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गणेश का पर्यायवाची शब्द | Ganesh Ka paryayvachi Shabd Kya Hota hai

गणेश का पर्यायवाची शब्द | Ganesh Ka Paryayvachi Shabd : विनायक, द्वयमातुर, गजबदन, भवानी नंदन, एकदंत, हेरम्ब, महाकाय, गिरिजा नंदन, गजानन, गणपति, विघ्न विनायक, मूषकवाहन, गणधि, लंबोदर, गौरीसुत, मोदकप्रिय, गौरीनंदन, शंकरसुवन, गणनायक, विघृराज, मोददाता आदि, आज की नई पोस्ट गणेश का पर्यायवाची शब्द हिंदी में आज इस पोस्ट के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे की गणेश का पर्यायवाची शब्द तथा साथ ही ग से पर्यायवाची शब्द हिंदी में | (Ganesh Ka Paryayvachi Shabd in Hindi) के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण के माध्यम से इस पोस्ट को पढ़ेंगे।

Ganesh ka paryayvachi Shabd kya hota hai.png
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पर्यायवाची शब्द किसे कहते हैं?

पर्यायवाची शब्द की परिभाषा : वह शब्द जो एक समान अर्थ (एक दूसरे की तरह अर्थ) रखते हैं। वो शब्द पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं।

चुंकि इनके अर्थ में समानता अवश्य रहती है लेकिन इनका प्रयोग विभिन्न प्रकार से होता है पर्यायवाची शब्दों को उसके गुण व भाव के अनुसार प्रयोग किया जाता है क्योंकि एक ही शब्द या नाम हर स्थान पर उपयुक्त नहीं हो सकता है ‘इच्छा’ शब्द के स्थान पर ‘कामना’ शब्द प्रयोग करना कितना शर्मनाक होगा आपको ऐसे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए जो छोटे व प्रचलित हो।

गणेश का पर्यायवाची शब्द क्या होता है?

गणेश का पर्यायवाची शब्दGanesh Ka Paryayvachi Shabd
विनायक, द्वयमातुर, गजबदन, भवानी नंदन, एकदंत, हेरम्ब, महाकाय, गिरिजा नंदन, गजानन, गणपति, विघ्न विनायक, मूषकवाहन, गणधि, लंबोदर, गौरीसुत, मोदकप्रिय, गौरीनंदन, शंकरसुवन, गणनायक, विघृराज, मोददाताVinayak, DavyMadhur, Gaz Badan, Bhawani, Nandan, Ekdant, Heramb, Mahakay, Girija Nandan, Gajanan, Ganpati, Vighna Vinayak, Mushak Vahan, Gandhi, Lambodar, Gaurisuta, Modakpriya, Gaurinandan, Shankar Suvan, Gananayak, Vignaraj, Modakdata

से शुरू होने वाले पर्यायवाची शब्द

गणेश से जुडे कुछ रोचक तथ्य

गणेश– किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है।

गजबदन– गणेश भगवान का सिर हाथी का था इसलिए इनको गजबदन कहते हैं।

एकदंत– गणेश भगवान का एक दांत होने के कारण इनका नाम एकदंत पड़ गया।

मूषकवाहन– भगवान गणेश जी मूषक (चूहे) की सवारी (आसन) है इसी के कारण इनको मूषक वाहन कहते हैं।

भगवान श्री गणेश के 2 पुत्र हैं। इनके नाम क्षेत्र तथा लाभ है।

महाभारत का लेखन भगवान श्री गणेश जी ने किया था। लेकिन महाभारत लिखने से पहले उन्होंने महाऋषि वेद व्यास जी से एक शर्त रखी थी कि जब मैं लिखने लगूं तब मेरी कलम एक भी क्षण न रूके तभी श्री वेद व्यास जी ने भी एक शर्त रखी और कहां बिना समझे कुछ मत लिखना।

बीच-बीच में वेद व्यास जी कुछ ऐसे श्लोक बोलते थे जिनको समझने में श्री गणेश जी को थोड़ा समय लगता था। तब तक वह अन्य कार्य को कर लेते थे।

मोदक प्रिय- जिन को सबसे अधिक मोदक प्रिय है वह गणेश भगवान।

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