पर स्वरों के निम्नलिखित चार प्रकार होते हैं।

  1. संवृत स्वर (बंद स्वर)
  2. अर्द्ध संवृत स्वर
  3. विवृत स्वर (खुला)
  4. अर्द्ध विवृत स्वर

संवृत स्वर (बंद स्वर)

वे स्वर जिनको बोलने या उच्चारण के समय मुंह पूर्ण रूप से बंद हो जाता है। तो उसे संवृत स्वर कहते हैं संवृत स्वरों की संख्या 5 होती है।

इ, ई, उ, ऊ, ऋ

अर्द्धसंवृत स्वर

वे स्वर जिनके उच्चारण या बोलते समय मुंह पूर्ण रूप से बंद ना हो, तो उसे अर्द्धसंवृत स्वर कहते हैं। इनकी संख्या दो होती है। 

ए, ओ

विवृत स्वर (खुला)

वे वर्ण जिनके उच्चारण के समय मुंह पुरा का पूरा खुल जाता है तो उसे विवृत स्वर कहते हैं। 

विवृत स्वरों की संख्या एक होती है। :

अर्द्ध विवृत स्वर

वे वर्ण जिनके उच्चारण के समय मुंह पूर्ण रूप से खुला हो तो उसे अर्द्ध विवृत स्वर कहते हैं। अर्द्ध विवृत स्वरों की संख्या तीन होती है। : अ, ऐ, औ

अनुनासिकता के आधार पर

अनुनासिकता के आधार पर दो प्रकार होते हैं।

अं  : अनुस्वार

आँ : अनुनासिक, चंद्रबिंदु

यदि किसी स्वर के ऊपर चंद्रबिंदु लगा दी जाए तो उसे अनुनासिक स्वर कहा जाएगा नहीं तो निरनुनासिक स्वर कहते हैं।

अनुस्वार (अं) तत्सम होता है। अनुनासिक (आँ) तद्भव होता है।

हिंदी वर्णमाला में व्यंजन | Hindi Varnamala Vyanjan

जिन वर्णों का उच्चारण स्वरों की सहायता के बिना नहीं हो पाता वे व्यंजन वर्ण है।

प्रत्येक व्यंजन “अ” से मिलकर पूर्णत: उच्चरित होता है उनमें से “” को निकाल देने से उनका रूप हलन्त के साथ हो जाता है।

हिंदी वर्णमाला में व्यंजनों की संख्या 33 होती है।

हिंदी वर्णमाला व्यंजन चार्ट

 

क वर्ग :क, ख, ग, घ, ङ
च वर्ग :च, छ, ज, झ, ञ
ट वर्ग :ट, ठ, ड, ढ, ण
त वर्ग : त, थ, द, ध, न
प वर्ग :प, फ, ब, भ, म
अंतस्थ व्यंजन :य, र, ल, व
उष्म व्यंजन :श, ष, स, ह

व्यंजन के तीन प्रकार होते हैं।

1. अध्ययन हेतु व्यंजनों का वर्गीकरण

अध्ययन हेतु व्यंजनों का वर्गीकरण निम्नलिखित तीन प्रकार से किया गया है।

  • स्पर्शी व्यंजन
  • अंतस्थ व्यंजन
  • उष्म व्यंजन

स्पर्शी व्यंजन : स्पर्शी व्यंजनों की संख्या 25 होती है यह हिंदी वर्णमाला के से तक होते हैं।

अंतस्थ व्यंजन : अंतस्थ व्यंजनों की संख्या चार होती है (य, र, ल, व )

य और व दो अर्धस्वर भी कहलाने हैं।

उष्म व्यंजन : इनकी संख्या निम्नलिखित रूप से चार होती है जो इस प्रकार हैं 

श, ष, स, ह (उष्म व्यंजन)

2. घोष या कंपन के आधार पर व्यंजनों का वर्गीकरण

अघोष : प्रत्येक वर्ग का प्रथम और द्वितीय वर्ण और ((श ष स)) अघोष व्यंजन कहलाने हैं

अघोष वर्णों की संख्या 13 होती है।


सघोष या घोष : प्रत्येक वर्ग का तीसरा, चौथा और पांचवा (3/4/5) वर्ण तथा य, र, ल, व, ह और सभी स्वर भी सघोष होते हैं इनकी संख्या कुल 31 होती है।

प्राणवायु या मुंह से बाहर निकलने वाली वायु

अल्पप्राण : प्रत्येक वर्ग का पहले तीसरा व पांचवा (1/3/5) वर्ण + य र ल व (अंतस्थ व्यंजन) + सभी स्वर अल्प प्राण होते हैं अल्प्राण वर्ण की कुल मिलाकर संख्या 30 होती है।

महाप्राण : प्रत्येक वर्ग का दूसरा, चौथा (2/4) वर्ण + श, ष, स, ह (उष्म व्यंजन) महाप्राण होते हैं।

महाप्राण वर्ण की कुल संख्या 14 होती है।

3. उच्चारण के आधार पर

  • स्पर्शी
  • संघर्षी 
  • स्पर्श संघर्षी 
  • नासिक्य 
  • संघर्षहीन
  • प्रकंपित
  • पार्श्विक
  • ताड़नजात

निष्कर्ष

दोस्तों आज की पोस्ट Hindi Varnamala kise kahate Hain मैं उम्मीद करता हूं कि यह पोस्ट आपको पसंद आई होगी मैंने Hindi Varnamala in Hindi को सरलता के साथ समझाने की पूर्ण कोशिश की है। अगर कोई जानकारी Hindi Varnamala kise kahate Hain और Hindi Varnamala ke kitne bhed hote Hain in Hindi या अन्य किसी प्रकार की पोस्ट में हमसे कुछ छूट गया। हो तो आप नीचे कमेंट कर हमें सूचित कर सकते हैं। और हम आपके लिए आगे किस विषय पर जानकारी दें यह भी सुझाव जरूर बताएं आप आपके कमेंट का इंतजार रहेगा।

 

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