Hasya Ras : हास्य रस किसे कहते हैं परिभाषा, उदाहरण सहित | Hasya Ras Kise Kahate Hain

स्वागत है दोस्तों आज की नई पोस्ट हास्य रस (Hasya Ras) में आज इस पोस्ट के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे की हास्य रस किसे कहते हैं (Hasya Ras Kise Kahate Hain) तथा सा ही हास्य रस के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण के माध्यम से इस पोस्ट को पढ़ेंगे। 

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Hasya Ras Paribhasha udaharan Bhav

रस की परिभाषा | Ras Ki Paribhasha

काव्य, कथा, नाटक, उपन्यास आदि के पढ़ने सुनने या उसका अभिनय देखने से जो आनंद की प्राप्त होती है उसे रस कहते हैं।

  • रस का अर्थ है – आनंद

हास्य रस की परिभाषा | Hasya Ras Ki Paribhasha

विकृत वेशभूषा, क्रियाकलाप, चेष्टा या वाणी देख-सुनकर मन में जो विनोदजन्य उल्लास उत्पन्न होता है उसे हास्य रस कहते हैं।

हास्य रस का स्थाई भावहास” होता है।

भरतमुनि ने हास्य रस के 8 पदों का उल्लेख किया है जो निम्नलिखित हैं। स्मित, हसित, विहसित, उपहसित, अवहसित,अतिहसित, आमरथ, परस्थ

 

हास्य रस के भाव | Hasya Ras Ke Bhav

रसहास्य रस
अनुभावहंसना, ठहाके लगाना
विभावविकृत व्यक्ति, विचित्र वेशभूषा, हावभाव
संचारी भावहर्ष, चपला, उत्सुकता

 

हास्य रस के उदाहरण | Hasya Ras Ke Udaharan

नाना वाहन नाना वेषा।
बिहसे शिव समाज निज देखा।।
हाथी जैसी देंह, गैंडे जैसी खाल।
तरबूजे सी खोपड़ी, खरबूजे से गाल।।
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर
रसगुल्लो से भर दो गागर
मम्मी हसैं न पीटे फादर
शीश पर गंगा हंसै भुजनि भुजंगा हंसै।
हास ही, को दंगा भयो नंगा के विवाह में।।
सिक्के यूं मत फेंकिए, प्रभु पर हे जजमान।
सौ का नोट चढ़ाइए, तब होगा कल्याण।।
बंदर ने कहा बंदरिया से चलो नहाए गंगा।
बच्चों को छोड़ो घर में होने दो हुड़दंगा।।
बहुएं सेवा सास की, करती नहीं खराब।
पैर दाबने की जगह, गला रही है दाब।।
अगर संतरे को सभी कहते हैं पुल्लिंग।
तो बेचारा संतरी होगा स्त्रीलिंग।।
विंद्य्य के वासी उदासी तयोव्रत धारी महाबिनु नारि दुखारे।
गौतम तीथतरी तुलसी सो कथा सुनि भे मुनिवृंद सुखारे।।
पति पत्नी में हुआ झगड़ा।
मारा बेलन पति हुआ लंगड़ा।।
ठंडा बिल्कुल व्यर्थ है, जैसे ठंडा सूप।
जुबां जले उबला पिए, ऐसा तेरा रूप।।
फल, गुड, मेवा, दूध, घी गए गटक भगवान।
फौरन पत्थर हो गए, मांगा जब वरदान।।
बुरे समय को देखकर गंजे तू क्यों रोय।
किसी भी हालत में तेरा बाल न बांका होय।।
जोहि दिसि बैठे नारद फूली।
सो दिसि तेहि न विलोकी भूली।।
पुनि-पुनि मुनि उकसहिं अकुलाही।
देखि दशा हरिगन मुसकाही।।

 

निष्कर्ष

छात्रों मैं उम्मीद करता हूं कि आपको आज की यह पोस्ट हास्य रस किसे कहते हैं (Hasya Ras Kise Kehte Hain) आपको पसंद आई होगी मैं इस पोस्ट को हास्य रस को कुछ उदाहरण (Hasya Ras Ke Udaharan) के माध्यम से समझने की संपूर्ण कोशिश की है जिससे आपको हास्य रस आसानी से समझ में आ जाए।

यदि आपको हास्य रस या इस पोस्ट से किसी प्रकार का कोई शिकायत है या आपको हास्य रस (Hasya Ras) से संबंधित कोई सुझाव देना है तो आप हमें कमेंट सेक्शन या फिर ईमेल के माध्यम से सूचित कर सकते हैं मैं आपके इस सवाल का जवाब जल्द से जल्द देने का प्रयास करूंगा आपके बहुमूल्य विचारों का इंतजार रहेगा।

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