बहुव्रीहि समास, परिभाषा, उदाहरण व भेद | Bahuvrihi Samas Kise Kahate Hain

स्वागत है दोस्तों आज की नई पोस्ट बहुव्रीहि समास bahuvrihi Samas में आज इस पोस्ट के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे की बहुव्रीहि समास किसे कहते हैं?(Bahuvrihi Samas kise Kahate Hain) बहुव्रीहि समास के कितने भेद होते हैं? तथा साथी में बहुव्रीहि समास (Bahuvrihi Samas) के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण के माध्यम से इस संपूर्ण पोस्ट को पढ़ेंगे।
समास हिंदी व्याकरण का एक महत्वपूर्ण अंग है हर परीक्षा में समास से सवाल पूछे जाते हैं आज हम महत्वपूर्ण टॉपिक बहुव्रीहि समास की बात करने वाले हैं। तो देरी न करते हुए जानते हैं कि बहुव्रीहि समास किसे कहते हैं? (BahuvrihiSamas Kise Kahate Hain) बहुव्रीहि समास की परिभाषा, भेद व उदाहरण के साथ

Bahuvrihi Samas Kise Kahate Hain
Bahuvrihi Samas Kise Kahate Hain

बहुव्रीहि समास की परिभाषा | Bahuvrihi Samas Ki Paribhasha

जिस समास का ना तो प्रथम पद प्रधान होता है और ना ही द्वितीय पद प्रधान होता है दो पद मिलकर कोई अन्य अर्थ निकलते हैं। तो उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं।

जैसे : "पीतांबर" इसके दो पद हैं "पीत + अंबर"

पहले पद विशेषण और दूसरा पद संज्ञा इसे कर्मधारय समास होना चाहिए था परंतु बहुव्रीहि समास में पीतांबर का विशेष अर्थ पीले वस्त्र धारण करने वाले श्री कृष्ण से लिया गया है।

इस समास का विग्रह करने पर वाला है जो जिसका जिसकी जिसके वह आज शब्दों का प्रयोग करते हैं वहां बहुव्रीहि समास होता है।

बहुव्रीहि समास के उदाहरण | Bahuvrihi Samas ke Udaharan

समास समास विग्रह
लंबोदरलंबा है उधर जिसका अर्थात गणेश
सुग्रीवसुंदर है ग्रीवा जिसके अर्थात मानव राज
युधिष्ठिरयुद्ध में स्थिर रहता है जो अर्थात धर्मराज
पंजाबपांच आबो वाला क्षेत्र एक राज्य
घनश्यामघन के समान है जो श्याम अर्थात श्री कृष्णा
एकदंतएक है दांत जिसका अर्थात गणेश
त्रिनेत्रतीन है नेत्र जिसके अर्थात शंकर
खगेशखागो का ईश है जो अर्थात गरुड़
समास समास विग्रह
गिरिधरगिरि को धारण किया है जिसने अर्थात श्री कृष्णा
सशरीरशरीर के साथ है जो
हंस वाहिनीहंस जिसका है वाहन
वीणापाणिवीणा है पाणि मे जिसके अर्थात सरस्वती
धनंजयधन को जय करता है जो अर्थात अर्जुन
मुरारीवह जो मुर राक्षस का शत्रु है अर्थात् कृष्ण
जलजजल में उत्पन्न होता है जो अर्थात कमल

बहुव्रीहि समास के भेद | Bahuvrihi Samas Ke Bhed

बहुव्रीहि समास के मुख्ता चार भेद होते हैं जो निम्नलिखित हैं।

1. समानाधिकरण बहुव्रीहि समास
2. व्याधिकरण बहुव्रीहि समास
3. तुल्ययोग बहुव्रीहि समास
4. व्यतिहार बहुव्रीहि समास

समानाधिकरण बहुव्रीहि समास किसे कहते हैं?

वह समास जिसके दोनों पदों में एक समान विभक्ति होती है वहां पर समानाधिकरण बहुव्रीहि समास होता है।

समानाधिकरण बहुव्रीहि समास के उदाहरण

समास समास विग्रह
नेकनाम नेक है नाम जिसका अर्थ यस वाला विशेष व्यक्ति
दसमुखदस है मुख्य जिसके अर्थात रावण
एकदंतएक है दांत जिसका अर्थात गणेश
खगेश खागो का ईश है जो अर्थात गरुड़
मिठाबोलामीठी है बोली जिसके अर्थात विशेष व्यक्ति
सहस्त्राक्ष सहस्त्र है आंखें जिसकी अर्थात इंद्र
त्रिनेत्रतीन है नेत्र जिसके अर्थात शंकर
चतुर्भुजचार है भुजाएं जिसकी अर्थात विष्णु
लंबोदरलंबा है उधर जिसका अर्थात गणेश

व्याधिकरण बहुव्रीहि समास किस कहते हैं?

वह समास जिनके पदों में आसमान विभक्ति वाले शब्द हो वह व्याधिकरण बहुव्रीहि समास कहलाता हैं।

व्याधिकरण बहुव्रीहि समास के उदाहरण

समास समास विग्रह
गिरिधरगिरि को धारण किया है जिसने अर्थात श्री कृष्णा
चंद्रशेखरचंद्र है सर पर जिसके अर्थात शंकर
वीणापाणिवीणा है पाणि मे जिसके अर्थात सरस्वती
चंद्रमौलिचंद्र है मौलि पर जिसके अर्थात शंकर
शूलपाणिशूल है पाणि में जिसके अर्थात शंकर

तुल्ययोग बहुव्रीहि समास किसे कहते हैं?

जिस समास में पहला पदसह” बोधन होता है उसे तुल्ययोग बहुव्रीहि समास कहते हैं।

तुल्ययोग बहुव्रीहि समास के उदाहरण

समास समास विग्रह
सबलबाल के साथ है जो
सपरिवारपरिवार के साथ है जो
सहासहास के साथ है जो
सचेतचेत के साथ है जो
सदेहदेह के साथ है जो
सशरीरशरीर के साथ है जो

व्यतिहार बहुव्रीहि समास किसे कहते हैं?

वह समाज जिसमें “अपशब्द (लड़ाई-झगड़ा) या (घात-प्रतिघात) सूचक पद होते हैं उसे व्यतिहार बहुव्रीहि समास कहते हैं।

व्यतिहार बहुव्रीहि समास के 5 उदाहरण

समास समास विग्रह
धक्का-मुक्कीधक्कों से जो लड़ाई हुई
बात-बातीबात-बात में जो झगड़ा हुआ
गला गलीगलियों से जो झगड़ा हुआ
मुक्का मुखीमुक्कू से जो लड़ाई हुई
लाठालाठीलाठियों से जो लड़ाई हुई

बहुव्रीहि समास और कर्मधारय समास में अंतर

कर्मधारय समास के दोनों पदों में विशेषण विशेष्य या उपमेय उपमान का संबंध होता है।
अर्थात : कर्मधारय समास के अंतर्गत पहला पद विशेषण होता है तथा दूसरा पद विशेष होता है।
या दोनों पदों में उपमेय उपमान का संबंध पाया जाता है।

जबकि, बहुव्रीहि समास में दोनों पद मिलकर किसी तीसरे पद की ओर संकेत करते हैं।
अर्थात : बहुव्रीहि समास में न तो पहले पद प्रधान होता है और न ही अंतिम पद प्रधान होता है। बल्कि दोनों पद मिलकर अन्य तीसरे पद का निर्माण (संकेत) करते हैं वहां बहुव्रीहि समास होता है।

बहुव्रीहि समास में कौन सा पद प्रधान होता है?

बहुव्रीहि समास में कोई पद प्रधान नहीं होता है।
बहुव्रीहि समास में ना तो प्रथम पद प्रधान होता है और ना ही उत्तर पर प्रदान होता है।

निष्कर्ष

छात्रों में उम्मीद करता हूं की आपको आज की यह पोस्ट बहुव्रीहि समास आपको पसंद आई होगी मैं इस पोस्ट में बहुव्रीहि समास के उदाहरण (Bahuvrihi Samas Ke Udaharan) के माध्यम से समझने की कोशिश की है जिससे आपको आसानी से समझ में आ जाए।

यदि आपको बहुव्रीहि समास (Bahuvrihi Samas) कि इस पोस्ट में किसी प्रकार की कोई शिकायत है। या आपको समास से संबंधित कोई सुझाव देना है तो आप हमें कमेंट सेक्शन या फिर ईमेल के माध्यम से सूचित कर सकते हैं मैं इस त्रुटि को जल्द से जल्द सुधारने का प्रयास करूंगा। आपके बहुमूल्य विचारों का इंतजार रहेगा। आपको बहुव्रीहि समास (Bahuvrihi Samas) कि यह पोस्ट अच्छी लगी है तो आप अपने मित्रों व परिवार के साथ इस व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर पर शेयर कर सकते हैं। धन्यवाद!

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