अव्यय किसे कहते हैं अव्यय के भेद व उदाहरण | Avyay Kise Kahate Hain

नमस्ते दोस्तों मैं आप सभी लोगों का स्वागत करता हूं मैं Studyroot.in की तरफ से आज हम आपको अव्यय किसे कहते हैं (Avyay Kise Kahate Hain) के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर आएंगे हम पहले देखेंगे कि Avyay ke ke kitne bhed hote Hain और हम अव्यय के सभी भेदों को पढ़ने के साथ Avyay kise kahate Hain in Hindi Grammar यह पोस्ट क्लास 10 व 12 के छात्रों के लिए यह कहें 1 से लेकर 12 के सभी छात्रों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। मैंने इस को इस प्रकार लिखा है कि आप अव्यय के बारे में अधिकतम जानकारी प्राप्त कर सकें जिससे आपको दूसरी कोई पोस्ट पढ़ने की कोई जरूरत ना पढ़े।

Avyay Kise Kahate Hain
Avyay Kise Kahate Hain

अव्यय की परिभाषा | Avyay Ki Paribhasha

जिनमें लिंग, वचन और कारक से कोई विकार नहीं होता है उन्हें अव्यय या अविकारी शब्द कहते हैं।

अव्यय का शाब्दिक अर्थ है – अ+व्यय=अव्यय

1. गोविंद तेज दौड़ता है।

2. तुम तेज दौड़ते हो।

अव्यय के भेद व प्रकार | Avyay Ke Bhed

  1. क्रिया विशेषण अव्यय।  
  2. संबंधबोधक अव्यय
  3. समुच्चयबोधक अव्यय।  
  4. विस्मयादिबोधक अव्यय

1. क्रिया विशेषण अव्यय किसे कहते हैं?

वे अविकारी अथवा अव्यय शब्द जो क्रिया की विशेषता बताते हैं उन्हें क्रिया विशेषण अव्यय कहते हैं।

क्रिया विशेषण अव्यय के उदाहरण

  • वह बहुत धीरे चलता है
  • मोहन सुंदर लिखता है।
  • वह प्रतिदिन पढ़ता है।
  • राम धीरे चलता है।          
  • बहुत बड़ा आदमी।

एक क्रिया विशेषण दूसरे क्रिया विशेषण की विशेषता बताता है। 

  • बहुत चलाक बालक बहुत तेज बोलते हैं।

इस वाक्य में पहला, ‘बहुत’ प्रविशेषण ‘चालाक’विशेषण।    ‘बालक’कर्ता

दूसरा, ‘बहुत’क्रिया विशेषण।   ‘तेज’क्रिया विशेषण

क्रिया विशेषण अव्यय चार प्रकार के होते हैं।

  1. काल वाचक क्रिया विशेषण
  2. स्थान वाचक क्रिया विशेषण
  3. परिमाण वाचक क्रियाविशेषण
  4. रीतिवाचक क्रिया विशेषण

कालवाचक क्रिया विशेषण

वे अव्यय शब्द जो समय का बोध कराते हैं उसे कालवाचक क्रिया विशेषण कहते हैं। 

अब, कब, तब, जब, आज, कल, परसों, सुबह, दोपहर, शाम, अभी-अभी, कभी-कभी कभी न कभी, सदा, सर्वदा, सदैव, पहले, पीछे, नित्य ज्यों ही, त्यों ही, एक बार, पहली बार, आजकल, घड़ी घड़ी, रात भर, दिन भर, क्षणभर, कितनी देर में, शीघ्र, जल्दी, बार-बार इत्यादि।

कालवाचक के 3 भेद माने जाते हैं।

  • समय वाचक – आज, कल, अभी, तुरंत, परसों आदि।
  • अवधि वाचक – अभी-अभी, रात भर, आजकल, नित्य आदि।
  • बारंबारता – हर बार, कई बार, प्रतिदिन इत्यादि।
  • सीता कल आएगी।   

• रमेश जयपुर आज जाएगा।

स्थान वाचक क्रिया विशेषण

वे अव्यय शब्द जो क्रिया के स्थान एवं दिशा का ज्ञान कराते हैं। उसे स्थान वाचक क्रिया विशेषण कहते हैं।

जैसे- ऊपर-नीचे, पास, अंदर, बाहर-भीतर, इधर-उधर, यहां-वहां, दाएं-बाएं, हर जगह, सर्वत्र आदि।

  • इधर उधर मत भागो।    
  • हमारे पास रहना।

स्थान वाचक क्रिया विशेषण के दो भेद माने जाते हैं।

  • स्थिति वाचक – यहां वहां भीतर बाहर इत्यादि।

दिशावाचक – इधर-उधर, दाएं बाएं इत्यादि।

परिमाणवाचक क्रिया विशेषण

वे अव्यय शब्द जो क्रिया के नाप-तौल (परिमाण) का ज्ञान कराते हैं, उसे परिमाणवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं।

उदाहरण – बहुत, अधिक, कम, अति, ज्यादा, कुछ, खूब, काफी, केवल, जरा, बस, लगभग, कुछ, बिल्कुल, पूर्णतया, आदि।

परिमाणवाचक के पांच भेद माने जाते हैं।

  • अधिकताबोधक – बहुत, खूब, अत्यंत, अति आदि।
  • न्यूनता बोधक – जरा, थोड़ा, किंचित, कुछ इत्यादि।
  • पर्याप्तिबोधक – बस, यथेष्ट, काफी, ठीक इत्यादि।
  • तुलना बोधक – कम, अधिक, इतना, उतना इत्यादि।

श्रेणी बोधक – बारी-बारी, तिल-तिल, थोड़ा-थोड़ा इत्यादि।

जैसे– 

  • अमित बहुत बोलता है।     
  • कुछ खा लो।
  • दूध कम है।

रीतिवाचक क्रिया विशेषण

वे अव्यय शब्द जो क्रिया की रीति या ढंग का ज्ञान कराते हैं। उसे रीतिवाचक क्रिया विशेषण करते हैं।

जैसे-

धीरे-धीरे, शीघ्र, तेज, स्वयं, यथाशक्ति, निसंदेह, मानों, शाथर, अचानक आदि। 

(जिन क्रिया विशेषणों का समावेश, दूसरे वर्गों में नहीं हो सकता उनकी गणना इसी में की जाती है) 

इस क्रिया विशेषण को निम्नलिखित भागों में बांटा जा सकता है।

प्रकार– 
ऐसे, कैसे, वैसे, मानो, अचानक, धीरे-धीरे, स्वयं, परस्पर, आपस में, यथाशक्ति, फटाफट, झटपट, आप ही आप इत्यादि।
निश्चय बोधक – 
निसंदेह, अवश्य, बेशक, सही, सचमुच, जरूर, अलबत्ता, दरअसल, यथार्थ में, वस्तुतः आदि।
अनिश्चित बोधक – 
यथासंभव, कदाचित, शायद, संभव है, हो सकता है, यथा-सांध्य आदि।
स्वीकार बोधक
हां, ठीक, अच्छा, जी, अवश्य, तो, ही, सच आदि।
निषेध बोधक – 
न, नहीं, मत, गलत, झूठ आदि।
कारण बोधक – 
इसलिए, क्यों, अतएव, काहे को, करके आदि।
अवधारणा बोधक – 
तो, ही, भी, मात्र, भर, तक आदि।

जैसे- 

  • हाथी धीरे धीरे चलता है।
  • मैं अपना काम स्वयं करता हूं।

समुच्चयबोधक अव्यय किसे कहते हैं?

समुच्चयबोधक अव्यय – जो अव्यय क्रिया या संज्ञा की विशेषता न बतलाकर शब्दों, वाक्यांशों अथवा वाक्यों को जोड़ने का कार्य करते हैं उन्हें समुच्चय बोधक अव्यय कहते हैं।

  • अमित और सुनील कॉलेज को जाते हैं।

इस वाक्य में ‘और’ अमित और सुनील को क्रिया ‘जाते हैं’ से जोड़ता है 

समुच्चयबोधक अव्यय के दो भेद होते हैं।

  • संयोजक अव्यय।

विभाजक अव्यय

संयोजक अव्यय

वे अव्यय शब्द जो दो शब्दों या वाक्यों को जोड़ते हैं, उसे संयोजक अव्यय कहते हैं।

जैसे- और, तथा, एवं, जो, तो, यदि, पुनः, यथा, इसलिए, की, मानो आदि।

  • यदि तुम पढ़ते ‘तो’ पास हो जाते।

• यह मेरा घर है ‘और’ यह मेरी बहन का घर है।

विभाजक अव्यय

वे अव्यय शब्द जो 2 शब्दों या वाक्यों में विभाजन करते हैं, उसे विभाजक अव्यय कहते हैं।

जैसे– किंतु, परंतु, पर, ताकि, फिर, भी, या, अथवा, अन्यथा, तथापि, यद्यपि आदि।

  • वर्षा हुई ‘किंतु’ गर्मी शांत नहीं हुई।

• आज लड़कियां आगे हैं ‘किंतु’ लड़के पीछे रहे हैं।

 संबंधबोधक अव्यय किसे कहते हैं

संबंधबोधक अव्यय – जो अव्यय संज्ञा एवं सर्वनाम के बाद आते हैं उनका संबंध दूसरे वाक्य के साथ बताया जाता है उसे संबंधबोधक अव्यय कहते हैं।

जैसे- खुशी के मारे वह पागल हो गई।

संबंध बोधक अव्य 10 प्रकार के होते हैं।

 

कालवाचक – पहले, आगे, पीछे, उपरांत।
जैसे- मेरे घर के ‘पीछे’ नाला बहता है।
स्थान वाचक – सामने, भीतर, बाहर, नीचे, ऊपर, पीछे
जैसे- मेरे घर के ‘अंदर’ रसोई है।
मेरे घर के ‘सामने’ नदी बहती है।
दिशा वाचक – आस, पास, तरफ, ओर।
जैसे– बालक आसमान की ‘ओर’ देखता है।
समता वाचक – भांति समान तुल्य योग जैसा
जैसे- ज्ञान के ‘समान’ कोई वस्तु नहीं है।
साधन वाचक – द्वारा, सहारे, माध्यम, जरिये, मारफत
जैसे- मेरे ‘द्वारा’ कुछ गलत नहीं हो जाये।

विषय वाचक – लेखें, बाबत, भरोसे, विषय, निस्बत, नाम आदि।
जैसे- मुझे रवि के ‘विषय’ में कुछ नहीं कहना।
विरुद्ध वाचक – विपरीत, विरुद्ध, उल्टा, खिलाफ
जैसे– आप के ‘विपरीत’ चुनाव में कोई नहीं खड़ा है?
संग वाचक – साथ, संग, सहचर, सहित, समेत आदि।
जैसे– राम के ‘साथ’ सीता रहती हैं।
हेतु वाचक – कारण, लिए, वास्ते, प्रयोजन, निमित्त,
जैसे– मेरे ‘कारण’ तुम्हें परेशानी हुई।
तुलना वाचक – अपेक्षा, आगे, सामने, बनिस्पत
जैसे– अशोक महेश के ‘सामने’ कुछ नहीं है।

व्युत्पत्ति के आधार पर संबंधबोधक अव्यय के भेद

व्युत्पत्ति की दृष्टि से संबंधबोधक अव्यय के दो भेद होते हैं।

  • मूल संबंधबोधक।        
  • यौगिक संबंधबोधक

मूल संबंधबोधक – बिना, पर्यंत, पूर्वक आदि।

योगिक संबंधबोधक

  • संज्ञा से– अपेक्षा, पलटे, लेखें, मारफत आदि।
  • विशेषण से– समान, योग्य, ऐसा, उल्टा, तुल्य आदि।
  • क्रिया से– लिए, मारे, चलते, कर, जाने आदि।

क्रियाविशेषण से– पीछे, परे, पास आदि।

विस्मयादिबोधक अव्यय किसे कहते हैं?

विस्मयादिबोधक अव्यय – वे अव्यय शब्द जो आश्चर्य, घृणा, शोक, हर्ष, भय तथा प्रशंसा का बोध कराते हैं उसे विस्मयादिबोधक अब अव्यय कहते हैं।

विस्मयादिबोधक अव्यय निम्न प्रकार के होते हैं।

  • आश्चर्य बोधक 
  • शोक बोधक
  • हर्ष बोधक 
  • प्रशंसा बोधक
  • क्रोध बोधक
  • भय बोधक
  • घृणा बोधक 
  • चेतावनी बोधक
  • इच्छा बोधक
  • आशीर्वाद बोधक

 

शोक बोधक– उफ!, हाय!, हां!, त्राहि-त्राहि!, हे राम!, राम-राम!, हां! आदि।
जैसे- हे भगवान! तूने मुझे मार डाला
आश्चर्य बोधक– क्या, अरे है!, ऐ!, ओहो!, अहो! आदि।
जैसेअरे! आज गाड़ी ठीक समय पर आ गई।
हर्ष बोधक– वाह!, धन्य!, अहा!
जैसेवाह! कैसी सुंदर कहानी है।
प्रशंसा बोधक– वाह!, अति!, सुंदर!, शाबाश!, खूब!
जैसेअति! सुंदर लड़की।
क्रोध बोधक– अबे!, अरे!, चुप!, ठहर!, हट!, पाजी!, अजी! आदि।
जैसे – अरे! तू यहां से जा रहा है या नहीं।
भय बोधक– हाय!, वायरे!
जैसेबाप रे! कितनी बड़ी गाड़ी।
घृणा बोधक – छि:!-छि!, धिकार!, धत! आदि।
जैसेछि:!-छि:! धिक्कार है तुम्हारे नाम को।
चेतावनी बोधक– खबरदार!, बचो!, सावधान!।
जैसेसावधान! शत्रु सामने खड़ा है।
इच्छा बोधक– काश!,  हाय!
जैसे- काश! वह नौकरी प्राप्त करेगा।
आशीर्वाद बोधक– शाबाश!, खुश रहो!, चिरंजीव!
जैसेचिरंजीव! सफलता तुम्हें वरण करें।

निष्कर्ष

दोस्तों आज की पोस्ट Avyay kise kahate Hain मैं उम्मीद करता हूं कि यह पोस्ट आपको पसंद आई होगी मैंने Avyay in Hindi को सरलता के साथ समझाने की पूर्ण कोशिश की है। अगर कोई जानकारी Avyay kise kahate Hain और Avyay ke kitne bhed hote Hain in Hindi या अन्य किसी प्रकार की पोस्ट में हमसे कुछ छूट गया। हो तो आप नीचे कमेंट कर हमें सूचित कर सकते हैं। और हम आपके लिए आगे किस विषय पर जानकारी दें यह भी सुझाव जरूर बताएं आप आपके कमेंट का इंतजार रहेगा।

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