अतिथि का पर्यायवाची शब्द | Atithi Ka Paryayvachi Shabd Kya Hota hai

अतिथि का पर्यायवाची शब्द | Atithi Ka Paryayvachi Shabd : मेहमान, पाहुन, आगुंतुक, अभ्यागत, रिश्तेदार, नातेदार, ग्रहागत, आगत आदि, आज की नई पोस्ट अतिथि का पर्यायवाची शब्द हिंदी में आज इस पोस्ट के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे की अतिथि का पर्यायवाची शब्द तथा साथ ही अ से पर्यायवाची शब्द हिंदी में | (Atithi Ka Paryayvachi Shabd in Hindi) के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण के माध्यम से इस पोस्ट को पढ़ेंगे।

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पर्यायवाची शब्द किसे कहते हैं?

पर्यायवाची शब्द की परिभाषा : वह शब्द जो एक समान अर्थ (एक दूसरे की तरह अर्थ) रखते हैं। वो शब्द पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं।

चुंकि इनके अर्थ में समानता अवश्य रहती है लेकिन इनका प्रयोग विभिन्न प्रकार से होता है पर्यायवाची शब्दों को उसके गुण व भाव के अनुसार प्रयोग किया जाता है क्योंकि एक ही शब्द या नाम हर स्थान पर उपयुक्त नहीं हो सकता है ‘इच्छा’ शब्द के स्थान पर ‘कामना’ शब्द प्रयोग करना कितना शर्मनाक होगा आपको ऐसे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए जो छोटे व प्रचलित हो।

अतिथि का पर्यायवाची शब्द क्या होता है?

अतिथि का पर्यायवाची शब्दAtithi Ka Paryayvachi Shabd
मेहमान, पाहुन, आगुंतुक, अभ्यागत, रिश्तेदार, नातेदार, ग्रहागत, आगतMehman, Pahun, Agantuk, Abhyagat, Rishtedar, Natedar, Grahagat, Agat

से शुरू होने वाले पर्यायवाची शब्द

  • अनार- दाडिम, शुकप्रिय, रामबीज 
  • अंधा – नेत्रहीन, सूरदास, अन्ध, चक्षुविहिन, प्रज्ञाचक्षु
  • अनुवाद – भाषान्तर, उल्था, तर्जुमा ।
  • अपराध – जुर्म, दोष, कसूर, 
  • अप्सरा – सुरसुन्दरी, देवांगना, सुरबाला, दिव्यांगना, देवबाला 
  • अपार – बेशुमार, असीम, अनन्त, बेहद, निस्सीम
  • अधिकार – हक, स्वामित्व, प्रभुत्व, स्वत्व, आधिपत्य अचेत – बेहोश, मूर्च्छित, बेखबर, संज्ञाहीन, चेतनाहीन
  • अभिप्राय – अर्थ, मतलब, मायने, तात्पर्य, आशय
  • अपमान – बेइज्जती, अनादर, तिरस्कार, निरादर, अवमान, अवज्ञ, उपेक्षा, 
  • अरण्य – जंगल, वन, विपिन, अटवी, कानन, 
  • अंग – देह, तन, शरीर, कलेवर, अवय, वयु, काया
  • अनुपम – अनोखा, अद्भूत, अनूठा, अद्वितीय, अपूर्व, 
  • अनेक – कई, एकाधिक, नाना
  • अभिजात – श्रेष्ठ, उच्च, पूज्य, कुलीन 
  • अधर – ओष्ठ, ओठ, रदच्छद, रदपुट
  • अर्थ – धन, अभिप्राय, हेतु
  • अरुण – सूर्य, सिन्दूर, 
  • अंक – संख्या, नाटक का एक भाग, हृदय, गोद, सर्ग
  • अमृत – सोम, अमिय, सुधा, पीयुष, अभी
  • अग्नि – आग, अनल, पावक, दव, ज्वाला, ज्वलन, धूम्रकेतु, धंन्नजय, जातदेव, हुताशन, वैश्वानर, वायुसख, दहन, • कृषानु, रोहिताश्व्, वहिन 
  • अश्व – घोडा, तुरंग, घोटक, हय, बाजि, रविसुत सैंधव
  • अचल – गिरि, शैल, नग, महिधर, आद्रि 
  • अचला – पृथ्वी, धरती, क्षिति, वसुन्धरा, वसुधा, धरा
  • अक्षर – वर्ण, मोक्ष, शिव, ब्रम्हा 
  • अतिथि – मेहमान, पाहुन, आगुन्तुक, अभ्यागत
  • अन्वेषण – खोज, जाँच, शोध, गवेषण, अनुसंधान
  • असुर – राक्षस, दानव, दैत्य, तमीरचर, सुरारि, दनुज, निशाचर, रजनीचर, यातुधान, 
  • अज – बकरा, ब्रम्हा, ईश्वर, दशरथ के जनक 
  • अनाज- अन्न, गल्ला, शस्य, धान्य
  • अच्छा – बढ़िया, चोखा, उम्दा, आला, घणा 
  • अंश – भाग, हिस्सा, भंग, अवयव 
  • अध्यापक – शिक्षक, गुरु, आचार्य, प्रवक्ता, व्याख्याता

अतिथि से जुडे कुछ रोचक तथ्य

Atithi ka paryayvachi Shabd kya hai

अतिथि– बिना तिथि बताए आने वाले मेहमान।

अतिथि– संस्कृत का मूल शब्द है इसे अंग्रेजी मे Guest कहते हैं। और हिंदी में मेहमान कहा जाता है।

रिश्तेदार– श्याम के घर में आज उसके रिश्तेदार आए हैं।

आगत– आने वाले व्यक्ति को आगत या घर में आने वाले रिश्तेदार कहते हैं।

अतिथि का शाब्दिक अर्थ- साधु-संत मुनी भिच्छुक से है-

  • आपके द्वार पे व्यक्ति को भूखा लौटा देना पाप माना जाता है।
  • पंच यज्ञों में से एक अतिथि यज्ञ भी होता है।

जो किसी भी समय किसी भी स्थान से बिना प्रयोजन के उपस्थित हो जाता है उसे अतिथि कहते हैं। उसको भगवान का दूसरा रूप माना जाता है तभी तो कहते हैं कि- अतिथि देवो भव:

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