Bhayanak Ras : भयानक रस की परिभाषा, उदाहरण व स्थाई भाव सहित | Bhayanak Ras Kise Kahate Hain

स्वागत है दोस्तों आज की नई पोस्ट भयानक रस (Bhayanak Ras) में आज इस पोस्ट के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे की भयानक रस किसे कहते हैं (Bhayanak Ras Kise Kahate Hain) तथा सा ही भयानक रस के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण के माध्यम से इस पोस्ट को पढ़ेंगे। 

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Bhayanak Ras Paribhasha Udaharan Sthayi Bhav

रस किसे कहते हैं | Ras Kise Kahate Hain

काव्यकथानाटकउपन्यास आदि के पढ़ने, सुनने या उसका अभिनय देखने से जो आनंद की प्राप्त होती है उसे रस कहते हैं।

 

भयानक रस की परिभाषा | Bhayanak Ras Ki Paribhasha

भयानक वस्तु, व्यक्ति या घटना देखने सुनने अथवा प्रबल शत्रु के विद्रोह आदि से भय का संचार होता है।

यही “भय” स्थायी भाव जब विभाव, अनुभाव और संचारी भावों में परिपुष्ट होकर आस्वाद् हो जाता है तो वहां भयानक रस होता है।

या

भय नामक स्थाई भाव विभाव अनुभाव तथा संचारी भाव से जिस भाव की उत्पत्ति होती है। उसे भयानक रस कहते हैं।

भयानक रस के भाव स्पष्टीकरण | Bhayanak Ras Ke Bhav

रसभयानक रस
स्थायी भावभय
आलंबनभयानक वस्तु या व्यक्ति
उद्दीपनभयानक दृश्य, भयानक आवाज आदि
अनुभावचिंता, पसीना आना, मूर्छा, बेहोश होना, कांपना
संचारी भावचिंता, सम्मोह, त्रास

भयानक रस के उदाहरण | Bhayanak Ras Ke Udaharan

ऊंची काली दीवारों के घेरे में डाकू, चारों बटमारों के डेरे में,
जीने को देत नहीं पेट भर खाना, मरने भी देते नहीं तड़प रह जाना।
अखिल यौवन के रंग उभार, हड्डियों के हिलाते कंकाल।
कचो के चिकने काले, व्याल केंचुली का सिबार।।
सिंग्घाड़ भगा भय से हाथी, लेकर अंकुश पिलवान गिरा।
झटका लग गया, फटी झालर हौदा गिर गया निशान गिरा।
हय-रुण्ड गिरे गज-मुण्ड गिरे, कट-कट अवनी पर शुण्ड गिरे।
लड़ते-लड़ते अरि झुण्ड गिरे, भू पर हय विकल बितुण्ड गिरे।
कोई नत-मुख्य बेजान गिरा, करवट कोई उत्तान गिरा।
रण-बीच अमित भीषणता से, लड़ते-लड़ते बलवान गिरा।।
लंका की सेना तो कपि के गर्जन रव से कांप गयी।
हनुमान के भीषण-दर्शन से विनाश ही भांप गई।।
उधर गरजती सिंधु लहरिया कुटिल काल की जालो सी।
चली आ रही, फैन उगलती फन फैलाए व्यालों सी।।
एक ओर अजगरहिं लम्बी, एक और मृगराय।
बिकल बटोही बीच ही पर्यों मूर्छा खाए।।
नभ ते झटपट बाज लखि, भूल्यो संकट प्रपंच।
कंपित तन व्याकुल नयन, लावक हिल्यो न रंच।
अब कै राखि लेहु भगवान।
हौं अनाथ बैठ्यो द्रुम डरिया
हाहाकार हुआ कंदन में, कठिन ब्रज होते थे चूर।
हुये दिगन्त बधीर, भीषण रब होता था बार बार कर।।
सुनसान सड़क पर सन्नाटा था चारों ओर।
लग रहा था डर दूर भी थी भोर।।
भरे भुवन कठोर रव रवि बाजि तजि मारग चले।
चिक्करहिं दिग्गज डोल महिं, अहि कोल कूरम कलमले।।
समस्त सर्पो संग श्याम ज्यो कढे,
कलिंद की नंदनि के सु-अंक-से।
खड़े किनारे जितने मनुष्य थे,
सभी महा शंकित भीत हो उठे।
आरत पुकारत सम्हारत न कोऊ काहू,
व्याकूल जहां सो तहां लोग चले भागी है।

 

निष्कर्ष

छात्रों मैं उम्मीद करता हूं कि आपको आज की यह पोस्ट भयानक रस किसे कहते हैं (Bhayanak Ras Kise Kehte Hain) आपको पसंद आई होगी मैं इस पोस्ट को भयानक रस को कुछ उदाहरण (Bhayanak Ras Ke Udaharan) के माध्यम से समझने की संपूर्ण कोशिश की है जिससे आपको भयानक रस आसानी से समझ में आ जाए।

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