अनुस्वार – अनुस्वार किसे कहते हैं | Anuswar Kise Kahate Hain

बहुत से विद्यार्थियों के मन में अनुस्वार (Anuswar) व अनुनासिक को लेकर सोचते हैं कि अनुस्वार व अनुनासिक एक ही होता है परंतु यह अलग-अलग टॉपिक है या कहें कि अनुस्वार व अनुनासिक दोनों अलग तरह की ध्वनियां है शब्दों के उच्चारण में अनुस्वार (Anuswar) का अपना एक अलग स्थान है और अनुनासिक का अपना एक अलग मुकाम है कृपया इनको एक ही में मिश्रित करने की कोशिश ना करें परंतु कुछ नियम ऐसे जरूर हैं जहां पर अनुनासिक (ँ)  की जगह पर अनुस्वार (ं) का प्रयोग किया जाता है।

• अनुस्वार को आयोग कहते हैं तो यह पूर्णतया स्वर है और न पूर्णतया व्यंजन है।

अनुस्वार की परिभाषा | Anuswar Ki Paribhasha

अनुस्वार का शाब्दिक अर्थ होता है। 

अनु + स्वर = अनुस्वार

अर्थात स्वर के बाद में आने वाला ।

अनुस्वार की मात्रा (अं)

अनुस्वार की मात्रा शिरोरेखा के ऊपर एक बूंद की तरह प्रयोग की जाती है। ना तो इसे स्वर माना गया है और ना तो व्यंजन माना गया है।

  • इसे अं के उच्चारण के सहयोग से उच्चारित किया जाता है इसलिए इसे स्वर में भी आंशिक रूप से शामिल होता है। और पंचाक्षर की जगह पर इस्तेमाल होता है। इसी कारण इसे व्यंजन की तरह भी इस्तेमाल करते हैं।

इसी कारणवश इसे ना तो स्वर में शामिल किया गया है और ना ही व्यंजन में शामिल किया गया है इसे अयोगवाह कहते हैं।

  • अनुस्वार का उच्चारण स्थान नाक से होता है।

अनुस्वार के प्रयोग व रूप | Anuswar Ke Prayog va Roop

इसे तीन रूप से प्रयोग किया जाता है।

अनुस्वार के रूप में

अनुस्वार के रूप में – य से लेकर ह तक के पहले, यदि इसका उच्चारण आता है। तो यह अनुस्वार के रूप में ही प्रयोग होगा।

य, र, ल, व, श, ष, स, ह 

जैसे – संयम, संत, संश्रय, संयुक्त, संयोग, संरक्षित, संरक्षण, संरचना, संरक्षक, संवेदना, संवाहन, संलयन, संलाप, अंश, संशोधन

नासिक के व्यंजन के स्थान पर

नासिक व्यंजन – सभी वर्गों के पंचमाक्षर या पांचवा शब्द (ङ, ञ, ण, न, म)

क वर्ग से प वर्ग तक – 

यदि पंचमाक्षर वर्ण किसी शब्द के बीच में अपने आधे रूप में आते तो उनके स्थान पर हम अनुस्वार (ं) का प्रयोग करते हैं।

जैसे – 

  • अङ्क – अंक
  • शङ्ख – शंख
  • गङ्गा – गंगा
  • चञ्चल – चंचल
  • पञ्चम – पंचम
  • चम्पा – चंपा
  • घण्टा – घंटा
  • झण्डा – झंडा

दन्त – दंत

नोट – इन्हीं वर्ग का पंचमाक्षर आना चाहिए।

अनुनासिक के स्थान पर अनुस्वार का प्रयोग

जब किसी वर्ण के ऊपर कोई मात्रा () लगी हो तो उसके स्थान पर अनुनासिक (ँ) की मात्रा अनुस्वार (ं) के रूप में लगाई जाती है या कहे की जगह के अभाव के कारण लगाई जाती है।

जैसे – में, मैं, मैंने, नींद, पिंजरा, सिंगर, बैंजो, चोंच चिंतित इत्यादि शब्द।

कौन कौन से शब्द में अनुस्वार का प्रयोग नहीं किया जाता है

अपवाद – जब दो पंचमाक्षर लगातार आते हैं तो हम इसको अनुस्वार में परिवर्तित नहीं कर सकते हैं।

जैसे – जन्म, सम्मान, सम्मति

अनुस्वार और अनुनासिक में अंतर | Anuswar Aur Anunasik Mein Antar

  • अनुनासिक ( ँ ) के प्रयोग से बना शब्द कभी तत्सम नहीं होता है।
  • अनुस्वार (ं) के प्रयोग से बना शब्द तत्सम होता है।

जैसे – 

  • हँस – (किसी व्यक्ति द्वारा हँसना)
  • हंस – (हंस एक पक्षी होता है)

निष्कर्ष

दोस्तों आज की पोस्ट Anuswar kise kahate Hain मैं उम्मीद करता हूं कि यह पोस्ट आपको पसंद आई होगी मैंने Anuswar in Hindi को सरलता के साथ समझाने की पूर्ण कोशिश की है। अगर कोई जानकारी Anuswar kise kahate Hain और Anuswar ke kitne bhed hote Hain in Hindi या अन्य किसी प्रकार की पोस्ट में हमसे कुछ छूट गया। हो तो आप नीचे कमेंट कर हमें सूचित कर सकते हैं। और हम आपके लिए आगे किस विषय पर जानकारी दें यह भी सुझाव जरूर बताएं आप आपके कमेंट का इंतजार रहेगा।

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