असुर का पर्यायवाची शब्द | Asur Ka Paryayvachi Shabd Kya Hota Hai

असुर का पर्यायवाची शब्द | Asur Ka Paryayvachi Shabd : तमीचर, निशाचर रजनीचर, यातुधान, दानव, राक्षस, तनुजा, दैत्य, सुरारि, बदमाश, देवारि, तमचर आदि, आज की नई पोस्ट असुर का पर्यायवाची शब्द हिंदी में आज इस पोस्ट के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे की असुर का पर्यायवाची शब्द तथा साथ ही अ से पर्यायवाची शब्द हिंदी में | ( Asur Ka Paryayvachi Shabd in Hindi) के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण के माध्यम से इस पोस्ट को पढ़ेंगे।

Asur ka paryayvachi Shabd kya hota hai
Asur ka paryayvachi Shabd kya hota hai

पर्यायवाची शब्द किसे कहते हैं?

पर्यायवाची शब्द की परिभाषा : वह शब्द जो एक समान अर्थ (एक दूसरे की तरह अर्थ) रखते हैं। वो शब्द पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं।

चुंकि इनके अर्थ में समानता अवश्य रहती है लेकिन इनका प्रयोग विभिन्न प्रकार से होता है पर्यायवाची शब्दों को उसके गुण व भाव के अनुसार प्रयोग किया जाता है क्योंकि एक ही शब्द या नाम हर स्थान पर उपयुक्त नहीं हो सकता है ‘इच्छा’ शब्द के स्थान पर ‘कामना’ शब्द प्रयोग करना कितना शर्मनाक होगा आपको ऐसे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए जो छोटे व प्रचलित हो।

असुर का पर्यायवाची शब्द क्या होता है?

असुर का पर्यायवाची शब्दAsur Ka Paryayvachi Shabd
तमीचर, निशाचर रजनीचर, यातुधान, दानव, राक्षस, तनुजा, दैत्य, सुरारि, बदमाश, देवारि, तमचरTamicher, Nishachar, Rajinichar, Yatudhaan, Danav, Rakshas, Tanuja, Deaty, Surari, Badmash, Devari, Tamchar

 से शुरू होने वाले पर्यायवाची शब्द

  • अपराध – जुर्म, दोष, कसूर, 
  • अप्सरा – सुरसुन्दरी, देवांगना, सुरबाला, दिव्यांगना, देवबाला 
  • अपार – बेशुमार, असीम, अनन्त, बेहद, निस्सीम
  • अधिकार – हक, स्वामित्व, प्रभुत्व, स्वत्व, आधिपत्य अचेत – बेहोश, मूर्च्छित, बेखबर, संज्ञाहीन, चेतनाहीन
  • अभिप्राय – अर्थ, मतलब, मायने, तात्पर्य, आशय
  • अपमान – बेइज्जती, अनादर, तिरस्कार, निरादर, अवमान, अवज्ञ, उपेक्षा, 
  • अरण्य – जंगल, वन, विपिन, अटवी, कानन, 
  • अंग – देह, तन, शरीर, कलेवर, अवय, वयु, काया
  • अनुपम – अनोखा, अद्भूत, अनूठा, अद्वितीय, अपूर्व, 
  • अनेक – कई, एकाधिक, नाना
  • अभिजात – श्रेष्ठ, उच्च, पूज्य, कुलीन 
  • अधर – ओष्ठ, ओठ, रदच्छद, रदपुट
  • अर्थ – धन, अभिप्राय, हेतु
  • अरुण – सूर्य, सिन्दूर
  • अमृत – सोम, अमिय, सुधा, पीयुष, अभी
  • अग्नि – आग, अनल, पावक, दव, ज्वाला, ज्वलन, धूम्रकेतु, धंन्नजय, जातदेव, हुताशन, वैश्वानर, वायुसख, दहन, • कृषानु, रोहिताश्व्, वहिन 
  • अश्व – घोडा, तुरंग, घोटक, हय, बाजि, रविसुत सैंधव
  • अचल – गिरि, शैल, नग, महिधर, आद्रि 
  • अचला – पृथ्वी, धरती, क्षिति, वसुन्धरा, वसुधा, धरा
  • अक्षर – वर्ण, मोक्ष, शिव, ब्रम्हा 
  • अतिथि – मेहमान, पाहुन, आगुन्तुक, अभ्यागत
  • अन्वेषण – खोज, जाँच, शोध, गवेषण, अनुसंधान
  • असुर – राक्षस, दानव, दैत्य, तमीरचर, सुरारि, दनुज, निशाचर, रजनीचर, यातुधान, 
  • अज – बकरा, ब्रम्हा, ईश्वर, दशरथ के जनक 
  • अनाज- अन्न, गल्ला, शस्य, धान्य
  • अच्छा – बढ़िया, चोखा, उम्दा, आला, घणा 
  • अंश – भाग, हिस्सा, भंग, अवयव 
  • अध्यापक – शिक्षक, गुरु, आचार्य, प्रवक्ता, व्याख्याता
  • अंक – संख्या, नाटक का एक भाग, हृदय, गोद, सर्ग
  • अनार- दाडिम, शुकप्रिय, रामबीज 
  • अंधा – नेत्रहीन, सूरदास, अन्ध, चक्षुविहिन, प्रज्ञाचक्षु
  • अनुवाद – भाषान्तर, उल्था, तर्जुमा ।

असुर से जुडे कुछ रोचक तथ्य

Asur Ka Paryayvachi Shabd

असुर – हिंदू धर्म ग्रंथों में असुर वे लोग हैं। जो देवताओं से संघर्ष करते हैं। असुर का अर्थ होता है। जो देवता नहीं होता यह तीन प्रकार के होते हैं। दैत्य, दानव, राक्षस और भूत, प्रेत आदि बुरी आत्माओं को असुर  कहते हैं।

जिस प्रकार असुर तीन प्रकार के होते हैं उसी प्रकार उनकी माताएं भी तीन प्रकार की होती की हैं- दैत्यों की माता दिति, दानवों की माता दानु और राक्षसों की माता सुरसा है।

असुर ऋषि, मुनियों को तपस्या तथा यज्ञ करते देखते हैं। तो उनकी तपस्या को भंग करने के लिए आ जाते हैं। इसलिए हम इनको राक्षस रहते हैं।

असुर शब्द का प्रयोग ऋग्वेद में 106 बार हुआ है। असुर का मतलब होता है। जो बुरे कार्यों को करते हैं और किसी का भला ना करके हर एक व्यक्ति का बुरा करते हैं उसे राक्षस या दानव या असुर कहते हैं। और ऐसे असुरों का नाश करने के लिए भगवान धरती पर अवतार लेते हैं।

बुरी आत्मा और भूत, प्रेतों को भी राक्षस या असुर कहते हैं। असुरों के पास राक्षसीय शक्तियां भी होती हैं। पुराने जमाने में भूत प्रेत और राक्षसी शक्तियां ज्यादा पाई जाती थी।

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